सेंसेक्स 905 अंक उछलकर 74,150 के पार और निफ्टी 23 हजार के मुहाने पर; निवेशकों की झोली में आए ₹5 लाख करोड़
घरेलू शेयर बाजार में पिछले कई दिनों से जारी सुस्ती, अनिश्चितता और मंदड़ियों के दबाव पर गुरुवार को आखिरकार विराम लग गया और दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा लिवाली की जबर्दस्त वापसी देखने को मिली। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 905.01 अंक यानी 1.24 प्रतिशत की तूफानी छलांग लगाकर 74,151.04 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी भी 237.90 अंक यानी 1.05 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज करते हुए 22,936.75 के स्तर पर पहुंच गया, जो 23,000 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से मात्र कुछ ही कदम दूर है। बाजार में आई इस एकदिनी ऐतिहासिक तेजी के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) एक ही झटके में लगभग ₹5 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया। सुबह के कारोबारी सत्र में मामूली बढ़त के साथ शुरुआत करने के बाद दोपहर होते-होते जैसे ही वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत आने शुरू हुए, बाजार में खरीदारी का ऐसा चक्रवात आया जिसने बिकवाली करने वालों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स अपने निचले स्तर 73,181.90 से 1,000 अंक से अधिक सुधरा और निफ्टी ने भी 22,656 के निचले स्तर से शानदार यू-टर्न लेते हुए दिन के उच्चतम स्तरों के करीब क्लोजिंग दी। इस अप्रत्याशित उछाल ने न केवल रीटेल निवेशकों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है, बल्कि पोर्टफोलियो में लंबे समय से लाल निशान देख रहे छोटे-बड़े निवेशकों की वेल्थ में भारी इजाफा किया है। कारोबारी सत्र के दौरान बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) भी असाधारण रूप से सकारात्मक रही। बीएसई पर 2,600 से अधिक शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि लाल निशान में बंद होने वाले शेयरों की संख्या मात्र 1,700 के आसपास सिमट कर रह गई। केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाले निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी लगभग 1-1 प्रतिशत की ठोस बढ़त दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह रिकवरी केवल एक तकनीकी बाउंस नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स और वैश्विक राहत का सीधा हाथ है। पिछले हफ्ते लगातार हुई बिकवाली के बाद जो निराशा का माहौल बन गया था, वह आज की 900 से अधिक अंकों की छलांग के बाद पूरी तरह आत्मविश्वास में बदल चुका है।
शेयर बाजार के 'बमबम' होने के 5 बड़े कारण: जानिए किन ट्रिगर्स ने उड़ाई मंदड़ियों की नींद
दलाल स्ट्रीट पर अचानक लौटी इस हरियाली और ₹5 लाख करोड़ की वेल्थ क्रिएशन के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने 5 बड़े सकारात्मक कारक एक साथ काम कर रहे थे। पहला और सबसे निर्णायक कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Fed) की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक का परिणाम रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को उम्मीद के अनुरूप करीब 3.9 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बनाए रखा है। फेड चेयरमैन ने यह संकेत दिया कि मौजूदा सख्त नीतियों का असर मुद्रास्फीति पर दिखने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में यह भरोसा कायम हुआ कि अब ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी का जोखिम लगभग खत्म हो चुका है। ब्याज दरों में स्थिरता का यह संदेश विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए राहत की सांस लेकर आया।दूसरा बड़ा ट्रिगर अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई जबर्दस्त गिरावट रही। अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर करीब 4.9 प्रतिशत पर आ गई। इसके साथ ही 30 साल के बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.3 प्रतिशत और दो साल के बॉन्ड की यील्ड 4.69 प्रतिशत पर आ गई। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटती है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए फिक्स्ड-इनकम पेपर्स का आकर्षण कम हो जाता है और वे भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) की इक्विटी में जोखिम उठाने के लिए उत्सुक होते हैं। इसी पूंजी प्रवाह की उम्मीद ने घरेलू इक्विटी काउंटरों में नई जान फूंक दी। तीसरा प्रमुख कारण ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुके दिग्गज शेयरों में आई जोरदार 'वैल्यू बाइंग' रही। पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू बाजार में आई गिरावट के चलते बैंकिंग, आईटी, एफएमसीजी और कैपिटल गुड्स सेक्टर के कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों के वैल्यूएशन ऐतिहासिक रूप से आकर्षक स्तरों पर आ गए थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और म्यूचुअल फंड्स ने इन रियायती भावों का पूरा फायदा उठाते हुए ब्लूचिप शेयरों में आक्रामक खरीदारी शुरू कर दी।चौथा बड़ा ट्रिगर डेरिवेटिव्स बाजार में बड़े पैमाने पर हुई शॉर्ट कवरिंग और इंडिया विक्स (India VIX) में आई भारी गिरावट रही। शेयर बाजार में वोलैटिलिटी और डर को मापने वाला इंडेक्स 'इंडिया विक्स' आज 7 प्रतिशत से अधिक टूटकर 15.11 के स्तर पर आ गया। विक्स का 15 के आसपास आना इस बात का प्रमाण है कि बाजार से किसी बड़े क्रैश का डर पूरी तरह निकल चुका है। इसके चलते जिन ट्रेडर्स ने मंदी का दांव (Short Positions) लगा रखा था, वे अचानक आई तेजी के कारण अपनी पोजीशन काटने को मजबूर हुए, जिससे बाजार की रफ्तार रॉकेट की तरह ऊपर चढ़ गई। पांचवां कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत उपभोग और आगामी त्योहारी-शादियों के सीजन को लेकर पैदा हुआ आशावाद है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भारत के चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति के दबाव को काफी कम कर दिया है। ब्रेंट क्रूड का भाव ऊपरी स्तरों से फिसलकर 105 से 107 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया, जिससे तेल विपणन कंपनियों, पेंट, एविएशन और ऑटोमोबाइल कंपनियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीदें प्रबल हो गईं।
बैंकिंग, आईटी, रियल्टी और पीएसयू शेयरों ने भरी सबसे तेज उड़ान: इन दिग्गजों में मची खरीदारी की होड़
गुरुवार के इस ऐतिहासिक कारोबारी सत्र में सेक्टोरल स्तर पर जबर्दस्त एक्शन देखने को मिला। सबसे ज्यादा आक्रामकता निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में दर्ज की गई, जो 2.75 प्रतिशत की उछाल के साथ बंद हुआ। रियल एस्टेट कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों और घरों के पंजीकरण में आई रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने इस क्षेत्र को पंख लगा दिए। वहीं दूसरी ओर देश के उपभोग को दर्शाने वाला निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 2.34 प्रतिशत चढ़ा, जबकि सरकारी बैंकों का प्रतिनिधित्व करने वाले निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.20 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर भी वैश्विक राहत के चलते करीब 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी के व्यक्तिगत शेयरों पर नजर डालें तो सरकारी बैंकिंग दिग्गज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), अडानी पोर्ट्स, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), बजाज फिनसर्व और ट्रेंट लिमिटेड टॉप गेनर्स की सूची में शामिल रहे। इन दिग्गजों में 1 प्रतिशत से लेकर 3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। अकेले एसबीआई और रिलायंस इंडस्ट्रीज में आई खरीदारी ने निफ्टी को 22,900 के पार बनाए रखने में सबसे बड़ा योगदान दिया। हालांकि कुछ चुनिंदा ऑटो और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में हल्का दबाव जरूर दिखा, लेकिन चौतरफा खरीदारी के सामने बिकवालों की एक न चली और हर गिरावट पर केवल खरीदारी ही देखने को मिली।
मुंबई, दिल्ली से लेकर देश के टियर-2 शहरों तक रीटेल निवेशकों में जश्न: एसआईपी ने रचा इतिहास
दलाल स्ट्रीट के मुंबई स्थित मुख्यालय से लेकर दिल्ली-एनसीआर, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, लखनऊ, पटना, कानपुर, पुणे और बेंगलुरु जैसे उभरते टियर-2 और टियर-3 शहरों के खुदरा निवेशकों में इस तेजी को लेकर खासा उत्साह है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार की संरचना में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। पहले जहां बाजार पूरी तरह से विदेशी निवेशकों (FIIs) के रुख पर निर्भर रहता था, वहीं अब भारत का आम रीटेल निवेशक म्यूचुअल फंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए देश के शेयर बाजार की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुका है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हर महीने देश में ₹25,000 करोड़ से अधिक की शुद्ध एसआईपी इनफ्लो दर्ज हो रही है। छोटे शहरों के वेतनभोगी वर्ग, युवा प्रोफेशनल्स और पहली बार बाजार में उतरे नए निवेशकों द्वारा नियमित रूप से किया जा रहा यह निवेश विदेशी बिकवाली को पूरी तरह सोख रहा है। जब भी विदेशी निवेशक किसी भू-राजनीतिक तनाव के चलते शेयर बेचकर निकलते हैं, तो घरेलू म्यूचुअल फंड्स निचले स्तरों पर शेयर खरीदकर बाजार को एक मजबूत सेफ्टी नेट प्रदान करते हैं। गुरुवार को आई इस 900 अंकों की तेजी ने उन लाखों छोटे निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है जो अनुशासन के साथ हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। लखनऊ के हजरतगंज से लेकर इंदौर के राजबाड़ा तक के ब्रोकिंग दफ्तरों में आज दिनभर रीटेल ट्रेडर्स के बीच इसी बात की चर्चा रही कि कैसे धैर्य रखने वाले निवेशकों को बाजार ने एक ही दिन में बंपर रिटर्न से नवाजा है।
क्या 23 हजार के पार निकलकर 24,000 की ओर बढ़ेगा निफ्टी? एक्सपर्ट्स से जानिए रीटेल निवेशकों के लिए सटीक रणनीति
बाजार में आई इस बंपर तेजी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 24,000 की नई ऊंचाई छूने के लिए तैयार है, या फिर यह केवल एक तात्कालिक उछाल है? दलाल स्ट्रीट के शीर्ष तकनीकी विश्लेषकों और सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी ने अपने 20-दिन और 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के ऊपर एक मजबूत 'बुलिश मारूबोज़ू' कैंडल बनाई है, जो तकनीकी रूप से आने वाले सत्रों में भी तेजी जारी रहने का स्पष्ट संकेत देती है। डेरिवेटिव्स डेटा के अनुसार, 22,800 और 22,700 के स्तर पर पुट राइटर्स ने भारी ओपन इंटरेस्ट बना रखा है, जो अब निफ्टी के लिए एक कंक्रीट फ्लोर या मजबूत सपोर्ट का काम करेगा। ऊपर की ओर 23,000 का स्तर पहला मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस है; यदि शुक्रवार के सत्र में निफ्टी 23,050 के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो शॉर्ट कवरिंग के बल पर यह बहुत तेजी से 23,400 और फिर 23,800 के स्तरों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, मार्केट एनालिस्ट्स ने आम खुदरा निवेशकों को 'फोमो' (FOMO - फियर ऑफ मिसिंग आउट) का शिकार होने से बचने की सख्त चेतावनी दी है। 900 अंकों की इस तेज रैली के बाद किसी भी पेनी स्टॉक या सट्टेबाजी वाले शेयरों में आंख मूंदकर कूदने के बजाय अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करना जरूरी है। नए निवेशकों को 'बाय ऑन डिप्स' यानी हर हल्की गिरावट पर मजबूत बैलेंस शीट वाली दिग्गज लार्जकैप और क्वालिटी मिडकैप कंपनियों में धीरे-धीरे पैसा लगाने की सलाह दी जाती है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस का पालन करना चाहिए, जबकि लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएटर्स के लिए सबसे बेहतर रणनीति यही है कि वे बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव से विचलित हुए बिना अपनी नियमित एसआईपी को जारी रखें। शेयर बाजार का इतिहास गवाह है कि जो निवेशक उतार-चढ़ाव के दौर में संयम बरतते हैं, बाजार की यह नई तेजी अंततः उन्हीं को सबसे बड़ा पुरस्कार देती है।