'मेरा काम ट्रॉफी जीतना है, सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स बटोरना नहीं'; टेस्ट में आलोचनाओं और रैंकिंग के सवाल पर बेबाक बोले टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर अपने आक्रामक तेवर, स्पष्टवादिता और बिना लाग-लपेट के अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। पिछले कुछ समय से टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के प्रदर्शन में आए उतार-चढ़ाव और घरेलू मैदानों पर मिली हार के बाद सोशल मीडिया और खेल गलियारों में गंभीर की कोचिंग शैली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के ऐतिहासिक आर. प्रेमदासा स्टेडियम में होने वाले दूसरे टेस्ट मुकाबले से ठीक पहले गौतम गंभीर ने एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने आलोचकों और ट्रोलर्स को ऐसा करारा जवाब दिया है, जिसकी गूंज पूरे क्रिकेट जगत में सुनाई दे रही है। गंभीर ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह बाहरी शोर या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए नहीं बैठे हैं, बल्कि उनका एकमात्र लक्ष्य और जिम्मेदारी भारतीय टीम की कैबिनेट में आईसीसी ट्रॉफियां लाना है।
'मेरा काम ट्रॉफियां जीतना है, व्यूज और लाइक्स बटोरना नहीं': आलोचकों पर गंभीर का सीधा वार
कोलंबो टेस्ट की पूर्व संध्या पर जब पत्रकारों ने उनसे टेस्ट क्रिकेट में उनके अब तक के कोचिंग रिकॉर्ड और बाहरी आलोचनाओं को लेकर सवाल पूछा, तो गंभीर ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना स्पष्ट विजन सामने रखा। गंभीर ने कहा, "मेरा काम ट्रॉफियां जीतना है, सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स पाना नहीं। मैं सिर्फ इसी एक बात पर विश्वास करता हूं और इसी की परवाह करता हूं। यही मुझमें और बाकी लोगों में सबसे बड़ा फर्क है।"
गंभीर ने साफ कर दिया कि ड्रेसिंग रूम के बाहर कौन क्या राय बना रहा है या सोशल मीडिया पर क्या ट्रेंड चल रहा है, इससे उनके फैसलों या टीम की रणनीति पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट के हेड कोच का पद बेहद जिम्मेदारी भरा है और उनकी जवाबदेही केवल टीम के प्रदर्शन, खिलाड़ियों के विकास और मैदान पर मिलने वाले ठोस परिणामों के प्रति है, न कि किसी परसेप्शन मैनेजमेंट के प्रति।
रैंकिंग कोई मायने नहीं रखती, टीम संघर्ष नहीं बल्कि बदलाव के दौर से गुजर रही है
आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में टीम के स्थान और हालिया उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए गौतम गंभीर ने कहा कि रैंकिंग को जरूरत से ज्यादा तवज्जो देना सही नहीं है। गंभीर ने जोर देकर कहा कि टीम इंडिया टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष नहीं कर रही है, बल्कि वह एक बड़े बदलाव (ट्रांजिशन फेज) से गुजर रही है।
रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन जैसे महान खिलाड़ियों के टेस्ट क्रिकेट से हटने के बाद एक पूरी नई पीढ़ी को टेस्ट फॉर्मेट के दबाव में ढालने का काम चल रहा है। गंभीर ने दलील दी कि इंग्लैंड दौरे के बाद से भारत ने लगातार प्रतिस्पर्धी और अच्छा टेस्ट क्रिकेट खेला है। उन्होंने कहा कि जब किसी टीम का कोर ग्रुप बदलता है, तो कुछ झटके (Blips) और उतार-चढ़ाव आना पूरी तरह से स्वाभाविक होता है, लेकिन टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
'1-2 मैचों के आधार पर नहीं होंगे फैसले': युवा खिलाड़ियों को मिलेगा लंबा मौका
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गंभीर ने युवा खिलाड़ियों के चयन और टीम मैनेजमेंट के भरोसे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने गॉल टेस्ट में शानदार 167 रनों की पारी खेलने वाले देवदत्त पडिक्कल और अपने करियर के दूसरे ही टेस्ट में 10 विकेट झटकने वाले बाएं हाथ के युवा स्पिनर मानव सुथार के प्रदर्शन पर बेहद संतोष व्यक्त किया।
गंभीर ने कहा, "यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि युवाओं ने मौके का तुरंत फायदा उठाया, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। हमें अपने खिलाड़ियों की क्षमता पर विश्वास रखना होगा और उन्हें लंबा मौका (Longer Rope) देना होगा। किसी भी खिलाड़ी के टैलेंट का फैसला केवल एक या दो खराब मैचों के आधार पर नहीं किया जा सकता।" गंभीर का यह बयान यह साफ करता है कि वह टीम में सुरक्षा का ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं जहां युवा खिलाड़ी बिना अपनी जगह खोने के डर से बेखौफ होकर स्वाभाविक क्रिकेट खेल सकें।
20 विकेट लेने वाला बॉलिंग कॉम्बिनेशन और कुलदीप यादव पर रणनीति
कोलंबो टेस्ट की प्लेइंग इलेवन और गेंदबाजी संयोजन को लेकर पूछे गए सवाल पर हेड कोच ने साफ किया कि टीम की प्राथमिकता हमेशा विपक्षी टीम के 20 विकेट चटकाने की क्षमता पर आधारित होती है।
पहले टेस्ट में चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव से कम ओवर करवाए जाने की चर्चाओं पर गंभीर ने कहा, "कुलदीप यादव निसंदेह एक बेहतरीन और मैच-विनर गेंदबाज हैं। लेकिन मैच के दौरान परिस्थितियां, पिच का मिजाज और विरोधी बल्लेबाजों की तकनीक को देखते हुए ऑन-फील्ड कप्तान को जो सही लगता है, वह फैसला लिया जाता है। हम दूसरे टेस्ट में भी वही सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग अटैक मैदान पर उतारेंगे जो हमें पिच के अनुसार 20 विकेट दिलाने की सबसे ज्यादा गारंटी देता हो।"
'3 टेस्ट मैचों की सीरीज होनी चाहिए आदर्श': 2 टेस्ट की सीरीज पर गंभीर का तर्क
गौतम गंभीर ने टेस्ट क्रिकेट के फॉर्मेट और द्विपक्षीय सीरीज की लंबाई पर भी एक बेहद दिलचस्प विचार साझा किया। भारत और श्रीलंका के बीच मौजूदा सीरीज सिर्फ 2 टेस्ट मैचों की है, जिसमें भारत पहला मुकाबला 165 रनों से जीतकर 1-0 से आगे चल रहा है।
गंभीर ने कहा कि उनके दृष्टिकोण से 3 टेस्ट मैचों की सीरीज सबसे आदर्श होती है। उन्होंने तर्क दिया, "अगर कोई टीम 2 टेस्ट की सीरीज में पहला मुकाबला हार जाती है, तो उसके पास सीरीज जीतने का कोई रास्ता नहीं बचता, वह केवल सीरीज ड्रॉ कराने की कोशिश कर सकती है। जबकि 3 मैचों की सीरीज में पहले मैच में पिछड़ने वाली टीम के पास भी शानदार वापसी कर पूरी सीरीज का रुख पलटने का बेहतरीन मौका रहता है। इसके अलावा कम समय में खिलाड़ियों की रिकवरी कोई बड़ी समस्या नहीं है, क्योंकि हम खिलाड़ियों के वर्कलोड को अच्छे से मैनेज करते हैं और ऑप्शनल प्रैक्टिस व रोटेशन का ध्यान रखते हैं।"
गॉल की पिच से संतुष्ट, कोलंबो में 2-0 से क्लीन स्वीप का लक्ष्य
श्रीलंका दौरे पर पिचों के व्यवहार को लेकर गंभीर ने कहा कि गॉल टेस्ट की पिच टेस्ट क्रिकेट के लिए एक बेहतरीन पिच थी, जहां गेंद और बल्ले के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। उन्होंने उम्मीद जताई कि कोलंबो की पिच भी खेल के लिए अनुकूल होगी।
शुभमन गिल की युवा कप्तानी में भारतीय टीम ने गॉल में 165 रनों से विशाल जीत दर्ज कर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2025-27) के फाइनल की अपनी दावेदारी को मजबूती दी है। अब भारतीय टीम की नजरें कोलंबो टेस्ट को भी अपने नाम कर सीरीज में 2-0 से सूपड़ा साफ करने पर टिकी हैं। गौतम गंभीर के इस बेबाक और आत्मविश्वास से भरे रवैये ने टीम के ड्रेसिंग रूम को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जब तक टीम अपने लक्ष्य पर अडिग है, तब तक बाहरी आलोचनाओं का कोई वजूद नहीं है।