रणबीर कपूर की ‘रामायण’ में यश का रौद्र रूप, आंखों में अहंकार और आवाज में दमखम, हर सीन में भारी पड़े रावण

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ में यश का रौद्र रूप, आंखों में अहंकार और आवाज में दमखम, हर सीन में भारी पड़े रावण

भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे बड़े और भव्य प्रोजेक्ट्स की बात होगी, तो निर्देशक नितेश तिवारी की आगामी मेगा-बजट फिल्म 'रामायण' का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। पौराणिक गाथाओं पर आधारित इस महाकाव्य में जहां एक तरफ रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की शांत और सौम्य भूमिका में नजर आने वाले हैं, वहीं दूसरी तरफ कन्नड़ सिनेमा के 'रॉकिंग स्टार' यश लंकापति रावण के कालजयी चरित्र को जीवंत कर रहे हैं। फिल्म के सेट और स्पेशल स्क्रीनिंग्स से छनकर आ रही खबरों ने पूरे देश के सिनेप्रेमियों के बीच भारी खलबली मचा दी है। सेट से जुड़े अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पर्दे पर यश का जो रौद्र रूप और प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। उनकी आंखों में झलकता दसों दिशाओं को जीतने वाला अहंकार और भारी-भरकम कड़क आवाज का दमखम ऐसा है कि वे हर एक फ्रेम में दूसरे किरदारों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पर्दे पर राम और रावण का यह महामुकाबला भारतीय सिनेमा का अब तक का सबसे बड़ा विजुअल स्पेक्टेकल साबित होने जा रहा है।

रावण का अकल्पनीय रौद्र अवतार और स्क्रीन प्रेजेंस का जादू

केजीएफ (KGF) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से अपनी खास स्क्रीन प्रेजेंस और जानदार संवाद अदायगी का लोहा मनवा चुके अभिनेता यश ने रावण के किरदार को केवल निभाया नहीं है, बल्कि उसमें पूरी तरह समा गए हैं। प्राचीन ग्रंथों में रावण के जिस विद्वान, महाज्ञानी और साथ ही अति-अहंकारी रूप का वर्णन मिलता है, उसे पर्दे पर उतारने के लिए यश ने अपने लुक, बॉडी लैंग्वेज और आवाज के मॉड्यूलेशन पर महीनों तक कड़ी मेहनत की है। जब विशालकाय लंका के महल में सोने के सिंहासन पर आसीन रावण के रूप में यश की एंट्री होती है, तो उनकी विशालकाय देहभाषा और चेहरे पर छाई एक अजेय योद्धा की चमक दर्शकों को स्तब्ध कर देती है। उनकी चाल-ढाल में एक चक्रवर्ती सम्राट की ठसक साफ झलकती है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक के सिनेमाई इतिहास में रावण के इस तरह के आधुनिक, भव्य और खतरनाक रूप को आज से पहले कभी नहीं देखा गया है, जो इस फिल्म का सबसे बड़ा यूएसपी (USP) बनने वाला है।

आंखों में भरा प्रचंड अहंकार और हर संवाद में गरजती आवाज

रावण केवल एक खलनायक नहीं, बल्कि तीनों लोकों को अपने तपोबल से हिला देने वाला एक महान पंडित और शिव भक्त भी था। उसके इस बहुआयामी व्यक्तित्व को उभारने के लिए यश ने अपनी आंखों के भावों पर विशेष काम किया है। जब वे स्क्रीन पर बिना बोले केवल अपनी आंखों से घूरते हैं, तो सामने खड़े चरित्र की रूह कांप जाती है। उनकी संवाद अदायगी में ऐसा भारीपन और इको (Echo) है कि उनका बोला गया हर एक शब्द सीधे थिएटर की दीवारों और दर्शकों के दिलों से टकराता है। शास्त्रों और वेदों के ज्ञान से भरे घमंड को जिस खूबसूरती से यश ने अपने संवादों में पिरोया है, वह यह साबित करता है कि वे इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए बिल्कुल सही पसंद हैं। जब-जब वे पर्दे पर गरजते हैं, तो ऐसा लगता है मानो सचमुच कोई पौराणिक शक्ति स्क्रीन से बाहर निकलकर आ गई हो।

राम और रावण का ऐतिहासिक महासंग्राम: हर सीन में यश की मजबूत पकड़

फिल्म 'रामायण' की सबसे बड़ी ताकत राम और रावण के बीच का वैचारिक और शक्ति का संतुलन है। अगर राम मर्यादा और धर्म के प्रतीक हैं, तो रावण शक्ति और अधर्म के दंभ का पर्याय है। फिल्म के जो प्रमुख दृश्य (High-Octane Scenes) सामने आए हैं, उनमें रणबीर कपूर के शांत व गंभीर रूप के सामने यश का उग्र और आक्रामक रूप जबरदस्त कंट्रास्ट पैदा करता है। युद्ध के मैदान में जब दोनों महाशक्तियां आमने-सामने आती हैं, तो यश का अभिनय इतना दमदार और भारी दिखाई देता है कि कुछ पलों के लिए दर्शक भी उनके खौफनाक प्रभाव के सम्मोहन में बंध जाते हैं। सेट पर मौजूद तकनीशियनों और क्रू मेंबर्स के अनुसार, यश के सीन्स की शूटिंग के दौरान पूरा सेट तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था क्योंकि उन्होंने हर टेक में अपना दो सौ प्रतिशत योगदान दिया है।

विश्व स्तरीय वीएफएक्स और आधुनिक तकनीक से सजा लंका का साम्राज्य

नितेश तिवारी और उनकी अंतरराष्ट्रीय वीएफएक्स (VFX) टीम ने यश के रावण वाले सीन्स को दुनिया के सबसे बेहतरीन सिनेमाई मानकों पर तैयार किया है। रावण की पुष्पक विमान की उड़ान, शिव तांडव स्तोत्र का वाचन और लंकापति का राजदरबार बनाने में जिस तरह के विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल हुआ है, वह हॉलीवुड की बड़ी से बड़ी फैंटेसी फिल्मों को कड़ी टक्कर देता नजर आ रहा है। यश का भारी-भरकम आभामंडल और उसके साथ वीएफएक्स का यह बेजोड़ मेल दर्शकों को एक अलग ही पौराणिक दुनिया में ले जाता है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि यश की यह परफॉर्मेंस न केवल उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ मील का पत्थर बनेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा को एक नई ऊंचाई और पहचान दिलाने का काम भी करेगी।