पाकिस्तान में अफगान छात्रों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 20 से अधिक मेडिकल छात्र हॉस्टल से हिरासत में

पाकिस्तान में अफगान छात्रों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 20 से अधिक मेडिकल छात्र हॉस्टल से हिरासत में

पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिकों के खिलाफ शुरू किए गए देशव्यापी अभियान का दायरा अब शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गया है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पेशावर और आसपास के इलाकों में स्थित हॉस्टलों और निजी आवासों पर छापेमारी कर 20 से अधिक अफगान मेडिकल छात्रों को हिरासत में ले लिया है। अचानक हुई इस कार्रवाई से प्रांतीय मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे विदेशी छात्रों में दहशत का माहौल बन गया है। पुलिस ने दावा किया है कि ये छात्र बिना वैध कानूनी दस्तावेजों और वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद अवैध रूप से पाकिस्तान में रह रहे थे, जबकि अफगान छात्र संगठनों और परिजनों का आरोप है कि वैध दस्तावेज और कॉलेज कार्ड दिखाने के बावजूद उन्हें जबरन गाड़ियों में भरकर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया।

देर रात हॉस्टलों में छापेमारी: कमरों की तलाशी के बाद छात्रों को उठाया

घटना खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के आसपास स्थित निजी हॉस्टलों की है। प्रत्यक्षदर्शियों और साथी छात्रों के अनुसार, भारी पुलिस बल ने आधी रात के समय हॉस्टलों की घेराबंदी की और कमरों की तलाशी ली। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से उनके पहचान पत्र, पासपोर्ट और वीजा दस्तावेजों की मांग की।

तलाशी अभियान के दौरान विभिन्न मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस की पढ़ाई कर रहे 20 से अधिक अफगान छात्रों को हिरासत में ले लिया गया। साथी छात्रों ने बताया कि कई विद्यार्थियों के पास उनके विश्वविद्यालय के वैध प्रवेश पत्र (स्टूडेंट कार्ड) और उच्च शिक्षा आयोग (HEC) के नामांकन दस्तावेज मौजूद थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक न सुनी और उन्हें सीधे वैन में बैठाकर थाने ले जाया गया।

क्या हैं पुलिस के आरोप? 'अवैध विदेशियों के खिलाफ राष्ट्रीय कार्ययोजना'

पेशावर पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने इस कार्रवाई को पाकिस्तान सरकार की 'अवैध विदेशी प्रत्यावर्तन योजना' (Illegal Foreigners Repatriation Plan) के तहत की गई नियमित कार्रवाई करार दिया है। पुलिस के प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:

  • वीजा अवधि समाप्त (Overstaying): पुलिस का दावा है कि पकड़े गए अधिकांश छात्रों के स्टूडेंट वीजा की वैधता समाप्त हो चुकी थी और उन्होंने गृह मंत्रालय या संबंधित आव्रजन विभाग से इसका नवीनीकरण (Extension) नहीं कराया था।

  • अनधिकृत प्रवास: कई छात्र उन श्रेणियों या पतों पर रह रहे थे, जिसकी पूर्व सूचना स्थानीय पुलिस या स्पेशल ब्रांच को नहीं दी गई थी।

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन: पाकिस्तान सरकार के नए सुरक्षा नियमों के अनुसार, देश में रहने वाले प्रत्येक विदेशी नागरिक—विशेषकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में—के पास वैध पंजीकरण और यात्रा परमिट होना अनिवार्य है।

अफगान दूतावास और छात्रों का पलटवार: 'वीजा नवीनीकरण में खुद पाक प्रशासन करता है देरी'

इस कार्रवाई के बाद इस्लामाबाद स्थित अफगान दूतावास और अफगानिस्तान के छात्रों के प्रतिनिधियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अफगान छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक कोटे और वैध स्कॉलरशिप के जरिए ही मेडिकल की पढ़ाई करने आए थे।

छात्रों का कहना है कि जब वे वीजा नवीनीकरण के लिए पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करते हैं, तो महीनों तक फाइलों को लंबित रखा जाता है और एनओसी (NOC) जारी नहीं की जाती। तकनीकी और प्रशासनिक देरी का ठीकरा छात्रों के सिर फोड़कर उन्हें अपराधियों की तरह उठाना मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक गरिमा का खुला उल्लंघन है। कई छात्रों की आगामी सप्ताह में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं और क्लिनिकल रोटेशन निर्धारित हैं, ऐसे में हिरासत में लिए जाने से उनका शैक्षणिक करियर पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है।

पाकिस्तान-अफगान सीमा पर तनाव और नागरिकों पर कसता शिकंजा

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमलों और सीमा पर लगातार होने वाली गोलाबारी को लेकर पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और काबुल की अंतरिम तालिबान सरकार के बीच रिश्ते बेहद तल्ख दौर से गुजर रहे हैं।

पाकिस्तान सरकार ने पिछले कुछ महीनों में 5 लाख से अधिक 'अवैध' अफगान शरणार्थियों को जबरन सीमा पार डिपोर्ट किया है। पाकिस्तानी प्रतिष्ठान का तर्क है कि देश के भीतर हो रही आतंकी गतिविधियों और आंतरिक सुरक्षा संकट में अवैध रूप से रह रहे अफगानी नागरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों (HRCP और एमनेस्टी इंटरनेशनल) ने चिंता जताई है कि सुरक्षा अभियानों की आड़ में पढ़ने वाले बेकसूर छात्रों और बीमार शरणार्थियों को निशाना बनाना बेहद अमानवीय है।

राजनयिक हस्तक्षेप की मांग, छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट

पेशावर और अन्य शहरों में हिरासत में लिए गए छात्रों के परिवारों ने काबुल स्थित विदेश मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। अफगान राजनयिकों ने खैबर पख्तूनख्वा के गृह विभाग से संपर्क साधकर छात्रों की बिना शर्त और तत्काल रिहाई की मांग की है ताकि वे अपनी पढ़ाई और परीक्षाएं जारी रख सकें। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच (वेरिफिकेशन) पूरी होने के बाद वैध पाए जाने वाले छात्रों को रिहा किया जाएगा, जबकि जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिलेगा, उन्हें तोरखम बॉर्डर के रास्ते डिपोर्ट करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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