UP School Holiday: यूपी के इस जिले में भारी बारिश और वज्रपात के खतरे के बीच 12वीं तक के सभी स्कूल बंद, डीएम ने जारी किया सख्त आदेश; नियम तोड़ने पर होगी सीधी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के कई संभागों में सक्रिय मानसूनी तंत्र और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सड़कों पर घुटनों तक भरे पानी, उफनते नालों, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की लगातार आ रही चेतावनी के बीच जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
जिलाधिकारी (District Magistrate) ने आपदा प्रबंधन अधिनियम और छात्र सुरक्षा मानकों के अंतर्गत जिले के समस्त शिक्षण संस्थानों में नर्सरी, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर (कक्षा 1 से 12वीं) तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अवकाश घोषित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। प्रशासन का यह निर्णय लगातार बिगड़ते मौसम और स्कूली बच्चों को आवागमन में होने वाली जानलेवा असुविधाओं के मद्देनजर लिया गया है।
मौसम विभाग का भारी बारिश और वज्रपात का गंभीर अलर्ट बना मुख्य कारण
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के राज्य मौसम केंद्र द्वारा जारी तात्कालिक चेतावनी (Nowcast Warning) में जनपद और उसके सीमावर्ती इलाकों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ऑरेंज/रेड अलर्ट जारी किया गया था। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि वायुमंडलीय दबाव और घने कपासी-वर्षी बादलों (Cumulonimbus Clouds) के टकराव के कारण अगले 24 से 48 घंटों में तेज गर्जना के साथ तीव्र आकाशीय बिजली (Lightning Strikes) गिर सकती है।
इसके साथ ही पिछले चौबीस घंटों से जारी अविरल वर्षा के कारण शहरी क्षेत्रों की प्रमुख सड़कों, चौराहों और ग्रामीण अंचलों के संपर्क मार्गों पर भीषण जलभराव हो गया है। कई स्थानों पर नालों के उफान पर आने से पुलियों के ऊपर से पानी बह रहा है। ऐसे खतरनाक हालातों में छोटे-छोटे बच्चों, छात्र-छात्राओं और स्कूल वाहनों के सुरक्षित आवागमन में गंभीर जोखिम को भांपते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया।
किन-किन विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा डीएम का आदेश?
जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह आदेश जिले की भौगोलिक सीमा के भीतर संचालित होने वाले प्रत्येक शिक्षण संस्थान पर समान रूप से प्रभावी होगा। आदेश के दायरे में निम्नलिखित सभी बोर्ड और श्रेणियां शामिल हैं:
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उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) से संबद्ध समस्त अशासकीय सहायता प्राप्त एवं राजकीय इंटर कॉलेज।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (ICSE/ISC) से मान्यता प्राप्त सभी निजी/कॉन्वेंट स्कूल।
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राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी मदरसे और संस्कृत शिक्षा परिषद के अधीन संचालित संस्कृत विद्यालय।
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जिले में संचालित सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) और समाज कल्याण विभाग के आवासीय विद्यालय।
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कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों को कोचिंग प्रदान करने वाले सभी गैर-आवासीय निजी कोचिंग संस्थान।
निजी स्कूल संचालकों को सख्त चेतावनी: उल्लंघन करने पर दर्ज होगी प्राथमिकी
जिलाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अवकाश के इस आदेश का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रायः यह देखा गया है कि मौसम संबंधी प्रशासनिक अवकाश के बावजूद कुछ निजी एवं मिशनरी कॉन्वेंट स्कूल आंतरिक परीक्षाओं, प्रैक्टिकल या असाइनमेंट के नाम पर बच्चों को विद्यालय बुला लेते हैं।
इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को फील्ड में सचल दल (Flying Squads) तैनात करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल संचालक आदेश की अवहेलना करते हुए कक्षाओं का संचालन करता पाया गया, तो महामारी/आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की सुसंगत धाराओं के तहत संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य के विरुद्ध दंडात्मक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी और संबंधित विद्यालय की मान्यता रद्द करने की संस्तुति शासन को भेज दी जाएगी।
शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए क्या हैं प्रशासनिक दिशा-निर्देश?
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह अवकाश केवल कक्षा 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक कार्य के लिए है। विद्यालय के प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और शिक्षणेत्तर (Non-Teaching) कर्मचारी पूर्व निर्धारित समय के अनुसार अपने-अपने विद्यालयों में उपस्थित रहेंगे।
इस दौरान शिक्षक विभागीय कार्यों, छात्रवृत्ति डाटा सत्यापन, यू-डायस (UDISE+) पोर्टल पर छात्र विवरण अपडेट करने, डीबीटी (DBT) से जुड़े लंबित कार्यों और मध्याह्न भोजन (MDM) के अभिलेखों के रख-रखाव का कार्य पूरा करेंगे। हालांकि, निजी स्कूलों को यह छूट दी गई है कि यदि वे चाहें तो अपने शिक्षकों को वर्क-फ्रॉम-होम या ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पाठ्यक्रम आगे बढ़ाने का विकल्प दे सकते हैं, बशर्ते बच्चों को भौतिक रूप से स्कूल परिसर में न बुलाया जाए।
जर्जर स्कूल भवनों और लटकते बिजली के तारों को लेकर विशेष सुरक्षा निर्देश
लगातार हो रही बारिश के कारण पुराने और जर्जर विद्यालय भवनों की छतों से पानी टपकने और प्लास्टर गिरने की आशंका बढ़ जाती है। जिलाधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विकास खंडों में स्थित प्रत्येक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल के भवनों का भौतिक सत्यापन करें।
यदि किसी विद्यालय की छत, चहारदीवारी या कोई कक्ष असुरक्षित या जर्जर अवस्था में है, तो वहां तत्काल लाल रिबन से घेराबंदी (Barrisoning) की जाए और स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों को उन असुरक्षित कक्षों में बिल्कुल न बैठाया जाए। विद्युत विभाग (डिस्कॉम) के अधिशासी अभियंताओं को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल परिसरों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन या एलटी लाइनों, ट्रांसफार्मरों और खुले खंभों की तुरंत जांच की जाए ताकि करंट उतरने की किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
अभिभावकों और आम नागरिकों के लिए जिला प्रशासन की अपील
खराब मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से भी विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है:
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भारी बारिश और आंधी-तूफान के समय बच्चों को बेवजह घरों से बाहर जलभराव वाले स्थानों या खुले मैदानों में न जाने दें।
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बच्चों को उफनते नालों, तालाबों, जलमग्न गड्ढों और बिजली के खंभों के पास खेलने से पूरी तरह रोकें।
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वर्षा के मौसम में दूषित जल से फैलने वाली जलजनित बीमारियों (डायरिया, टायफाइड) और मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए बच्चों को उबला हुआ पानी पिलाएं और फुल आस्तीन के कपड़े पहनाएं।
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किसी भी आपातकालीन स्थिति, सड़क धंसने या जलभराव की सूचना के लिए जिला कलेक्ट्रेट के 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम नंबर और राज्य आपदा हेल्पलाइन (1077) पर संपर्क करें।
आसपास के अन्य जिलों में भी समीक्षा के बाद लिए जा सकते हैं फैसले
मौसम विभाग के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश में मानसूनी ट्रफ और बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती परिसंचरण का असर अगले तीन से चार दिनों तक बना रहेगा। ऐसे में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, अलीगढ़, झांसी और गाजियाबाद सहित अन्य जनपदों के जिलाधिकारी भी अपने-अपने जिलों में स्थानीय वर्षा, गंगा-यमुना-घाघरा नदियों के जलस्तर और जलभराव की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। संबंधित जिलों में भी मौसम की प्रतिकूलता के आधार पर स्थानीय स्तर पर शिक्षण संस्थानों में छुट्टियों की घोषणा की जा सकती है।