अगस्त में खुदरा महंगाई दर उछलकर 4.82% पर: अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों ने बिगाड़ा बजट; क्या अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाएगा RBI?
देश में आम जनता की रसोई के बजट और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह जुलाई के 4.45 प्रतिशत के मुकाबले तेज उछाल है और लगातार तीसरा महीना है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
सब्जियों और मसालों की आसमान छूती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है। इस तेज उछाल के बाद वित्तीय बाजारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी का कड़ा फैसला ले सकता है।
खाद्य महंगाई 5.95% पर: अदरक, लहसुन और प्याज में लगी आग
अगस्त के महंगाई आंकड़ों में सबसे बड़ा योगदान खाद्य पदार्थों का रहा:
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खाद्य महंगाई दर (CFPI): जुलाई में 5.52 प्रतिशत से उछलकर अगस्त में खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत पर पहुंच गई। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.64 प्रतिशत दर्ज की गई।
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प्याज की महंगाई दोगुनी से अधिक: प्याज की मुद्रास्फीति दर जुलाई के 22.54 प्रतिशत से सीधे बढ़कर अगस्त में 48.27 प्रतिशत पर पहुंच गई।
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लहसुन और अदरक के तेवर तल्ख: लहसुन की महंगाई दर बढ़कर 43.60 प्रतिशत (जुलाई में 35.36%) हो गई, जबकि अदरक की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 73.82 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी हुई हैं।
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राहत कहां मिली? सब्जियों की बास्केट में टमाटर की कीमतों में साल-दर-साल आधार पर 31.09 प्रतिशत और आलू में 13.14 प्रतिशत की गिरावट से कुछ हद तक संतुलन बना रहा।
इसके अलावा, बुलियन मार्केट में चांदी के आभूषणों की कीमतों में 107.11 प्रतिशत और सोने-हीरे के आभूषणों में 35.53 प्रतिशत की सालाना वृद्धि ने भी गैर-खाद्य बास्केट पर गहरा असर डाला।
ग्रामीण बनाम शहरी महंगाई: गांवों पर ज्यादा मार
| श्रेणी / क्षेत्र | अगस्त दर (प्रारंभिक) | जुलाई दर |
| समग्र खुदरा महंगाई (All-India CPI) | 4.82% | 4.45% |
| ग्रामीण महंगाई (Rural CPI) | 5.23% | 4.84% |
| शहरी महंगाई (Urban CPI) | 4.31% | 3.96% |
| खाद्य महंगाई (CFPI) | 5.95% | 5.52% |
राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में सबसे अधिक 6.27% और तमिलनाडु में 5.92% की खुदरा महंगाई दर दर्ज की गई, जबकि मिजोरम में यह सबसे कम 2.35% रही।
क्या RBI लेगा ब्याज दरों पर कड़ा फैसला?
लगातार तीसरे महीने महंगाई दर का 4% के पार रहना और प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सामने कड़ा नीतिगत असमंजस खड़ा कर रहा है:
1. ब्याज दरें बढ़ने (Rate Hike) की आशंका क्यों?
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पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल का दबाव: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें भारत की आयातित महंगाई (Imported Inflation) को बढ़ा सकती हैं।
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दूसरी छमाही में स्पिलओवर का जोखिम: यदि खाद्य और ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग इनपुट लागत बढ़कर कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) को भड़का सकती है।
2. आरबीआई क्यों बरत सकता है नरमी (Status Quo)?
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आरबीआई के 2-6% टॉलरेंस बैंड के भीतर: 4.82% का आंकड़ा आरबीआई के 4% के मध्यवर्ती लक्ष्य से ऊपर जरूर है, लेकिन यह कानूनी रूप से तय 2% से 6% के दायरे के भीतर है।
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कोर महंगाई काबू में: सोना-चांदी को छोड़कर मुख्य कोर महंगाई दर अब भी 4.3% के आसपास अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
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सप्लाई-साइड शॉक: अर्थशास्त्रियों का मानना है कि प्याज, अदरक और लहसुन की महंगाई आपूर्ति शृंखला और मौसमी कारणों से है। ब्याज दरें बढ़ाने से आपूर्ति की कमी दूर नहीं हो सकती, बल्कि इससे आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) की रफ्तार धीमी पड़ने का जोखिम रहता है।
अधिकांश आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि आरबीआई की एमपीसी आगामी बैठक में नीतिगत दरों को यथावत (Status Quo) रख सकती है, लेकिन जब तक खाद्य कीमतें सामान्य नहीं होतीं, तब तक ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) की उम्मीदें पूरी तरह ठंडे बस्ते में चली गई हैं।