मल्टी-नेशन टूर्नामेंट का हिस्सा हो सकते हैं भारत और पाकिस्तान: ट्राई-सीरीज और 4-नेशन टूर्नामेंट की वापसी पर विचार कर सकता है ICC

मल्टी-नेशन टूर्नामेंट का हिस्सा हो सकते हैं भारत और पाकिस्तान: ट्राई-सीरीज और 4-नेशन टूर्नामेंट की वापसी पर विचार कर सकता है ICC

विश्व क्रिकेट के दो सबसे चिर-प्रतिद्वंद्वी—भारत और पाकिस्तान—के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों पर लगा एक दशक से अधिक लंबा विराम टूटने की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है। राजनीतिक तनाव के कारण दोनों देश 2012-13 के बाद से कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल पाए हैं और केवल आईसीसी (ICC) ट्रॉफी या एशिया कप जैसे बहुपक्षीय आयोजनों में ही आमने-सामने आते हैं। हालांकि, वैश्विक क्रिकेट बोर्ड्स की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और फैंस की भारी मांग को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) भविष्य के फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम (FTP) में मल्टी-नेशन टूर्नामेंट्स (त्रिकोणीय या चार देशों की सीरीज) की वापसी की संभावना पर विचार कर सकता है। यदि सदस्य बोर्ड्स इस पर सहमत होते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को नियमित आईसीसी टूर्नामेंट्स के अलावा भी तटस्थ स्थलों (Neutral Venues) पर एक-दूसरे के खिलाफ खेलने का मंच मिल सकता है।

त्रिकोणीय और 4-नेशन सीरीज की वापसी का सुझाव क्यों?

90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर में शारजाह, टोरंटो और ऑस्ट्रेलिया में खेली जाने वाली ट्राई-सीरीज क्रिकेट कैलेंडर की पहचान हुआ करती थीं।

इस व्यवस्था को दोबारा जीवित करने के पीछे मुख्य कारण हैं:

  • द्विपक्षीय सीरीज में दर्शकों की घटती रुचि: टेस्ट क्रिकेट के अलावा आम द्विपक्षीय टी20 और वनडे सीरीज में घटती टीआरपी और खाली स्टेडियमों से कई देशों के क्रिकेट बोर्ड वित्तीय दबाव में हैं।

  • भारत-पाक मैच का व्यावसायिक आकर्षण: भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला एक भी मुकाबला ब्रॉडकास्टर्स के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का विज्ञापन राजस्व पैदा करता है।

  • बोर्ड्स की सहमति का प्रयास: क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) पहले भी मेलबर्न या लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदानों पर भारत और पाकिस्तान की मेजबानी करने या त्रिकोणीय सीरीज खेलने का खुला प्रस्ताव रख चुके हैं।

आईसीसी के नियमों में क्या है पेच?

वर्तमान आईसीसी नियमों के अनुसार, सदस्य देशों को तीन या अधिक टीमों वाली स्वतंत्र 'मल्टी-नेशन' सीरीज आयोजित करने की सीमित अनुमति है, क्योंकि आईसीसी का ध्यान अपने वैश्विक आयोजनों (वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रॉफी, टी20 वर्ल्ड कप) की ब्रांड वैल्यू सुरक्षित रखने पर रहता है:

  • आईसीसी से विशेष छूट की जरूरत: यदि भारत और पाकिस्तान को शामिल कर कोई तीसरा देश ट्राई-सीरीज आयोजित करना चाहता है, तो इसके लिए आईसीसी बोर्ड से विशेष मंजूरी लेनी होगी।

  • हाइब्रिड और न्यूट्रल वेन्यू का फॉर्मूला: चूंकि भारतीय टीम का पाकिस्तान जाना और पाकिस्तान टीम का भारत में नियमित रूप से आना सुरक्षा व कूटनीतिक कारणों से संभव नहीं दिखता, इसलिए इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे तटस्थ मैदानों को ऐसे टूर्नामेंट्स के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।

बीसीसीआई और भारत सरकार का रुख रहेगा निर्णायक

प्रस्ताव और विचारों के बावजूद इस योजना के धरातल पर उतरने का रास्ता पूरी तरह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और भारत सरकार की नीति पर निर्भर करता है:

  • सरकारी मंजूरी अनिवार्य: बीसीसीआई का हमेशा से स्पष्ट रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी स्तर पर खेलने का फैसला बोर्ड का नहीं, बल्कि भारत सरकार के विदेश और गृह मंत्रालय का होता है।

  • मल्टी-नेशन की परिभाषा: भारत सरकार की नीति अब तक यह रही है कि आईसीसी और एसीसी (एशियाई क्रिकेट परिषद) के अनिवार्य बहुपक्षीय टूर्नामेंट्स में भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ खेल सकती है, लेकिन किसी अनौपचारिक या प्रायोजित ट्राई-सीरीज को 'द्विपक्षीय सीरीज के पिछले दरवाजे' के रूप में देखा जा सकता है।

क्या बन पाएगी सहमति?

आईसीसी की आगामी बैठकों में यदि अन्य क्रिकेट बोर्ड्स इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से एजेंडे में लाते हैं, तो इस पर विस्तृत बहस होना तय है। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि यदि आईसीसी ऐसे टूर्नामेंट्स को अपने सीधे नियमन में आयोजित करता है और इसका एक हिस्सा वैश्विक क्रिकेट विकास फंड में जाता है, तो वित्तीय और खेल के लिहाज से यह विचार क्रिकेट जगत के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है।

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