अमेरिकी सैटेलाइट के कैमरे में कैद हुआ रहस्यमयी 'शेनलोंग' स्पेसप्लेन, ऑर्बिट में छोड़े 9 अज्ञात ऑब्जेक्ट्स

अमेरिकी सैटेलाइट के कैमरे में कैद हुआ रहस्यमयी 'शेनलोंग' स्पेसप्लेन, ऑर्बिट में छोड़े 9 अज्ञात ऑब्जेक्ट्स

पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में महाशक्तियों के बीच चल रहे गुप्त अंतरिक्ष युद्ध (Space War) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और दुर्लभ दृश्य सामने आया है। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (Defense Intelligence Agency - DIA) की एक रिपोर्ट में अमेरिकी निगरानी उपग्रह द्वारा अंतरिक्ष से खींची गई चीन के अति-गोपनीय और पुन: प्रयोज्य (Reusable) अंतरिक्ष विमान 'शेनलोंग' (Shenlong) की पहली उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीर सार्वजनिक की गई है। यह अंतरिक्ष यान आकार में लगभग 26 फीट लंबा है और देखने में एक छोटे मानव रहित स्पेस शटल जैसा नजर आता है। सैटेलाइट द्वारा ली गई इस तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि यह चीनी विमान अंतरिक्ष में केवल निष्क्रिय नहीं तैर रहा है, बल्कि इसके सोलर पैनल्स पूरी तरह फैले हुए हैं और इसका पेलोड बे (सामान रखने वाला मुख्य कम्पार्टमेंट) खुला हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह विमान किसी बेहद गोपनीय रणनीतिक व सैन्य मिशन को अंजाम दे रहा है।

कक्षा में छोड़ीं 9 रहस्यमयी वस्तुएं, 'कैच एंड रिलीज' का युद्धाभ्यास

इस चीनी स्पेसप्लेन को लेकर पश्चिमी देशों और अमेरिकी स्पेस फोर्स की चिंता केवल इसकी मौजूदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में इसकी अप्रत्याशित गतिविधियों ने रक्षा विश्लेषकों के कान खड़े कर दिए हैं। ओपन-सोर्स ऑर्बिटल ट्रैकिंग डेटा और अमेरिकी स्पेस इंटेलिजेंस कंपनियों के विश्लेषण के अनुसार, अपने पिछले और मौजूदा मिशनों के दौरान इस स्पेसप्लेन ने कक्षा में घूमते हुए कम से कम 9 अज्ञात और रहस्यमयी वस्तुएं (Payloads/Satellites) रिलीज की हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि खगोल भौतिकविदों ने इस स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में इन छोड़ी गई छोटी वस्तुओं के पास युद्धाभ्यास करते, उन्हें फिर से पकड़ते (रैप्चर) और उनके साथ संचार सिग्नल साझा करते हुए ट्रैक किया है। इस तरह के 'रॉन्डेवू और प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशंस' (RPO) यह संकेत देते हैं कि चीन अंतरिक्ष में किसी भी उपग्रह को डॉक करने, कैप्चर करने या निष्क्रिय करने की तकनीक का गुप्त परीक्षण कर रहा है।

अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट 'X-37B' की सटीक टक्कर, क्यों है यह विमान इतना खतरनाक?

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का 'शेनलोंग' स्पेसक्राफ्ट तकनीकी तौर पर अमेरिकी स्पेस फोर्स के बेहद गुप्त मानवरहित विमान 'बोइंग X-37B' की सटीक प्रतिकृति (काउंटरपार्ट) प्रतीत होता है। जहां पारंपरिक रॉकेट केवल एक बार उपग्रह छोड़कर अंतरिक्ष के कचरे में तब्दील हो जाते हैं, वहीं शेनलोंग एक ऐसा विमान है जो पारंपरिक रॉकेट (लॉन्ग मार्च 2F) के जरिए अंतरिक्ष में लॉन्च होता है, महीनों तक अंतरिक्ष की कक्षा में जासूसी और तकनीकी परीक्षण करता है और फिर वापस पृथ्वी पर आकर एक सामान्य लड़ाकू विमान की तरह रनवे पर सुरक्षित लैंड कर सकता है। इसे 20 से अधिक बार पुन: इस्तेमाल किया जा सकता है। चीन के उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित एक अत्यधिक गोपनीय एयरबेस पर इसके लिए एक असाधारण रूप से लंबा रनवे तैयार किया गया है। पेंटागन के अनुसार, किसी अंतरिक्ष यान का तेजी से कक्षा बदलना और रनवे पर सुरक्षित लौटना उसे युद्ध के समय एक विनाशकारी रणनीतिक हथियार बना देता है।

जासूसी, एंटी-सैटेलाइट हथियार या नई पीढ़ी का सर्विलांस सिस्टम?

चीन आधिकारिक तौर पर इस परियोजना को केवल 'शांतिपूर्ण अंतरिक्ष उपयोग और पुन: प्रयोज्य तकनीक का परीक्षण' करार देता है, लेकिन इसकी अभेद्य गोपनीयता ने दुनिया भर में शक की सुई को घुमा दिया है। अमेरिकी सेना और पश्चिमी रणनीतिकारों का मानना है कि पेलोड बे खोलकर अन्य उपग्रहों के करीब जाना यह साबित करता है कि इसका इस्तेमाल 'एंटी-सैटेलाइट हथियार' (Anti-Satellite Weapon) के तौर पर किया जा सकता है। यदि भविष्य में कोई वैश्विक संघर्ष छिड़ता है, तो ऐसे स्पेसप्लेन चुपके से दुश्मन देश के संचार, जीपीएस और रक्षा उपग्रहों के करीब जाकर उन्हें इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से अंधा कर सकते हैं या उन्हें अपनी कक्षा से खींचकर अंतरिक्ष में नष्ट कर सकते हैं।

अंतरिक्ष में महाशक्तियों की सीधी होड़, भविष्य के 'स्टार वॉर्स' की आहट

अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी द्वारा इस गोपनीय तस्वीर को सार्वजनिक करना यह दर्शाता है कि वाशिंगटन अब बीजिंग को यह कड़ा कूटनीतिक संदेश देना चाहता है कि उसकी हर गुप्त अंतरिक्ष गतिविधि पर अमेरिकी सैटेलाइट्स की 24 घंटे पैनी नजर है। फरवरी 2026 में लॉन्च किए गए अपने चौथे मिशन के तहत शेनलोंग पिछले कई महीनों से लगातार सक्रिय है और कई देशों के ऊपर से होकर गुजर चुका है। अमेरिका के X-37B और चीन के शेनलोंग के बीच अंतरिक्ष की इस अंधाधुंध रेस ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, हवा या पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरिक्ष की शांत कक्षाएं अब महाशक्तियों के वर्चस्व और आधुनिक हथियारों के परीक्षण का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुकी हैं।