गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा 74.4 किमी लंबा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: 3 साल में बनकर होगा तैयार

गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा 74.4 किमी लंबा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: 3 साल में बनकर होगा तैयार

उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में योगी सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन को अभूतपूर्व गति देने के लिए प्रस्तावित 74.4 किलोमीटर लंबे जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए राज्य के दो सबसे बड़े लाइफलाइन एक्सप्रेसवे—गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे—को आपस में सीधे जोड़ दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के संयुक्त तत्वावधान में आगे बढ़ रही इस परियोजना के तहत यीडा क्षेत्र के पैकेज-1 का निर्माण कार्य देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग व निर्माण कंपनी 'एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (Afcons Infrastructure Limited) को सौंपा गया है। यूपीडा द्वारा जारी की गई निविदा प्रक्रिया में न्यूनतम वित्तीय बोली लगाने के बाद कंपनी को करीब 2,086 करोड़ रुपये का अनुबंध प्रदान किया गया है। इस फैसले के साथ ही परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है और निर्माण एजेंसियां भारी मशीनरी के साथ कार्यस्थल पर जुटने की तैयारी कर रही हैं।

3 साल में पूरा होगा निर्माण, 6 लेन का ग्रीनफील्ड कॉरिडोर भविष्य में बनेगा 8 लेन

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण अत्याधुनिक मानकों पर आधारित ग्रीनफील्ड और पूर्णतः एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में किया जाएगा। शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का तैयार किया जाएगा, लेकिन इसके राइट ऑफ वे (ROW) और संरचनात्मक डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए भविष्य में इसे बेहद सुगमता से 8 लेन तक चौड़ा किया जा सके। परियोजना की निर्धारित समय-सीमा के अनुसार, विकासकर्ता कंपनियों को काम शुरू होने की तारीख से ठीक तीन वर्ष (36 महीने) के भीतर इसका निर्माण पूरा करना अनिवार्य होगा। निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद अगले पांच वर्षों तक इसके रखरखाव और सुचारू संचालन की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी के पास ही रहेगी। एक्सेस-कंट्रोल्ड व्यवस्था लागू होने के कारण इस एक्सप्रेसवे पर केवल निर्धारित इंटरचेंज और टोल प्लाजा के जरिए ही वाहनों को प्रवेश और निकास की अनुमति होगी। इससे न केवल लंबी दूरी का सफर करने वाले वाहनों को 120 किमी प्रति घंटे की सुरक्षित रफ्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय यातायात के कारण लगने वाले जाम और हादसों की आशंका भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

बुलंदशहर के स्याना से यीडा की फिल्म सिटी तक ऐसा रहेगा रूट, 56 गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

इस 74.4 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का भौगोलिक संरेखण (अलाइनमेंट) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रणनीतिक और औद्योगिक केंद्रों को ध्यान में रखकर तय किया गया है। यह लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर जिले की स्याना तहसील के पास से शुरू होगा, जहां इसका सीधा जंक्शन निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। वहां से आगे बढ़ते हुए यह कॉरिडोर शिकारपुर और खुर्जा तहसीलों से होकर गुजरेगा और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) जिले की जेवर तहसील में प्रवेश करेगा। इसका अंतिम छोर यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-21 में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के समीप यमुना एक्सप्रेसवे पर आकर मिलेगा। इस पूरे रूट के दायरे में बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर के कुल 56 ग्रामीण इलाके आ रहे हैं। परियोजना को दो अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। पैकेज-1 के तहत गौतम बुद्ध नगर के भैंपुर ब्राह्मण से बुलंदशहर के बिचौला तक 24.5 किमी लंबे हिस्से का निर्माण एफकॉन्स करेगी, जबकि पैकेज-2 में बिचौला से स्याना के बहापुर तक शेष 50 किमी हिस्से का निर्माण दूसरी चयनित विकासकर्ता एजेंसी द्वारा किया जाएगा। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ 130 मीटर तक सर्विस लेन और ग्रीन बेल्ट का प्रावधान भी रखा गया है।

92 फीसदी जमीन का अधिग्रहण पूरा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक आवागमन होगा सुपरफास्ट

एक्सप्रेसवे के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती माने जाने वाले भूमि अधिग्रहण के मोर्चे पर यमुना विकास प्राधिकरण ने उल्लेखनीय सफलता हासिल कर ली है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और जिला प्रशासन द्वारा साझा किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, यीडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली लगभग 92 से 95 प्रतिशत निजी व सरकारी जमीन की खरीद का कार्य पूरा किया जा चुका है। यीडा को अपने हिस्से में कुल 740 एकड़ भूमि अधिग्रहित करनी थी, जिसमें से महज 33 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री बाकी रह गई है। इसके लिए भी किसानों के साथ सहमति के आधार पर वार्ता अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। वहीं बुलंदशहर जिले के दायरे में आने वाली लगभग 70 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और बाकी हिस्सों के लिए प्रशासन सीधे किसानों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि ट्रांसफर कर रहा है। इस एक्सप्रेसवे का सबसे क्रांतिकारी लाभ आगामी 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' (जेवर) को मिलने वाला है। अब तक पूर्वांचल, अवध और मध्य उत्तर प्रदेश से जेवर एयरपोर्ट आने वाले यात्रियों को दिल्ली या आगरा के लंबे रास्तों से गुजरना पड़ता था, लेकिन इस लिंक मार्ग के चालू होते ही मेरठ, हापुड़, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ और प्रयागराज से आने वाले यात्री गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते सीधे जेवर एयरपोर्ट के टर्मिनल तक पलक झपकते ही पहुंच सकेंगे।

पश्चिमी यूपी और एनसीआर के औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार, सीधे जुड़ेंगे 4 एक्सप्रेसवे

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चारों कोनों को आपस में बांधने वाला एक आर्थिक महागलियारा साबित होगा। इस परियोजना के शुरू होने के बाद प्रदेश के चार सबसे महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे—गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे—एक एकीकृत नेटवर्क में तब्दील हो जाएंगे। इससे यमुना सिटी के औद्योगिक सेक्टर्स (सेक्टर 28, 29, 32 और 33), मेडिकल डिवाइस पार्क, टॉय पार्क, डेटा सेंटर हब और इलेक्ट्रॉनिक सिटी को सीधे कच्चा माल लाने और तैयार उत्पादों को विभिन्न बंदरगाहों व हवाई अड्डों तक भेजने में भारी सहूलियत होगी। बुलंदशहर के प्रसिद्ध पॉटरी उद्योग (खुर्जा) और कृषि उत्पादों को दिल्ली, नोएडा और वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी गिरावट आएगी। उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए 17,542 करोड़ रुपये के एक्सप्रेसवे पैकेज का यह प्रमुख हिस्सा अगले 3 वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है।