ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका में इंपोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर लगेगा 200% तक टैरिफ, जानें किसे होगा फायदा और नुकसान?

ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका में इंपोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर लगेगा 200% तक टैरिफ, जानें किसे होगा फायदा और नुकसान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय फार्मा सेक्टर में बड़ा दांव खेलते हुए आयातित जेनेरिक दवाओं (Generic Drugs) के लिए एक नए चरणबद्ध टैरिफ प्लान (Phased Tariff Regime) का ऐलान किया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य विदेशी उत्पादन पर अमेरिका की निर्भरता कम करना और वैश्विक फार्मा कंपनियों को अमेरिका के भीतर अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए मजबूर करना है।

ट्रंप प्रशासन की इस नीति का सीधा असर भारत और चीन जैसे प्रमुख दवा निर्यातक देशों की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर देखने को मिलेगा।

क्या है ट्रंप का चरणबद्ध टैरिफ फॉर्मूला?

ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जारी बयान के अनुसार:

  1. 1 अगस्त 2026 से जुलाई 2028 तक (पहले 2 साल): अमेरिका में आयात होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ (जीरो ड्यूटी) लागू रहेगा।

  2. अगस्त 2028 से अगस्त 2029 (तीसरा साल): शून्य टैरिफ छूट खत्म होने के बाद 1 साल के लिए 100% टैरिफ वसूला जाएगा।

  3. अगस्त 2029 के बाद: कंपनियों द्वारा अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र न लगाने पर 200% का भारी पेनाल्टी टैरिफ लागू हो जाएगा।

नोट: पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं (Patented & Innovative Drugs) पर मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?

1. किसे होगा फायदा? (Winners)

  • अमेरिकी फार्मा मैन्यूफैक्चरर्स: अमेरिका के भीतर दवा निर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

  • लोकल अमेरिकन जॉब मार्केट: विनिर्माण संयंत्र स्थापित होने से अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

2. किसे हो सकता है नुकसान? (Losers & Risks)

  • अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली व मरीज: US Food and Drug Administration (US FDA) के अनुसार, अमेरिका में लिखे जाने वाले 90% से अधिक प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं। यदि कंपनियां 200% टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो अमेरिका में इलाज और दवाइयां बेहद महंगी हो जाएंगी।

  • विदेशी दवा आपूर्तिकर्ता (भारत और चीन): जिन कंपनियों की कुल कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी निर्यात से आता है, उनके मार्जिन पर 2028 के बाद भारी असर पड़ सकता है।

भारतीय दवा कंपनियों के लिए 2 साल की 'राहत' और चुनौती

भारत को दुनिया की "फार्मेसी" कहा जाता है। अमेरिकी फार्मेसियों में दी जाने वाली लगभग 40% से 47% जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियों द्वारा सप्लाई की जाती हैं। वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को $9.7 अरब डॉलर (करीब ₹80,000 करोड़) से अधिक की फार्मा एक्सपोर्ट की थी।

  • तत्काल राहत: सन फार्मा (Sun Pharma), डॉ. रेड्डीज (Dr. Reddy's), सिप्ला (Cipla), ल्यूपिन (Lupin), अरबिंदो फार्मा और जायडस लाइफसाइंसेज जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों के पास अपनी सप्लाई चेन, लोकल US प्लांट्स और निवेश रणनीतियों को नए सिरे से ढालने के लिए 2 साल (2026–2028) का समय है।

  • दीर्घकालिक रणनीति: भारतीय कंपनियों को या तो अमेरिका में अपनी उत्पादन क्षमता (US-based facilities) बढ़ानी होगी, या रणनीतिक साझेदारियों के जरिए अपनी लागत को समायोजित करना होगा।

Latest Posts