कराची के ऐतिहासिक मंदिर में गूंजे 'जय श्रीराम' के जयकारे, प्रांगण में सजा रणबीर कपूर की फिल्म 'रामायण' का भव्य पोस्टर
सरहदें इंसानों, मुल्कों और नक्शों को बांट सकती हैं, लेकिन सदियों पुरानी आस्था, सांस्कृतिक जड़ों और पौराणिक स्मृतियों की रूह को किसी सीमा रेखा में कैद करना नामुमकिन है। यह बात एक बार फिर उस वक्त सच साबित हो गई जब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची से एक ऐसा वीडियो और तस्वीर सामने आई, जिसने भारत, पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में रह रहे सनातनी समुदाय और सिनेमा प्रेमियों को हैरान और भावुक कर दिया। कराची के एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर के प्रांगण में न केवल श्रद्धा और उल्लास के साथ 'जय श्रीराम' के गगनभेदी नारे गूंजे, बल्कि मंदिर परिसर की प्रमुख दीवार पर बॉलीवुड निर्देशक नितेश तिवारी की बहुचर्चित आगामी मेगा बजट फिल्म 'रामायण' का एक विशाल पोस्टर भी पूरी श्रद्धा के साथ लगाया गया। भगवान श्रीराम के अलौकिक स्वरूप में नजर आ रहे अभिनेता रणबीर कपूर और माता जानकी के पावन रूप में सजी साई पल्लवी के इस पोस्टर को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु हाथ जोड़कर शीश नवाते और जयकारे लगाते दिखाई दिए। जैसे ही यह दृश्य कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर पहुंचा, देखते ही देखते इंटरनेट की दुनिया में भूचाल आ गया और सरहद के दोनों तरफ लोगों के बीच यह खबर चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई।
कराची की गलियों से उठी आस्था की गूंज: जब मंदिर प्रांगण में लगे 'जय श्रीराम' के नारे
पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची में दशकों से हिंदू समुदाय की एक उल्लेखनीय आबादी निवास करती है। हाल ही में किसी धार्मिक उत्सव और नियमित संध्या आरती के अवसर पर स्थानीय श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल हो रहे वीडियो फुटेज के अनुसार, मंदिर का माहौल पूरी तरह से भक्ति रस में डूबा हुआ था। धूप, अगरबत्ती, दीपों की रोशनी और घंटियों की मधुर ध्वनि के बीच अचानक पूरा परिसर 'सियावर रामचंद्र की जय' और 'जय श्रीराम' के नारों से गुंजायमान हो उठा। किसी इस्लामिक मुल्क के भीतर इतने खुले और निर्भीक अंदाज में अपने आराध्य के जयकारे लगाना और अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्व से व्यक्त करना कोई आम घटना नहीं है। मंदिर में मौजूद युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी पूरी तन्मयता के साथ भजन-कीर्तन में लीन थे। उपस्थित लोगों का कहना था कि भगवान राम किसी एक भौगोलिक क्षेत्र, देश या राजनीतिक दायरे के नहीं हैं, बल्कि वे पूरी मानवता के लिए मर्यादा, सत्य और धर्म के सर्वोच्च प्रतीक हैं। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू समुदाय के लिए प्रभु श्रीराम की कथा आज भी उनके अस्तित्व, उनकी परंपरा और उनके संस्कारों की सबसे बड़ी जीवनरेखा बनी हुई है।
ऐतिहासिक मंदिर और फिल्म 'रामायण' का पोस्टर: क्यों खास है यह दुर्लभ दृश्य?
कराची का स्वामीनारायण मंदिर परिसर और सोल्जर बाजार स्थित सदियों पुराना श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थल माने जाते हैं। इन्हीं में से एक मंदिर परिसर में जब श्रद्धालुओं ने निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' का भव्य पोस्टर लगाया, तो वहां का दृश्य देखने लायक था। इस पोस्टर में रणबीर कपूर प्रभु श्रीराम के वनवासी और मर्यादा पुरुषोत्तम रूप के एक शांत, सौम्य और तेजस्वी अवतार में दिखाई दे रहे हैं। मंदिर के सेवादारों और स्थानीय युवाओं ने इस पोस्टर को मंदिर की एक प्रमुख दीवार पर विधिवत स्थापित किया और उस पर पुष्पमालाएं अर्पित कीं। आमतौर पर किसी भी फिल्म का पोस्टर सिनेमाघरों, बिलबोर्ड्स या प्रचार के डिजिटल मंचों पर नजर आता है, लेकिन किसी मंदिर के गर्भगृह के निकट एक आधुनिक सिनेमाई पोस्टर का इस तरह पूजा जाना यह साबित करता है कि जनता के लिए यह केवल कोई साधारण बॉलीवुड फिल्म नहीं है, बल्कि उनकी सबसे गहरी आस्था का सजीव सिनेमाई प्रकटीकरण है। कराची के हिंदू युवाओं का मानना है कि लंबे समय के बाद भारतीय सिनेमा में इतने बड़े पैमाने पर उनकी सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसे लेकर वे भी उतने ही उत्साहित हैं जितना कि भारत या दुनिया के किसी अन्य कोने में बैठा कोई रामभक्त।
सिनेमा और संस्कृति की कोई सरहद नहीं: पाकिस्तान में भी 'रामायण' और रणबीर कपूर का जबर्दस्त क्रेज
भारतीय सिनेमा का प्रभाव पाकिस्तान के जनमानस पर हमेशा से बेहद गहरा रहा है। चाहे राज कपूर का दौर रहा हो या आज के दौर के सुपरस्टार्स, बॉलीवुड की कहानियां और संगीत पाकिस्तान के घरों में हमेशा से चाव से देखे और सुने जाते रहे हैं। लेकिन जब बात 'रामायण' जैसे कालजयी महाकाव्य की आती है, तो यह आकर्षण केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक आध्यात्मिक जुड़ाव का रूप ले लेता है। पाकिस्तान में रहने वाला हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय लंबे समय से मुख्यधारा के ऐसे कंटेंट की प्रतीक्षा कर रहा था जो उनकी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ सके। रणबीर कपूर, साई पल्लवी, केजीएफ स्टार यश (जो रावण की भूमिका निभा रहे हैं) और सनी देओल (जो हनुमान के किरदार में हैं) की इस फिल्म को लेकर कराची, लाहौर, हैदराबाद (सिंध) और रावलपिंडी के हिंदू परिवारों में जबरदस्त उत्सुकता है। मंदिर में पोस्टर लगाने वाले युवाओं का कहना था कि वे बेसब्री से उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब यह फिल्म पर्दे पर आएगी, ताकि वे अपने बच्चों को दिखा सकें कि उनके पूर्वजों का गौरव और उनका धर्म कितना महान और करुणामय रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो: सरहद के दोनों तरफ से आए भावुक रिएक्शन
इंटरनेट पर जैसे ही कराची के मंदिर में लगे जयकारों और 'रामायण' के पोस्टर की तस्वीरें और रील्स सामने आईं, यह तुरंत एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रेंड करने लगा। भारत के नेटिजन्स ने इस वीडियो पर बेहद भावुक और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। कई भारतीय यूजर्स ने लिखा कि प्रभु श्रीराम का नाम किसी पासपोर्ट या वीजा का मोहताज नहीं है, जहां भी उनके भक्त होंगे, वहां उनका नाम पूरी गरिमा के साथ गूंजेगा। लोगों ने कराची के हिंदू समुदाय के साहस, उनकी अटूट भक्ति और अपनी परंपरा को जिंदा रखने के जज्बे की दिल खोलकर तारीफ की। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान के कई उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष नागरिकों ने भी इस घटना का स्वागत किया और इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता का एक सुंदर उदाहरण बताया। पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि हमारे मुल्क के अल्पसंख्यकों को अपने धार्मिक स्थलों में अपने त्योहार और अपनी आस्था को इसी तरह मनाने की पूरी आजादी होनी चाहिए। हालांकि कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने इस पर असहजता भी जताई, लेकिन बहुसंख्यक प्रतिक्रियाएं प्रेम, सद्भाव और मानवीय एकता के पक्ष में ही नजर आईं।
अल्पसंख्यकों की आस्था और विरासत: कठिन हालात में भी सनातन परंपरा को संजोए हुए हैं श्रद्धालु
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय का जीवन कई तरह की सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक चुनौतियों से भरा रहा है। बंटवारे के दर्द और राजनीतिक तनाव के बावजूद सिंध और बलूचिस्तान के कई इलाकों में हिंदू परिवारों ने अपनी माटी और अपने पुरखों के मंदिरों को नहीं छोड़ा। कराची का यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि उस समुदाय के लिए एक ऐसा सुरक्षित ठिकाना है जहां वे अपनी भाषा, अपनी संस्कृति, अपने तीज-त्योहार और अपने देवी-देवताओं के साथ सुकून के कुछ पल बिताते हैं। इस मंदिर के प्रांगण में 'जय श्रीराम' के नारे लगना और 'रामायण' फिल्म के पोस्टर को सम्मान मिलना यह संदेश देता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सनातन धर्म की जड़ें उस मिट्टी में आज भी पूरी गहराई के साथ सांस ले रही हैं। यह घटना राजनीति और कूटनीति के तल्ख बयानों से कहीं ऊपर उठकर एक मानवीय और रूहानी सच्चाई को बयां करती है। जब भक्ति का दीया जलता है, तो सरहदों की दीवारें अपने आप धुंधली पड़ जाती हैं। कराची से आई यह गूंज आने वाले दिनों में और भी बड़े विमर्श को जन्म देगी, लेकिन फिलहाल इसने यह साबित कर दिया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम समय, भूगोल और राजनीति की हर बंदिश से परे एक शाश्वत सत्य है।