पंजाब में आज से अगले 4 दिन झमाझम बरसेंगे मेघ: मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

पंजाब में आज से अगले 4 दिन झमाझम बरसेंगे मेघ: मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

उत्तर भारत में सक्रिय हुए नए मौसमी तंत्र और मानसूनी हवाओं के प्रभाव से पंजाब के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले कई दिनों से चिपचिपी उमस और तेज धूप की मार झेल रहे राज्य के नागरिकों के लिए राहत भरी लेकिन साथ ही सतर्क करने वाली खबर सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के चंडीगढ़ स्थित मौसम केंद्र ने पंजाब में आज से लेकर आगामी 4 दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश, बादलों की तेज गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली चमकने का विस्तृत अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के साथ-साथ पश्चिमोत्तर भारत में सक्रिय हुए एक नए ट्रफ के कारण पंजाब के वायुमंडल में भारी नमी एकत्र हो गई है, जो अगले 96 घंटों के दौरान व्यापक वर्षा के रूप में बरसेगी।

इस मौसमी बदलाव का प्रभाव राज्य के तीनों प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों—माझा, दोआबा और मालवा के सभी 23 जिलों में साफ तौर पर देखने को मिलेगा। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर जैसे शिवालिक की पहाड़ियों से सटे तलहटी इलाकों में बारिश की तीव्रता सर्वाधिक रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, बठिंडा और फिरोजपुर के मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर तेज मूसलाधार बारिश दर्ज की जाएगी। प्रशासन ने संभावित भारी बारिश, निचले इलाकों में जलभराव और तेज हवाओं से होने वाले नुकसान को देखते हुए संबंधित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और नगर निगमों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।

IMD चंडीगढ़ का येलो और ऑरेंज अलर्ट: किन जिलों में सबसे ज्यादा बरसेगा पानी

मौसम केंद्र चंडीगढ़ द्वारा जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार पंजाब के विभिन्न जिलों को वर्षा की गंभीरता के आधार पर श्रेणियों में बांटा गया है। उत्तरी और पूर्वी पंजाब के जिलों, विशेष रूप से पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली (एसएएस नगर) में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में 64.5 मिलीमीटर से लेकर 115.5 मिलीमीटर तक की मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है।

दूसरी ओर मध्य और दक्षिणी पंजाब के मैदानी जिलों जैसे जालंधर, कपूरथला, अमृतसर, तरनतारन, लुधियाना, पटियाला, बरनाला, मानसा, मोगा, बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, मुक्तसर और संगरूर के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट प्रभावी किया है। इन जिलों में आसमान में घने काले बादलों का डेरा रहेगा और कई दौर की तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बारिश का दौर केवल स्थानीय बादलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राज्य के ऊपर एक सुगठित मौसमी चक्र सक्रिय रहने से अगले 4 दिनों तक धूप निकलने की संभावना बहुत कम रहेगी।

40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं: आंधी और आकाशीय बिजली की चेतावनी

मौसम विभाग ने भारी बारिश के साथ-साथ तेज सतही हवाओं और बिजली गिरने (Thunderstorm with Lightning) को लेकर भी कड़ा अलर्ट जारी किया है। बारिश के शुरुआती चरणों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज धूल भरी आंधी और अंधड़ चलने की आशंका है। विशेष रूप से खुले ग्रामीण क्षेत्रों और हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों को आंधी के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।

मौसम विभाग ने स्थानीय निवासियों और किसानों को सख्त सलाह दी है कि जब आसमान में तेज बादलों की गड़गड़ाहट हो और बिजली चमक रही हो, तो वे खुले खेतों, बड़े पेड़ों, धातु के खंभों या कच्चे ढांचों के नीचे कतई शरण न लें। आकाशीय बिजली के अचानक गिरने से जान-माल के नुकसान का खतरा रहता है। पशुपालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मवेशियों को खुले मैदानों या बिजली के खंभों के पास बांधने के बजाय सुरक्षित पक्के बाड़ों में रखें।

धान और कपास की खेती पर बारिश का प्रभाव: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की किसानों को सलाह

पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और इस समय खेतों में खरीफ की मुख्य फसल धान (चावल) अपने महत्वपूर्ण विकास के चरण में है, जबकि मालवा बेल्ट में कपास (नरमा) की फसल खड़ी है। ऐसे में अगले 4 दिनों की यह भारी बारिश किसानों के लिए दोहरा असर लेकर आ सकती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) लुधियाना के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिन किसानों ने हाल ही में धान की रोपाई की थी या जहां फसल बढ़वार के दौर में है, उनके लिए यह मानसूनी बारिश भूमिगत जल की बचत करेगी और सिंचाई के बिजली खर्च को कम करेगी।

हालांकि, जिन खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है, वहां लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से धान की जड़ों के गलने का खतरा बढ़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अगले 4 दिनों तक फसलों में किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद जैसे यूरिया, डीएपी या किसी कीटनाशक स्प्रे का छिड़काव तुरंत रोक दें, क्योंकि तेज बारिश में दवाइयां बहकर निष्फल हो जाएंगी। कपास उत्पादक क्षेत्रों जैसे बठिंडा, फाजिल्का और मानसा के किसानों को खेतों में जमा होने वाले अतिरिक्त पानी को तुरंत निकालने के लिए नालियों को साफ रखने की हिदायत दी गई है, क्योंकि कपास के पौधों में जलभराव होने से फंगस और पत्तों के झड़ने की बीमारी फैल सकती है।

शहरी इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की आशंका: नगर निगमों को अलर्ट पर रहने के आदेश

पंजाब के बड़े औद्योगिक और घनी आबादी वाले महानगरों में भारी बारिश हमेशा बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी परीक्षा बन जाती है। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और मोहाली जैसे शहरों में आगामी 4 दिनों के दौरान भारी वर्षा से निचले मोहल्लों, अंडरपासों और मुख्य चौराहों पर भारी जलभराव (Waterlogging) होने की प्रबल आशंका है। लुधियाना के घंटाघर चौक, गिल रोड, फिरोजपुर रोड और जालंधर के बस्ती क्षेत्रों व मॉडल टाउन के निचले हिस्सों में जल निकासी बाधित हो सकती है।

इस स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय निकाय विभाग और नगर निगमों के आयुक्तों ने नालों की सफाई और सक्शन मशीनों को तैयार रखने के आदेश दिए हैं। शहरवासियों को सलाह दी गई है कि वे बहुत जरूरी काम होने पर ही घरों से निकलें और जलभराव वाले रास्तों पर गाड़ी चलाने से बचें ताकि वाहनों के खराब होने या खुले मैनहोल में दुर्घटना से बचा जा सके। बिजली विभाग (PSPCL) ने भी अपने कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं ताकि तेज हवाओं से तार टूटने या ट्रांसफार्मर ट्रिप होने पर बिजली आपूर्ति को कम से कम समय में बहाल किया जा सके।

तापमान में 4 से 6 डिग्री की आएगी भारी गिरावट: उमस से मिलेगी राहत, स्वास्थ्य को लेकर सावधानी जरूरी

मौसम विभाग के अनुसार इस चार दिवसीय बारिश के स्पेल से राज्य के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी। पिछले हफ्ते पंजाब के कई शहरों में अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था और उच्च आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) 80 से 90 प्रतिशत तक होने से लोग पसीने और बेचैनी से त्रस्त थे। बारिश के चलते दिन के अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी, जिससे पारा लुढ़ककर 28 से 30 डिग्री के आसपास आ जाएगा।

मौसम के सुहावने होने से लोगों को उमस भरी गर्मी से तो निजात मिलेगी, लेकिन तापमान में अचानक आने वाले इस उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि बारिश के बाद जमा होने वाले रुके हुए पानी में डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का लार्वा तेजी से पनप सकता है। इसलिए लोग अपने घरों के आसपास, छतों पर रखे पुराने टायरों, कूलरों और गमलों में पानी बिल्कुल जमा न होने दें। साथ ही दूषित पानी से होने वाले संक्रमण जैसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस और वायरल फीवर से बचने के लिए उबला हुआ पानी पीने और ताजा खाना खाने की आदत अपनाएं। मौसम विभाग लगातार रडार और सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से स्थिति पर नजर रखे हुए है और हर तीन घंटे में जिलावार तात्कालिक मौसम अपडेट (Nowcast) जारी कर रहा है।

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