पंजाब कांग्रेस की खींचतान के बीच चन्नी और रंधावा ने की सचिन पायलट से मुलाकात: नए प्रभारी की तैनाती पर हाईकमान का जताया आभार

पंजाब कांग्रेस की खींचतान के बीच चन्नी और रंधावा ने की सचिन पायलट से मुलाकात: नए प्रभारी की तैनाती पर हाईकमान का जताया आभार

पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच जारी तीखी खींचतान और गुटबाजी के बीच नई दिल्ली के सियासी गलियारों में बड़ी हलचल देखने को मिली है। कांग्रेस हाईकमान द्वारा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हटाकर राजस्थान के युवा नेता सचिन पायलट को पंजाब का नया एआईसीसी (AICC) महासचिव व प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी के असंतुष्ट खेमे ने राहत की सांस ली है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री व जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने नई दिल्ली में सचिन पायलट से औपचारिक मुलाकात की। दोनों कद्दावर नेताओं ने पायलट को नई जिम्मेदारी की बधाई दी और पंजाब में गुटबाजी खत्म कर संगठन को पटरी पर लाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व के इस फैसले की जमकर सराहना की।

दिल्ली में हुई अहम बैठक: 2027 चुनाव और गुटबाजी पर हुई चर्चा

संसद भवन और नई दिल्ली स्थित आवास पर हुई इस मुलाकात के दौरान पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य, आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ आगामी आंदोलन की रणनीति और पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी गतिरोध को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।

  • चरणजीत सिंह चन्नी ने सचिन पायलट की नियुक्ति को एक "बेहद महत्वपूर्ण और समयोचित निर्णय" बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आभार व्यक्त किया।

  • गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट के पास लंबा संगठनात्मक अनुभव है और युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं में उनका मजबूत जनाधार पंजाब कांग्रेस में नई ऊर्जा और गति का संचार करेगा।

भूपेश बघेल पर लगा था एकतरफा होने का आरोप, चन्नी गुट ने खोल रखा था मोर्चा

पंजाब में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की राज्य इकाई दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आ रही थी। एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का गुट था, तो दूसरी तरफ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा और शेर सिंह घुबाया जैसे वरिष्ठ सांसदों का खेमा वड़िंग को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग पर अड़ा हुआ था।

पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल पर चन्नी खेमे ने खुलकर आरोप लगाया था कि वे प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग का पक्ष ले रहे हैं और वरिष्ठ नेताओं की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ गए थे कि बघेल के पंजाब दौरों के दौरान "बघेल गो बैक" के नारे लगे और बैठकों का बहिष्कार हुआ। ऐसे में हाईकमान को अहसास हुआ कि यदि प्रभारी को नहीं बदला गया, तो चुनाव से पहले गुटबाजी पूरी पार्टी को ले डूबेगी।

पायलट के सामने कांटे भरा ताज: दोनों खेमों में संतुलन साधना सबसे बड़ी चुनौती

सचिन पायलट की नियुक्ति को कांग्रेस में एक 'तटस्थ' चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके सामने पंजाब की राह आसान नहीं है:

  • वड़िंग बनाम चन्नी का संतुलन: राजा वड़िंग अब भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हैं और उन्होंने भी हाल ही में पायलट से मुलाकात कर साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं चन्नी खेमा लगातार टिकट वितरण और नेतृत्व परिवर्तन में अपनी भूमिका सुरक्षित करना चाहता है।

  • दिलचस्प कूटनीतिक समीकरण: पार्टी में एक अनूठा संगठनात्मक संयोग भी बना है—पंजाब के नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा इस समय राजस्थान कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी हैं, जबकि राजस्थान के सचिन पायलट को अब पंजाब का प्रभार सौंपा गया है।

  • आगामी बस यात्रा और राहुल गांधी का दौरा: सितंबर के अंत में राहुल गांधी के पंजाब दौरे और राज्यव्यापी कांग्रेस बस यात्रा से पहले पायलट को दोनों गुटों को एक मंच पर लाना होगा ताकि सत्ताधारी 'आप' और विपक्षी दलों के मुकाबले पार्टी एकजुट नजर आए।

संगठन में नई उम्मीद: क्या खत्म होगा पंजाब कांग्रेस का 'कलेश'?

चन्नी और रंधावा की पायलट से इस मुलाकात के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असंतुष्ट खेमा अब खुद को आश्वस्त महसूस कर रहा है कि उनकी बात दिल्ली तक निष्पक्ष रूप से पहुंचेगी। राजस्थान में अशोक गहलोत के साथ अपने पुराने सियासी अनुभवों के चलते सचिन पायलट गुटबाजी की बारीकियों और नुकसान से भली-भांति वाकिफ हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या युवा और ऊर्जावान सचिन पायलट पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ दिग्गजों की महत्वाकांक्षाओं को साधकर पार्टी को फिर से जीत की पटरी पर ला पाते हैं या नहीं।

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