'रामायण' में रणबीर कपूर या यश नहीं, इस अभिनेता को देखने के लिए सबसे ज्यादा बेताब हैं सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा; बोले- 'वह मेरे छोटे भाई जैसा है और...'
बॉलीवुड के गलियारों में जब भी किसी महाकाव्य या ऐतिहासिक सिनेमाई परियोजना की चर्चा होती है, तो सबकी नजरें सिर्फ मुख्य सितारों और उनके भव्य किरदारों पर टिक जाती हैं। इन दिनों भारतीय सिनेमा का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' हर किसी की जुबान पर है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के रूप में रणबीर कपूर, माता जानकी के पावन स्वरूप में साई पल्लवी और लंकाधिपति रावण के खूंखार अंदाज में कन्नड़ सुपरस्टार यश की मौजूदगी ने इस फिल्म को लेकर देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक जबर्दस्त कौतूहल पैदा कर दिया है। हर कोई इन दिग्गज सितारों के आमने-सामने आने का इंतजार कर रहा है। लेकिन इस चकाचौंध भरी दुनिया के बीच, 'हिचकी' और 'महाराज' जैसी संवेदनशील और चर्चित फिल्मों के निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने हर सिनेप्रेमी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सिद्धार्थ ने साफ लफ्जों में कहा है कि वे 'रामायण' देखने के लिए बेहद उत्सुक हैं, लेकिन उनकी यह बेसब्री रणबीर कपूर या यश के लिए नहीं, बल्कि उस अभिनेता के लिए है जिसे वे अपने सगे छोटे भाई से कम नहीं मानते। यह अभिनेता कोई और नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के छोटे भाई और अनुज लक्ष्मण का पावन किरदार निभा रहे बहुमुखी कलाकार रवि दुबे हैं।
न रणबीर, न यश: जानिए किस अभिनेता के लिए धड़क रहा है सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा का दिल?
नितेश तिवारी की 'रामायण' की जबसे घोषणा हुई है, तबसे हर किरदार की कास्टिंग को लेकर इंडस्ट्री में कड़े कयास लगाए जा रहे थे। जब यह खबर आधिकारिक रूप से सामने आई कि टेलीविजन और ओटीटी की दुनिया में अपनी बेमिसाल अदाकारी का लोहा मनवा चुके अभिनेता रवि दुबे को भगवान लक्ष्मण के अहम और भावनात्मक किरदार के लिए चुना गया है, तो उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा से 'रामायण' को लेकर उनकी उम्मीदों और उत्साह पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी और गर्मजोशी से अपनी बात रखी। सिद्धार्थ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि रणबीर कपूर हमारे देश के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में से एक हैं और यश जब पर्दे पर आते हैं तो एक अलग ही ऊर्जा पैदा कर देते हैं। लेकिन एक निर्देशक और एक दर्शक के तौर पर, उनके दिल के सबसे करीब जो किरदार देखने की लालसा है, वह रवि दुबे का लक्ष्मण रूप है। सिद्धार्थ के मुताबिक, लक्ष्मण का चरित्र केवल एक सहयोगी पात्र नहीं है, बल्कि वह रामायण की वह रीढ़ है जिस पर त्याग, क्रोध, निष्ठा और भ्रातृत्व प्रेम का पूरा भार टिका होता है।
'वह सिर्फ कलाकार नहीं, मेरा छोटा भाई है': सालों पुरानी आत्मीय बॉन्डिंग और पर्दे के पीछे का रिश्ता
सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा और रवि दुबे के बीच का रिश्ता किसी पेशेवर औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेहद गहरा, आत्मीय और पारिवारिक संबंध है। सिद्धार्थ मल्होत्रा भारतीय टेलीविजन और सिनेमा दोनों ही माध्यमों में एक लंबा और सम्मानित सफर तय कर चुके हैं। टीवी जगत के अपने लंबे दौर के दौरान सिद्धार्थ ने कई कलाकारों को निखरते और बड़े मुकाम तक पहुंचते देखा है, लेकिन रवि दुबे के साथ उनका जुड़ाव हमेशा से बेहद खास रहा है। सिद्धार्थ ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि वे रवि को पिछले कई सालों से बहुत करीब से जानते हैं। वे केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं हैं, बल्कि एक बेहद सच्चे, नेक दिल और जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। सिद्धार्थ ने भावुक होते हुए कहा कि रवि उनके लिए बिल्कुल उनके छोटे भाई जैसे हैं। जब आपका कोई अपना, जिसने वर्षों तक अपनी मेहनत, पसीने और लगन से इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई हो, भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर इतने ऐतिहासिक किरदार में उतरता है, तो एक बड़े भाई के रूप में जो गर्व और खुशी महसूस होती है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सिद्धार्थ ने कहा कि वे जब भी रवि को इस प्रोजेक्ट की तैयारी करते देखते हैं, तो उनकी छाती चौड़ी हो जाती है।
लक्ष्मण का किरदार और रवि दुबे का समर्पण: टीवी से महाकाव्य के बड़े कैनवास तक का सफर
टेलीविजन पर 'जमाई राजा', '12/24 करोल बाग' जैसे सुपरहिट शोज से लेकर ओटीटी की दुनिया में 'मत्स्य कांड' और 'लखन लीला भार्गव' जैसी सीरीज में अपनी अदाकारी का परचम लहराने वाले रवि दुबे ने कभी खुद को किसी तय सांचे में सीमित नहीं रखा। वे एक उम्दा अभिनेता होने के साथ-साथ एक सफल निर्माता और लेखक के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। लेकिन जब नितेश तिवारी ने उन्हें 'रामायण' में लक्ष्मण के किरदार के लिए चुना, तो रवि ने इसके लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। सूत्रों की मानें तो इस किरदार में ढलने के लिए रवि दुबे ने न केवल अपनी शारीरिक बनावट में व्यापक बदलाव किए हैं, बल्कि उन्होंने प्राचीन भारतीय संवाद अदायगी, संस्कृत निष्ठ हिंदी के उच्चारण और धनुर्विद्या की विशेष ट्रेनिंग भी ली है। सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने रवि की इसी कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा की। सिद्धार्थ ने कहा कि रवि एक ऐसे अभिनेता हैं जो किसी किरदार को सिर्फ निभाते नहीं हैं, बल्कि उसके भीतर उतरकर अपनी रूह तक को उसके हवाले कर देते हैं। लक्ष्मण का चरित्र क्रोध और करुणा का एक दुर्लभ संगम है, जहां उन्हें अपने बड़े भाई के अपमान पर आगबबूला भी होना होता है और माता जानकी व प्रभु राम के चरणों में अपना सर्वस्व न्योछावर भी करना होता है। सिद्धार्थ का मानना है कि रवि के भीतर वह संवेदनशीलता और रेंज मौजूद है जो इस किरदार को अमर बना सकती है।
स्टारडम की चमक के बीच क्यों खास है लक्ष्मण की भूमिका? मर्यादा और निष्ठा की अमर गाथा
आमतौर पर रामायण के किसी भी रूपांतरण में सारा ध्यान प्रभु श्रीराम और रावण के महायुद्ध पर केंद्रित रहता है। लेकिन यदि गहराई से देखा जाए, तो रामायण की आत्मा भाई के उस निःस्वार्थ प्रेम में बसती है जहां लक्ष्मण बिना किसी अपराध के, बिना किसी राज्याभिषेक की लालसा के, केवल अपने भ्राता के साथ वनवास की कठिन राह चुन लेते हैं। लक्ष्मण का त्याग किसी भी मायने में कम नहीं है, जिन्होंने चौदह वर्षों तक अपनी नींद, अपना सुख और अपनी पत्नी उर्मिला से दूरी को सिर्फ प्रभु राम की सेवा के लिए स्वीकार किया था। सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा का कहना है कि जब पर्दे पर रणबीर कपूर और रवि दुबे एक साथ राम और लक्ष्मण के रूप में खड़े होंगे, तो दर्शकों को वही प्राचीन और अलौकिक भ्रातृ-प्रेम महसूस होना चाहिए जो हमारी संस्कृति का मूल आधार है। सिद्धार्थ ने विश्वास जताया कि रणबीर की शांत और गंभीर अभिनय शैली के सामने रवि दुबे का तीव्र, ऊर्जावान और वफादार लक्ष्मण का रूप एक ऐसा संतुलन बनाएगा जो फिल्म को भावनात्मक रूप से बेहद शक्तिशाली बना देगा। बड़े-बड़े वीएफएक्स और सेट्स अपनी जगह काम करेंगे, लेकिन जब तक किरदारों के बीच की मानवीय भावनाएं दर्शकों की आंखों को नम न कर दें, तब तक कोई भी महाकाव्य सफल नहीं हो सकता, और रवि दुबे इस भावनात्मक कड़ी को मजबूती से थामने का माद्दा रखते हैं।
2026 की सबसे बड़ी सिनेमाई उम्मीद: जब बड़े पर्दे पर उतरेगी इतिहास की सबसे भव्य गाथा
नितेश तिवारी की 'रामायण' को लेकर पूरे देश में जिस तरह का माहौल बना हुआ है, वह साफ दर्शाता है कि दर्शक अपनी आस्था और सांस्कृतिक धरोहर को एक बेहद गरिमामयी और भव्य रूप में देखने के लिए बेताब हैं। इस फिल्म में सनी देओल भगवान हनुमान के रूप में, लारा दत्ता कैकेयी के रूप में और अरुण गोविल राजा दशरथ के रूप में नजर आने वाले हैं, जिससे इसकी कास्टिंग अपने आप में एक मिसाल बन चुकी है। ऐसे में सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा जैसे संजीदा फिल्मकार का रवि दुबे के समर्थन में खुलकर आना और उन्हें देखने की बेताबी जाहिर करना, यह रेखांकित करता है कि फिल्म उद्योग के भीतर भी सच्ची प्रतिभा और समर्पण को कितना बड़ा मान दिया जाता है। सिद्धार्थ ने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि वे फिल्म के रिलीज होने के पहले दिन, पहले शो में केवल इसलिए थिएटर में बैठेंगे ताकि वे अपने छोटे भाई को इतिहास रचते देख सकें। एक बड़े भाई की यह दुआ और अटूट विश्वास निश्चित रूप से रवि दुबे के लिए एक बहुत बड़ी ताकत साबित होगा, और जब सिनेमाघरों के विशाल पर्दे पर लक्ष्मण के रूप में उनकी गर्जना गूंजेगी, तो वह लम्हा न सिर्फ रवि के लिए बल्कि उन सभी लोगों के लिए बेहद भावुक होगा जिन्होंने उन्हें शून्य से शिखर तक पहुंचते देखा है।