LPG Rules 2026: एक ही मकान में क्या मकान मालिक और किराएदार दोनों रख सकते हैं अलग-अलग गैस कनेक्शन?
किराए के मकान में रहने वाले लाखों लोगों और मकान मालिकों के मन में अक्सर यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या एक ही मकान या एक ही पते पर दो अलग-अलग घरेलू एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन वैध रूप से रखे जा सकते हैं? कई बार मकान मालिकों को यह डर सताता है कि यदि किराएदार ने उसी पते पर नया गैस कनेक्शन ले लिया, तो कहीं तेल कंपनियां उनके अपने पुराने कनेक्शन को अवैध मानकर ब्लॉक न कर दें या उनकी सरकारी सब्सिडी बंद न हो जाए। वहीं, दूसरी ओर नए शहर में शिफ्ट होने वाले छात्रों और नौकरीपेशा किराएदारों को गैस एजेंसी के चक्कर काटते समय यह कहकर लौटा दिया जाता है कि इस पते पर पहले से एक कनेक्शन मौजूद है। इस पूरे विषय पर भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और देश की तीनों प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (इंडियन ऑयल/इंडेन, भारत पेट्रोलियम/भारत गैस और हिंदुस्तान पेट्रोलियम/एचपी गैस) के नियम पूरी तरह से स्पष्ट और पारदर्शी हैं। सरकारी नियमों के अनुसार, एक ही मकान, प्लॉट नंबर या म्युनिसिपल एड्रेस पर मकान मालिक और किराएदार दोनों के नाम पर अलग-अलग और पूरी तरह वैध घरेलू गैस कनेक्शन हो सकते हैं। कानून किसी भी नागरिक को किराएदार होने के आधार पर बुनियादी ऊर्जा सुविधा से वंचित नहीं करता, बशर्ते इसके लिए निर्धारित बुनियादी तकनीकी और कानूनी शर्तों को पूरी ईमानदारी से पूरा किया गया हो।
'एक घर, एक कनेक्शन' का असली अर्थ: जानिए किस स्थिति में रद्द हो सकता है गैस सिलेंडर?
अक्सर लोग तेल कंपनियों के 'वन हाउसहोल्ड, वन कनेक्शन' (एक परिवार, एक गैस कनेक्शन) के नियम को गलत समझ लेते हैं। सरकार ने यह नियम उस समय सख्ती से लागू किया था जब लोग सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर कई-कई कनेक्शन ले लेते थे। पेट्रोलियम मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में 'हाउसहोल्ड' यानी 'परिवार/गृहस्थी' को परिभाषित किया गया है। इसका अर्थ यह है कि एक ही चूल्हे या एक ही रसोई पर आश्रित रहने वाले परिवार के पास केवल एक ही एलपीजी कनेक्शन होना चाहिए। लेकिन जब बात मकान मालिक और किराएदार की आती है, तो वे दोनों कानूनन दो अलग-अलग स्वतंत्र परिवार (Separate Households) माने जाते हैं। भले ही वे दोनों एक ही चारदीवारी या एक ही बहुमंजिला इमारत के भीतर रह रहे हों, लेकिन यदि उनका खान-पान, बजट और रहने का स्थान पूरी तरह अलग है, तो उन्हें दो अलग इकाइयां माना जाएगा। इसलिए एक पते पर दो अलग व्यक्तियों (एक मकान मालिक और एक किराएदार) के नाम पर दो कनेक्शन होना नियमों का उल्लंघन बिल्कुल नहीं है। कंपनियों का सॉफ्टवेयर केवल तभी कनेक्शन को 'सस्पेक्ट' (संदिग्ध) सूची में डालता है जब एक ही नाम, एक ही बैंक खाते या एक ही आधार नंबर से दो कनेक्शन जुड़े हों।
अलग किचन का अनिवार्य नियम: गैस एजेंसी की जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन में क्या होता है?
एक ही मकान में दो अलग कनेक्शन की वैधता की सबसे पहली और सबसे अनिवार्य शर्त है—'अलग रसोई' (Separate Kitchen)। यदि आप किसी मकान में किराए पर रहते हैं और अपने नाम पर नया एलपीजी कनेक्शन लेना चाहते हैं, तो आपके रहने के हिस्से में एक अलग और स्वतंत्र किचन सेटअप होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि किराएदार का गैस चूल्हा, बर्तन और खाना पकाने की जगह मकान मालिक के किचन से पूरी तरह अलग किसी अन्य कमरे या फ्लोर (जैसे ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर या एनेक्सी रूम) पर होनी चाहिए। जब किराएदार नए कनेक्शन के लिए आवेदन करता है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के नियमों के तहत संबंधित गैस एजेंसी को फिजिकल वेरिफिकेशन यानी भौतिक सत्यापन का अधिकार होता है। एजेंसी का डिलीवरी पर्सन या इंस्पेक्टिंग स्टाफ मौके पर जाकर यह सुनिश्चित कर सकता है कि मकान में वास्तव में दो अलग-अलग परिवार रह रहे हैं और खाना पकाने के लिए दो स्वतंत्र रसोईघर मौजूद हैं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि दोनों पक्ष एक ही रसोई साझा कर रहे हैं और केवल अतिरिक्त सिलेंडर के लालच में नया कनेक्शन मांगा गया है, तो आवेदन को तुरंत निरस्त किया जा सकता है।
किराएदार को नया एलपीजी कनेक्शन लेने के लिए किन जरूरी दस्तावेजों की पड़ेगी आवश्यकता?
यदि आप किराएदार हैं और अपने नाम पर नया घरेलू 14.2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर लेना चाहते हैं, तो अब प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी सरल और डिजिटल हो चुकी है। आपको मकान मालिक के किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की भी अनिवार्य आवश्यकता नहीं होती, यदि आपके पास वैध कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। नए कनेक्शन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची इस प्रकार है:
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वैध रेंट एग्रीमेंट (Registered Rent Agreement): यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। रेंट एग्रीमेंट में आपका नाम, मकान मालिक का नाम और किराए पर लिए गए हिस्से का स्पष्ट विवरण (जैसे- फर्स्ट फ्लोर, कमरा नंबर-2 या फ्लैट नंबर) दर्ज होना चाहिए।
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पहचान का प्रमाण (POI): पहचान पत्र के रूप में आपका आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट या पैन कार्ड मान्य होता है।
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निवास प्रमाण पत्र (POA): निवास के पते के लिए आपका आधार कार्ड (यदि स्थानीय पता अपडेट है) या फिर नोटरी/रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट के साथ आपका बैंक पासबुक जिसमें उस पते का उल्लेख हो, पूरी तरह स्वीकार्य है।
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बैंक खाता विवरण: एलपीजी पर मिलने वाली प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBTL/PAHAL) सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आपके आधार से लिंक बैंक खाते का कैंसिल्ड चेक या पासबुक की कॉपी।
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पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर: ऑनलाइन पोर्टल (MyLPG.in) या एजेंसी पर फॉर्म भरते समय 2 पासपोर्ट साइज फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है।
अगर रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट न हो तो क्या करें? जानिए 'छोटू सिलेंडर' और एड्रेस प्रूफ का आसान विकल्प
अक्सर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, कोटा, पुणे और पटना जैसे बड़े शिक्षा व रोजगार केंद्रों में रहने वाले छात्रों, अविवाहित युवाओं या अस्थायी कामगारों के पास 11 महीने का औपचारिक रेंट एग्रीमेंट नहीं होता। ऐसे लोगों को खाना पकाने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए पेट्रोलियम कंपनियों ने दो बेहद सुगम विकल्प पेश किए हैं। पहला विकल्प है 'छोटू सिलेंडर' (5 किलोग्राम एफटीएल - फ्री ट्रेड एलपीजी)। इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम द्वारा पेश किए गए इस 5 किलो के सिलेंडर को लेने के लिए किसी भी प्रकार के स्थायी एड्रेस प्रूफ या रेंट एग्रीमेंट की आवश्यकता नहीं होती है। कोई भी व्यक्ति केवल अपना आधार कार्ड या मूल पहचान पत्र दिखाकर किसी भी अधिकृत गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप या चुनिंदा किराना स्टोर से इसे तुरंत खरीद सकता है। जब सिलेंडर खाली हो जाए, तो खाली सिलेंडर देकर रीफिल लिया जा सकता है। दूसरा विकल्प यह है कि यदि आपके पास आधार कार्ड है लेकिन उस पर आपके गृह राज्य या गांव का पता दर्ज है, तो भी आप गैस एजेंसी में केवल एक 'स्व-घोषणा पत्र' (Self-Declaration Form) भरकर वर्तमान पते पर घरेलू कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। सरकार ने माइग्रेंट वर्कर्स और छात्रों की सहूलियत के लिए पते के नियमों में भारी ढील दी है।
मकान मालिक और किराएदार इन 3 बड़ी गलतियों से बचें, वरना ब्लॉक हो सकता है गैस कनेक्शन
एक ही मकान में दो कनेक्शन चलाते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतना आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी कानूनी या तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े। सबसे पहली सावधानी यह रखें कि किराएदार कभी भी मकान मालिक के गैस पासबुक या कनेक्शन नंबर पर दूसरा सिलेंडर लेने की कोशिश न करे; हमेशा अपने स्वतंत्र आधार और बैंक खाते से ही नया कनेक्शन लें। दूसरा, जब भी किराएदार उस मकान को खाली करके किसी दूसरे शहर या इलाके में शिफ्ट हो, तो अपने गैस कनेक्शन को लावारिस न छोड़ें। तुरंत अपनी गैस एजेंसी में जाकर 'ट्रांसफर वाउचर' (SV/TV) प्राप्त करें और अपने कनेक्शन को नए पते पर ट्रांसफर करवा लें। तीसरा, कभी भी एक ही आधार नंबर को दो अलग-अलग कनेक्शनों से लिंक न कराएं, क्योंकि तेल कंपनियों के सर्वर पर आधार सीडिंग होते ही सिस्टम डुप्लीकेट कनेक्शन को पहचान लेता है और दोनों में से एक या दोनों कनेक्शनों की गैस आपूर्ति तुरंत बंद कर देता है। यदि मकान मालिक और किराएदार इन बुनियादी नियमों और अलग रसोई के सिद्धांत का पालन करते हैं, तो वे एक ही छत के नीचे बिना किसी डर या रुकावट के वर्षों तक अलग-अलग एलपीजी कनेक्शन का सुचारू रूप से उपयोग कर सकते हैं।