कैंसर के खिलाफ मेडिकल साइंस की सबसे बड़ी कामयाबी? मॉडर्ना की पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन ने जगाई नई उम्मीद, जानिए कैसे करेगी ट्यूमर का खात्मा
चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज को लेकर एक युगांतरकारी सफलता सामने आई है। कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी प्रभावी वैक्सीन से पहचान बनाने वाली अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी मॉडर्ना (Moderna) और दिग्गज दवा कंपनी मर्क (Merck/MSD) की संयुक्त साझेदारी में विकसित की गई पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन ने अपने अंतिम चरण यानी फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल (INTerpath-001) में ऐतिहासिक और सकारात्मक परिणाम दिए हैं।
इस वैक्सीन को मेडिकल जगत में 'इंटिसमेरन ऑटोजेन' (Intismeran Autogene / mRNA-4157) के नाम से जाना जाता है। लेट-स्टेज ट्रायल में मिले उत्साहजनक नतीजों के बाद यह उम्मीद बेहद मजबूत हो गई है कि आने वाले समय में सर्जरी के बाद कैंसर को दोबारा लौटने और शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोकने के लिए वैक्सीन का इस्तेमाल एक मुख्यधारा उपचार के रूप में किया जा सकेगा।
आम टीकों से बिल्कुल अलग: क्या है पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन?
पारंपरिक टीके (Vaccines) पूरे समाज को किसी वायरस या बैक्टीरिया (जैसे पोलियो, हेपेटाइटिस या कोविड) के संक्रमण से बचाने के लिए एक जैसे फॉर्मूले पर बनाए जाते हैं। लेकिन कैंसर का मामला बिल्कुल अलग होता है, क्योंकि हर इंसान के शरीर में पनपने वाले ट्यूमर का जेनेटिक म्यूटेशन (डीएनए बदलाव) एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न होता है।
मॉडर्ना की यह वैक्सीन 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' फॉर्मूले पर नहीं, बल्कि हर मरीज के लिए कस्टमाइज्ड (पर्सनलाइज्ड) रूप से तैयार की जाती है:
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ट्यूमर की जेनेटिक बायोप्सी: सबसे पहले सर्जरी के जरिए मरीज के ट्यूमर को बाहर निकाला जाता है और उसकी जेनेटिक सीक्वेंसिंग की जाती है।
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यूनिक म्यूटेशन की पहचान: मरीज के ट्यूमर में मौजूद 34 तक विशिष्ट म्यूटेशन (नियोएंटीजन) की पहचान की जाती है, जो केवल कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद होते हैं।
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सिंथेटिक mRNA का निर्माण: इन म्यूटेशन्स के आधार पर मरीज के लिए एक विशेष mRNA निर्देश कोड तैयार किया जाता है।
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इम्यून सिस्टम की ट्रेनिंग: जब यह वैक्सीन मरीज के शरीर में इंजेक्ट की जाती है, तो यह उसके इम्यून सिस्टम (विशेषकर टी-सेल्स) को यह सिखाती है कि सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें पूरी तरह कैसे नष्ट करना है।
फेज 3 ट्रायल में क्या नतीजे सामने आए?
हाई-रिस्क स्किन कैंसर (मेलेनोमा) के स्टेज IIB से IV तक के 1,137 मरीजों पर किए गए इस बड़े ट्रायल में वैक्सीन को मर्क की मशहूर इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (Keytruda / Pembrolizumab) के साथ मिलाकर दिया गया:
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रिकरेंस-फ्री सर्वाइवल (RFS): ट्रायल के आंकड़ों से साबित हुआ कि अकेले कीट्रूडा लेने वाले मरीजों की तुलना में, जिन मरीजों को कीट्रूडा के साथ mRNA वैक्सीन दी गई, उनमें कैंसर के दोबारा लौटने का जोखिम काफी कम हो गया।
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मेटास्टेसिस पर रोक: यह वैक्सीन कैंसर को फेफड़ों, लिवर या दिमाग जैसे शरीर के अन्य दूरदराज हिस्सों में फैलने (Distant Metastasis) से रोकने में बेहद प्रभावी साबित हुई।
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लॉन्ग-टर्म सुरक्षा: इससे पहले हुए फेज 2b के पांच साल के फॉलो-अप में देखा गया था कि इस कॉम्बिनेशन ने बीमारी के दोबारा उभरने या मौत के जोखिम को करीब 49% तक कम किया था।
अन्य कैंसर के इलाज के लिए भी खुलेंगे रास्ते
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल ट्रायल का महत्व केवल स्किन कैंसर (मेलेनोमा) तक सीमित नहीं है। यह पहला वैज्ञानिक प्रमाण है कि इंसान के खुद के ट्यूमर म्यूटेशन के आधार पर mRNA वैक्सीन बनाकर कैंसर के दोबारा होने को रोका जा सकता है।
मॉडर्ना और मर्क इस तकनीक का परीक्षण अब फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer), ब्लैडर कैंसर और किडनी कैंसर के मरीजों पर भी बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। यदि आने वाले समय में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) और अन्य वैश्विक नियामकों से इसे पूर्ण मंजूरी मिलती है, तो यह वैश्विक ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार) के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित होगा।