पंजाब में फिर होगा अकाली दल और BJP का गठबंधन? हरसिमरत कौर बादल के बाद अब बिक्रम मजीठिया ने दिए बड़े संकेत, बोले- 'जनता चाहती है दोनों दल आएं साथ'

पंजाब में फिर होगा अकाली दल और BJP का गठबंधन? हरसिमरत कौर बादल के बाद अब बिक्रम मजीठिया ने दिए बड़े संकेत, बोले- 'जनता चाहती है दोनों दल आएं साथ'

पंजाब के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़े सियासी फेरबदल और पुराने समीकरणों के पुनर्जीवित होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दो दशक पुरानी दोस्ती के फिर से जुड़ने की अटकलें जोरों पर हैं। बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल द्वारा पंजाब के विकास और शांति के लिए पुराने गठबंधनों की जरूरत पर दिए गए बयान के ठीक बाद अब पूर्व मंत्री और वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी दोनों पार्टियों के एक साथ आने की खुली पैरवी कर दी है। मजीठिया के इस ताजा बयान के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में अकाली दल की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में संभावित वापसी को लेकर बहस छिड़ गई है।

'पंजाब की जनता चाहती है दोनों पार्टियां फिर से एक हों' - बिक्रम मजीठिया

समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए बिक्रम सिंह मजीठिया ने अकाली दल और भाजपा के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों दलों ने लंबे समय तक राज्य और केंद्र में मिलकर काम किया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह गठबंधन केवल चुनावी नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने, आपसी भाईचारे और हिंदू-सिख एकता की मजबूत नींव पर आधारित था।

मजीठिया ने कहा कि 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर भले ही दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे, लेकिन पंजाब की मौजूदा स्थिति, सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, विकास और रोजगार के मुद्दों को देखते हुए आम जनता चाहती है कि दोनों दल फिर एक साथ आएं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन पर कोई भी अंतिम और औपचारिक फैसला दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व (हाईकमान) ही करेगा।

हरसिमरत कौर बादल और सुखबीर बादल की गतिविधियों से बढ़ी चर्चाएं

मजीठिया के बयान से पहले अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी राज्य के समग्र विकास और केंद्र व पंजाब के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया था। इसके साथ ही, हाल के दिनों में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस पुराने गठबंधन के दोबारा आकार लेने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

1998 से 2020: 22 साल पुरानी साझेदारी और अलगाव का इतिहास

अकाली दल और भाजपा का यह ऐतिहासिक राजनीतिक सफर 1998 में शुरू हुआ था, जब अकाली दल एनडीए का प्रमुख घटक दल बना। दोनों दलों ने मिलकर 2007 से 2017 तक लगातार 10 वर्षों तक पंजाब में गठबंधन सरकार चलाई। हालांकि, सितंबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में मतभेद गहराने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था और अकाली दल एनडीए से अलग हो गया था। बाद में नवंबर 2021 में केंद्र सरकार द्वारा तीनों कानून वापस ले लिए गए थे।

भविष्य के सियासी समीकरण और चुनौतियां

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने के बाद दोनों ही दलों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक वोट बैंक के बिखरने की चुनौती का सामना करना पड़ा है। राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक संतुलन को साधने के लिए दोनों दलों के नेताओं की ओर से दिए जा रहे ये सकारात्मक बयान एक नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, सीटों के बंटवारे और राज्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह पुराना गठबंधन कब तक औपचारिक रूप लेता है।

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