दिवाली पर ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की भारी किल्लत? RBI और PIB ने वायरल सर्कुलर की खोली पोल
दिवाली और धनतेरस के त्योहार से ठीक पहले देश भर के खुदरा बाजारों, व्यापारियों और आम लोगों के बीच एक सनसनीखेज खबर तेजी से फैलने लगी। व्हाट्सएप ग्रुप्स, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्र की तस्वीर जमकर साझा की जा रही है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक एडवाइजरी बताया गया। इस वायरल संदेश में दावा किया गया कि इस वर्ष दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान ₹10, ₹20 और ₹50 मूल्यवर्ग के छोटे और नए नोटों की भारी किल्लत देखने को मिल सकती है। चूंकि भारतीय संस्कृति में दिवाली पूजन, शगुन, बख्शीश और छोटे खुदरा लेन-देन के लिए 10, 20 और 50 रुपये के नए नोटों की गड्डियों की भारी मांग रहती है, इसलिए इस खबर ने आम जनता और छोटे कारोबारियों को गहरी चिंता में डाल दिया। कई लोग घबराहट में बैंकों की शाखाओं और एटीएम की ओर नकदी निकालने के लिए रुख करने लगे। लेकिन अब इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी और बैंकिंग नियामक की ओर से सच्चाई सामने आ गई है।
PIB और RBI का खंडन: वायरल सर्कुलर निकला पूरी तरह फर्जी और भ्रामक
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट और रिजर्व बैंक से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने इस वायरल संदेश की गहन पड़ताल के बाद स्पष्ट कर दिया है कि यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत, भ्रामक और फर्जी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने सार्वजनिक बयान जारी करते हुए बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाली या किसी भी त्योहारी अवधि के दौरान छोटे नोटों की सप्लाई कम होने या उनकी किल्लत को लेकर ऐसा कोई भी सर्कुलर, प्रेस रिलीज या दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है। सोशल मीडिया पर जिस दस्तावेज को आरबीआई का आधिकारिक आदेश बताकर साझा किया जा रहा है, वह शरारती तत्वों द्वारा तैयार किया गया एक जाली दस्तावेज है, जिसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है।
वायरल फर्जी पत्र में क्या-क्या किए गए थे मनगढ़ंत दावे?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस फर्जी नोटिस की जांच में पाया गया कि जालसाजों ने इसे पूरी तरह प्रामाणिक रूप देने की चालाकी की थी।
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फर्जी तारीख और हेडिंग: इस कथित पत्र पर 27 अक्टूबर 2026 की तारीख अंकित थी और इसका शीर्षक 'Important Advisory on Availability of Small Denomination Notes during Diwali' रखा गया था।
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कैशलेस इकोनॉमी का झूठा तर्क: इसमें बेतुका तर्क दिया गया था कि केंद्र सरकार देश को 'कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था' (Less-Cash Economy) की तरफ तेजी से ले जाना चाहती है, जिसके चलते छोटे नोटों की छपाई को चरणबद्ध तरीके से घटाया जा रहा है।
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यूपीआई और कार्ड के इस्तेमाल का दबाव: पत्र में आम नागरिकों को सलाह दी गई थी कि वे त्योहार के दौरान नकदी की संभावित किल्लत से बचने के लिए पहले से ही ज्यादा कैश का इंतजाम कर लें अथवा यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और डेबिट-क्रेडिट कार्ड का अधिकाधिक प्रयोग करें।
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आरबीआई के फर्जी लोगो और हस्ताक्षर: लोगों को भ्रमित करने के लिए पत्र पर रिजर्व बैंक का आधिकारिक लोगो, एक बनावटी संदर्भ संख्या (Press Release Number) और आरबीआई गवर्नर के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर तक चस्पा किए गए थे।
क्या बैंकों और करेंसी चेस्ट में सच में है छोटे नोटों की कोई कमी?
रिजर्व बैंक की कार्यप्रणाली पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों और बैंकिंग अधिकारियों ने साफ किया है कि देश भर के करेंसी चेस्ट और वाणिज्यिक बैंकों के पास सभी मूल्यवर्ग के नोटों का पर्याप्त और सुचारू भंडार उपलब्ध है। त्योहारों के समय नकदी की मांग में मौसमी उछाल (Seasonal Surge) आना एक सामान्य और स्वाभाविक वित्तीय प्रक्रिया है। इस त्योहारी मांग को पहले से भांपते हुए केंद्रीय बैंक हर वर्ष की भांति अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों और बैंक शाखाओं में ₹10, ₹20, ₹50, ₹100 और ₹500 के नोटों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करता है। हालांकि, कुछ स्थानीय सहकारी बैंकों या छोटे कस्बों की चुनिंदा शाखाओं में नए कुरकुरे नोटों (Fresh Currency Bundles) की मांग आपूर्ति से अधिक होने के कारण तात्कालिक समय में कतारें या सीमित वितरण देखा जा सकता है, लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि देश में नोटों की छपाई रोक दी गई है या करेंसी का कोई संकट पैदा हो गया है।
ऐसे फर्जी वित्तीय सर्कुलर्स से कैसे बचें नागरिक?
डिजिटल युग में वित्तीय व्यवस्था और बैंकिंग से जुड़े संवेदनशील विषयों पर फर्जी खबरों का प्रसार अत्यंत तेजी से होता है। ऐसे में नागरिकों और व्यापारियों को कुछ मूलभूत सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है:
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आधिकारिक वेबसाइट पर ही करें भरोसा: किसी भी बैंक या मुद्रा नीति से संबंधित घोषणा की पुष्टि केवल भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट (rbi.org.in) या उसके सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल (X: @RBI) पर जाकर ही करें।
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बिना पुष्टि के संदेश फॉरवर्ड न करें: व्हाट्सएप पर आने वाले ऐसे किसी भी मैसेज को आगे फॉरवर्ड करने से बचें जो वित्तीय अफरा-तफरी या पैनिक पैदा करने का प्रयास करते हों।
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पीआईबी फैक्ट चेक का सहारा लें: यदि किसी सरकारी आदेश या बैंकिंग नीति को लेकर मन में कोई संदेह उत्पन्न हो, तो पीआईबी फैक्ट चेक के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर (+91 8799711259) पर भेजकर उसकी प्रामाणिकता की जांच करवा सकते हैं।
दिवाली के महापर्व पर देश में ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की किसी भी प्रकार की आधिकारिक कमी नहीं है; नागरिक किसी भी अफवाह पर ध्यान दिए बिना अपनी त्योहारी खरीदारी सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं।