आउटसोर्स कर्मियों को सीएम योगी का बड़ा तोहफा: अब हर महीने की 5 तारीख तक खाते में आएगी सैलरी, EPF-ESI के साथ मिलेगी सवेतन मैटरनिटी लीव
उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों, स्थानीय निकायों और विभिन्न प्राधिकरणों में अपनी सेवाएं दे रहे लाखों आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के लिए व्यवस्था में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम' (UPCOS) का विधिवत शुभारंभ करते हुए इसके पोर्टल, वेबसाइट और आधिकारिक लोगो का अनावरण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को सबसे बड़ा तोहफा देते हुए घोषणा की कि अब किसी भी कर्मचारी के वेतन के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रत्येक माह की 1 तारीख से 5 तारीख के भीतर कर्मचारियों का पूरा मानदेय बिना किसी बिचौलिये या दलाली के सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा करा दिया जाएगा।
इस नई व्यवस्था का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, बरेली और गाजियाबाद सहित सभी 75 जिलों में तैनात लगभग साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों और उन पर आश्रित करीब 20 लाख पारिवारिक सदस्यों को मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब किसी मेहनतकश को समय पर उसकी मेहनत का पारिश्रमिक मिलता है, तो वह केवल एक व्यक्ति को मिलने वाला धन नहीं होता, बल्कि उससे परिवार के बुजुर्गों की दवा, बच्चों की स्कूल की फीस और घर का चूल्हा सुनिश्चित होता है। पिछली सरकारों के दौर में आउटसोर्सिंग के नाम पर जिस तरह से कर्मचारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जाता था, उस अंधेरगर्दी को पूरी तरह समाप्त कर अब कर्मियों को सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन जीने का कानूनी अधिकार सौंप दिया गया है।
हर महीने 1 से 5 तारीख तक खाते में आएगा वेतन: एजेंसी की कमीशनखोरी पर लगा ताला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकारों की लचर व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पहले आउटसोर्सिंग एजेंसियों और विभागों के अधिकारियों के बीच ऐसा गठजोड़ था जिससे कर्मचारियों का कई-कई महीनों का वेतन अटका रहता था। कई बार त्यौहारों के समय भी कर्मचारियों की जेब खाली रहती थी और निजी कंपनियां कर्मचारियों के वेतन से मनमाना कमीशन काटकर उन्हें आधा-अधूरा भुगतान करती थीं।
सरकार द्वारा स्थापित किए गए नए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) के जरिए इस पूरी प्रणाली का डिजिटलीकरण कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत एजेंसी को दिया जाने वाला सेवा शुल्क (सर्विस चार्ज) राज्य सरकार अपने बजट से सीधे कंपनी को अलग से भुगतान करेगी। एजेंसी को कर्मचारी के तय मानदेय में से एक भी पैसा काटने का अधिकार नहीं होगा। महीने की उपस्थिति का रिकॉर्ड जैसे ही पोर्टल पर प्रमाणित होगा, कोषागार से पैसा सीधे कर्मचारी के खाते में 5 तारीख से पहले पहुंच जाएगा। यदि किसी एजेंसी ने वेतन वितरण में अड़ंगा लगाया, तो उस एजेंसी को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ईपीएफ और ईएसआई की रियल टाइम मॉनिटरिंग: कटौतियों में नहीं हो सकेगा कोई फर्जीवाड़ा
आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती थी कि उनके वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) का पैसा तो काट लिया जाता था, लेकिन कंपनियां उसे भविष्य निधि संगठन के खातों में जमा ही नहीं कराती थीं। जब किसी कर्मचारी को मेडिकल इमरजेंसी होती थी या नौकरी छोड़ने पर पीएफ निकालना होता था, तो उसे पता चलता था कि उसके खाते में कोई फंड ही जमा नहीं हुआ है।
सीएम योगी ने इस मनमानी को जड़ से खत्म करने का पुख्ता तंत्र लागू कर दिया है। अब UPCOS पोर्टल पर ईपीएफ और ईएसआईसी अंशदान की रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। कर्मचारी अपने मोबाइल पर लॉगिन करके यह देख सकेगा कि विभाग द्वारा उसका कितना अंशदान जमा किया गया और उसका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) किस स्थिति में है। ईपीएफ में 13 प्रतिशत और ईएसआई में 3.25 प्रतिशत का अनिवार्य योगदान सीधे डिजिटल चैनल से ट्रांसफर होगा। इससे कर्मचारियों के बुढ़ापे की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी शत-प्रतिशत पारदर्शी तरीके से धरातल पर उतरेगी।
महिला कर्मचारियों को सवेतन मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का कानूनी अधिकार
महिला सशक्तिकरण और नारी गरिमा को लेकर योगी सरकार ने इस नीति में एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय फैसला शामिल किया है। अब तक निजी ठेकेदारों के अधीन काम करने वाली महिला आउटसोर्स कर्मचारियों को गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के समय बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिया जाता था या उनके अवकाश की अवधि का वेतन पूरी तरह काट लिया जाता था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी विभागों में कार्यरत महिला आउटसोर्स कर्मियों को अब सरकारी नियमित कर्मचारियों की भांति अनिवार्य सवेतन मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) प्रदान किया जाएगा। मातृत्व अवकाश के दौरान किसी भी महिला कर्मी की सेवाएं समाप्त नहीं की जा सकेंगी और उनका पूरा वेतन नियमित रूप से उनके खाते में भेजा जाएगा। यह कदम सचिवालय, कलेक्ट्रेट, विकास भवनों, अस्पतालों और नगर निगमों में कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, नर्स, वार्ड सहायिका और सफाईकर्मी के रूप में काम कर रही हजारों बहनों के लिए बहुत बड़ी सामाजिक व पारिवारिक राहत साबित होगा।
ईएसआई अस्पतालों में मुफ्त इलाज और न मिलने पर 5 लाख का आयुष्मान कवर
स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए दोहरा सुरक्षा कवच तैयार किया है। जिन कर्मचारियों का ईएसआई कट रहा है, उन्हें ईएसआई के औषधालयों और विशेष अस्पतालों में मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके साथ ही सीएम योगी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि यदि किसी जिले या क्षेत्र में ईएसआई अस्पताल में उस बीमारी का समुचित इलाज, आईसीयू, सर्जरी या विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे, तो उस कर्मचारी और उसके परिवार को लाचार नहीं छोड़ा जाएगा। सरकार उस कर्मचारी के स्वास्थ्य कार्ड को सीधे 'आयुष्मान भारत योजना' के राष्ट्रीय नेटवर्क से लिंक करेगी, जिसके तहत निजी या बड़े सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज पूरी तरह मुफ्त मिलेगा। इससे गरीब कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के समय अपनी जमीन या गहने बेचने की नौबत नहीं आएगी।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एमओयू: 50 लाख का बीमा और 10 लाख तक का एजुकेशन लोन
समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच एक विशेष समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के तहत प्रदेश के सभी पंजीकृत आउटसोर्स कर्मियों के सैलरी अकाउंट एसबीआई में शून्य बैलेंस पर खोले जाएंगे।
इस बैंक खाते के साथ कर्मचारियों को बिना किसी व्यक्तिगत प्रीमियम के निम्नलिखित विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे:
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दुर्घटना बीमा कवर: ड्यूटी के दौरान या सामान्य जीवन में किसी दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को 20 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक की एकमुश्त वित्तीय सहायता राशि बीमा क्लेम के तहत दी जाएगी।
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अग्निकांड आपदा सहायता: घर या कार्यस्थल पर किसी भीषण अग्निकांड की त्रासदी होने पर 10 लाख रुपये तक की तत्काल आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है।
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बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए आसान ऋण: कर्मचारियों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एसबीआई रियायती ब्याज दरों पर शिक्षा ऋण देगा, जिसमें बेटे की उच्च शिक्षा हेतु 8 लाख रुपये और बेटी की पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन सुगमता से स्वीकृत किया जाएगा।
'पिक एंड चूज' का खात्मा: नौकरी से निकालने से पहले सरकार से लेनी होगी जांच अनुमति
कर्मचारियों के सिर पर हमेशा लटकने वाली नौकरी जाने की तलवार को मुख्यमंत्री ने हमेशा के लिए हटा दिया है। अब कोई भी ठेकेदार या निजी एजेंसी किसी कर्मचारी को अपनी निजी रंजिश, रिश्वत न देने या किसी तुच्छ कारण से सीधे सेवामुक्त नहीं कर सकेगी।
नए नियमों के अनुसार यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्य में लापरवाही या अनुशासनहीनता की शिकायत होगी, तो एजेंसी को पहले उसका पूरा विवरण साक्ष्यों के साथ राज्य सरकार और UPCOS प्रबंधन को भेजना होगा। सरकार की स्वतंत्र जांच समिति उस मामले की पड़ताल करेगी। यदि कर्मचारी निर्दोष पाया जाता है, तो कंपनी उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठा पाएगी और कर्मचारी का उत्पीड़न करने वाली एजेंसी पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा पोर्टल पर ही कर्मचारियों के लिए डिजिटल ग्रीवेंस रिड्रेसल (शिकायत निवारण) सेल बनाया गया है, जहां वे अपनी उपस्थिति, मानदेय या किसी अधिकारी की प्रताड़ना की शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे और तय समय-सीमा के भीतर उसका निस्तारण किया जाएगा।