करवाचौथ पर 'रामायण' के नए गाने 'जुड़ी जोड़ी' ने जीता दिल, लेकिन 3 घंटे 15 मिनट के रनटाइम पर भड़के या खुश हुए फैंस
सनातन आस्था, भारतीय संस्कृति और सिनेमा के सबसे बड़े महाकाव्य को पर्दे पर साकार करने की दिशा में निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' हर दिन एक नया मील का पत्थर तय कर रही है। देशभर में करवाचौथ के पावन पर्व, सुहाग की मंगलकामनाओं और छलनी से चांद देखने की रस्मों के बीच मेकर्स ने दर्शकों को एक ऐसा आध्यात्मिक और भावनात्मक तोहफा दिया है, जिसने हर किसी की आंखें नम और दिल भक्ति-भाव से सराबोर कर दिया है। करवाचौथ की शाम फिल्म का बेहद खूबसूरत, सौम्य और अलौकिक गीत 'जुड़ी जोड़ी' रिलीज कर दिया गया। प्रभु श्रीराम के रूप में रणबीर कपूर और माता सीता के पावन स्वरूप में साई पल्लवी की दिव्य झलक ने सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर तहलका मचा दिया है। मिथिला और अयोध्या की पावन परंपरा, विवाह के वचनों और अटूट प्रेम को दर्शाता यह गीत जहां एक तरफ लाखों घरों में करवाचौथ के उत्सव का सबसे सुरीला संगीत बन गया है, वहीं दूसरी तरफ इस गाने के आते ही दर्शकों के बीच फिल्म की लंबाई यानी 3 घंटे 15 मिनट (195 मिनट) के संभावित रनटाइम को लेकर एक बहुत बड़ी बहस भी छिड़ गई है। दर्शक अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि जब फिल्म सवा तीन घंटे की है, तो उसमें गीतों, भव्य दृश्यों और कथा के मूल संघर्ष को किस अनुपात में जगह दी जाएगी।
करवाचौथ पर राम-सीता के अलौकिक प्रेम का उत्सव: क्या है नए गाने 'जुड़ी जोड़ी' में खास?
करवाचौथ के दिन रिलीज हुए 'जुड़ी जोड़ी' गाने की हर एक फ्रेम में भारतीय संस्कृति की सादगी, मर्यादा और गरिमा साफ झलक रही है। आमतौर पर बॉलीवुड में त्योहारों पर रिलीज होने वाले गानों में जहां तड़क-भड़क, तेज बीट्स और आधुनिक ग्लैमर का सहारा लिया जाता है, वहीं नितेश तिवारी और ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने इस गीत को पूरी तरह शास्त्रीय रागों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और रूहानी अहसास से सजाया है। गाने में प्रभु श्रीराम और जानकी के विवाह के बाद के उन सुकोमल क्षणों को पिरोया गया है, जहां दोनों का मिलन केवल दो शरीरों का नहीं, बल्कि दो दिव्य आत्माओं का एकाकार होना प्रतीत होता है। साई पल्लवी की आंखों की सादगी, उनका लजीला अंदाज और पारंपरिक भारतीय परिधान में उनका ग्रेस हर दर्शक को भाव-विभोर कर रहा है। वहीं रणबीर कपूर के चेहरे का शांत तेज और मर्यादा पुरुषोत्तम की सौम्यता ने यह साबित कर दिया है कि उन्होंने इस किरदार को जीने के लिए कितनी गहरी साधना की है। दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, जयपुर और पटना जैसे शहरों में करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं ने इस गाने को अपने स्टेटस और सोशल मीडिया पोस्ट्स का मुख्य बैकग्राउंड स्कोर बना लिया है।
'3 घंटे 15 मिनट की फिल्म में...': सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी गाने और रनटाइम को लेकर बहस?
जैसे ही गाना रिलीज हुआ और इसकी अवधि सामने आई, सोशल मीडिया के गलियारों में फिल्म के समग्र रनटाइम को लेकर अटकलें तेज हो गईं। ट्रेड एनालिस्ट्स और इनसाइडर रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर पहले ही आ चुकी है कि नितेश तिवारी की 'रामायण: पार्ट 1' लगभग 3 घंटे 15 मिनट की होने वाली है। अब सोशल मीडिया पर सिनेमा प्रेमियों के बीच दो स्पष्ट गुट बन गए हैं। कुछ नेटिजन्स ने कमेंट करते हुए चुटकी ली और लिखा कि '3 घंटे 15 मिनट की फिल्म है, उसमें भी अगर मेकर्स 6-7 लंबे-लंबे गाने और विवाह के विस्तृत अनुष्ठान ही दिखाते रहेंगे, तो फिर मूल रामायण की कथा, ताड़का वध, अहल्या उद्धार, जनक की प्रतिज्ञा और वनवास के महाप्रस्थान को कितना समय मिलेगा?' एक यूजर ने लिखा कि आज के दौर में जब दर्शकों का अटेंशन स्पैन कम हो चुका है, सवा तीन घंटे की फिल्म में कहानी की रफ्तार सुस्त नहीं पड़नी चाहिए। लोगों का तर्क है कि पार्ट 1 में अगर बहुत अधिक समय केवल रोमांस और पारिवारिक गीतों में बिता दिया गया, तो दर्शकों का रोमांच कम हो सकता है।
प्रशंसकों का पलटवार: 'बिना राम-जानकी के मिलन के वनवास के वियोग का दर्द कैसे समझोगे?'
हालांकि, आलोचनाओं और आशंकाओं के इस दौर में फिल्म के पक्ष में खड़े दर्शकों की संख्या कहीं ज्यादा बड़ी है। लाखों सिनेमा प्रेमियों और श्रीराम के भक्तों ने रनटाइम पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब दिया है। प्रशंसकों का कहना है कि रामायण कोई दो घंटे की साधारण एक्शन-थ्रिलर फिल्म नहीं है, जिसे जल्दबाजी में निपटा दिया जाए। रामायण की आत्मा ही भगवान राम और माता सीता के अलौकिक प्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा में बसती है। यदि दर्शक पहले भाग में राम और जानकी के उस गहरे, निष्कपट और आत्मीय जुड़ाव को महसूस ही नहीं करेंगे, तो जब चौदह वर्ष का वनवास होगा और जब लंकापति रावण द्वारा माता सीता का हरण होगा, तब उस बिछोह और तड़प का दर्द दर्शकों के दिलों को कैसे छू पाएगा? सिनेमा विशेषज्ञों का भी मानना है कि 3 घंटे 15 मिनट का समय एक महाकाव्य के पहले भाग के लिए एकदम सटीक है, क्योंकि इसमें निर्देशक को हर पात्र की पृष्ठभूमि, अयोध्या का वैभव, मिथिला का वात्सल्य और गुरु वशिष्ठ व विश्वामित्र के आश्रमों की शांति को विस्तार से दिखाने का पूरा मौका मिलता है।
ए.आर. रहमान और हैंस ज़िमर की जुगलबंदी: भक्ति रस में डूबी धुनें
'जुड़ी जोड़ी' गीत केवल दृश्यों की वजह से ही नहीं, बल्कि अपने अप्रतिम संगीत की वजह से भी अमर होने की राह पर है। ए.आर. रहमान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, शहनाई, बांसुरी और मृदंगम की ऐसी त्रिवेणी रची है जो सीधे हृदय के तारों को छूती है। सूत्रों के मुताबिक, फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर पर हॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार हैंस ज़िमर काम कर रहे हैं, लेकिन जब बात भारतीय संस्कृति के मर्म और मांगलिक गीतों की आई, तो रहमान ने अपनी पूरी रूह झोंक दी। गीत के बोल विशुद्ध हिंदी और अवधी के सहज संगम से तैयार किए गए हैं, जो कानों में पड़ते ही एक पवित्र मंदिर के प्रांगण जैसी शांति का अनुभव कराते हैं। करवाचौथ के दिन इस गीत को उतारकर मेकर्स ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वे केवल युवा दर्शकों को ही नहीं, बल्कि भारत के पारंपरिक पारिवारिक दर्शकों को सीधे सिनेमाघरों तक खींचने की सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहे हैं।
क्या रनटाइम बनेगा 'रामायण' की सबसे बड़ी ताकत?
हाल के वर्षों में भारतीय सिनेमा के बॉक्स ऑफिस ट्रेंड को देखा जाए तो यह साफ हो चुका है कि अगर कंटेंट में दम हो, तो फिल्म की लंबाई कभी रुकावट नहीं बनती। 'आरआरआर', 'बाहुबली 2' और 'एनिमल' जैसी सवा तीन घंटे से लंबी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई करके साबित किया है कि दर्शक सिनेमा हॉल में एक पूरी दुनिया का अनुभव करने आते हैं। नितेश तिवारी एक ऐसे निर्देशक हैं जो भावनाओं की नब्ज पकड़ना जानते हैं, जैसा उन्होंने 'दंगल' और 'छिछोरे' में कर दिखाया था। 'रामायण' के मामले में भी 195 मिनट का यह विशाल कैनवास किसी जल्दबाजी का शिकार होने के बजाय हर दृश्य को पूरी गहराई और ठहराव के साथ पेश करेगा। 'जुड़ी जोड़ी' गाने ने करवाचौथ के त्योहार की मिठास को दोगुना करते हुए यह साबित कर दिया है कि यह फिल्म सिर्फ एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का सजीव प्रतिबिंब बनने जा रही है। अब दर्शकों को उस दिन का बेसब्री से इंतजार है जब सिनेमाघरों के विशाल पर्दे पर यह अमर गाथा पूरी भव्यता के साथ अवतरित होगी।