Jantar Mantar Protest: ‘या तो सॉरी बोलो या फिर इस्तीफा दो...’, जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के अनशन में पहुंची 7 साल की बच्ची ने सीधे पीएम मोदी और धर्मेंद्र प्रधान को दे डाली बड़ी चुनौती

Jantar Mantar Protest: ‘या तो सॉरी बोलो या फिर इस्तीफा दो...’, जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के अनशन में पहुंची 7 साल की बच्ची ने सीधे पीएम मोदी और धर्मेंद्र प्रधान को दे डाली बड़ी चुनौती

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे एक राजनीतिक आंदोलन के दौरान मंगलवार को बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित अनशन में पहुंची एक 7 साल की मासूम बच्ची ने अपनी अद्भुत वाकपटुता और चंचलता से सबका ध्यान खींच लिया। कैमरे के सामने बेबाकी से बात करते हुए इस बच्ची ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने अपनी मांगें रख दीं। 'द न्यूज पिंच' पर प्रसारित इस वीडियो में बच्ची का आत्मविश्वास देखकर वहां मौजूद भीड़ तालियां बजाने पर मजबूर हो गई।

'पीएम मोदी और धर्मेंद्र प्रधान को देती हूं दो चॉयस'

जब मौके पर मौजूद रिपोर्टर ने बच्ची से पूछा कि वह सरकार से क्या चाहती है, तो उसने बेहद परिपक्व अंदाज में कहा— "मैं धर्मेंद्र प्रधान और पीएम मोदी को दो चॉयस देती हूं। या तो आप लोग अपने पद से इस्तीफा दे दीजिए और सॉरी मत कहिए, या फिर सीधे यहां स्टेज पर आकर जनता के सामने सॉरी बोल दीजिए और इस्तीफा मत दीजिए।"

बच्ची का तीखा वार: मासूम ने आगे सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या आप लोगों को एक परसेंट भी शर्म नहीं आती? भारत के इतने बड़े साइंटिस्ट यहां पिछले 16 दिनों से बीमार पड़े हैं और सरकार कोई सुध नहीं ले रही है।

17वें दिन पहुंचा सोनम वांगचुक का आमरण अनशन

गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दीपके के नेतृत्व में प्रदर्शन चल रहा है। इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे 59 वर्षीय विख्यात साइंटिस्ट और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन मंगलवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया है।

लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक का स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है और उनका वजन करीब 8.2 किलोग्राम तक कम हो चुका है। सीजेपी के अनुसार, वांगचुक की मांसपेशियां कमजोर हो गई हैं और वे अत्यधिक शारीरिक दर्द में हैं। इसके बावजूद उन्होंने अनशन तोड़ने से साफ इनकार करते हुए कहा है कि सरकार से पूछा जाना चाहिए कि वे इस गंभीर मुद्दे पर बातचीत (संवाद) क्यों नहीं करना चाहती। देश के कई बड़े राजनेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनसे आंदोलन का कोई दूसरा रास्ता चुनने की अपील की है।

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