भारत के लिए न्यूजीलैंड से आई बड़ी खुशखबरी: संसद से पास हुआ ऐतिहासिक FTA कानून, 100% भारतीय उत्पादों को मिलेगी जीरो-टैक्स एंट्री
वैश्विक व्यापार और भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड से बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) को लागू करने वाले कानून को औपचारिक रूप से अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। संसद में इस ऐतिहासिक विधेयक के पक्ष में 93 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल 29 वोट आए। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे 'पीढ़ी में एक बार होने वाला' (Once-in-a-generation) ऐतिहासिक समझौता करार दिया है।
इस संसदीय मंजूरी के बाद अब यह बहुप्रतीक्षित व्यापारिक समझौता जमीन पर उतरने के बेहद करीब पहुंच गया है। समझौते के तहत सबसे बड़ा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यातकों को होने जा रहा है, क्योंकि न्यूजीलैंड में प्रवेश करने वाले 100 फीसदी भारतीय उत्पादों पर सीमा शुल्क (टैक्स/ड्यूटी) पूरी तरह शून्य हो जाएगा।
100% भारतीय निर्यात पर जीरो टैक्स: किन सेक्टरों की चमकेगी किस्मत?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके प्रभावी होते ही न्यूजीलैंड अपने सभी टैरिफ लाइन्स (टैरिफ श्रेणियों) पर भारतीय सामानों को ड्यूटी-फ्री (Duty-Free) पहुंच प्रदान करेगा:
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कपड़ा और परिधान (Textiles & Apparel): पहले भारतीय रेडीमेड कपड़ों और टेक्सटाइल पर 5 से 10% तक का टैरिफ लगता था, जो अब घटकर 0% हो जाएगा। इससे भारत के कपड़ा उद्योग और महिला श्रमिकों से जुड़े एमएसएमई को भारी बढ़ावा मिलेगा।
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चमड़ा और फुटवियर (Leather & Footwear): जूते, बैग, बेल्ट और तैयार चमड़े के उत्पादों पर लगने वाला 10% तक का टैक्स पूरी तरह खत्म होगा।
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इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो पार्ट्स: भारतीय ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, मशीनरी, इंडस्ट्रियल टूल्स और स्टील-एल्युमिनियम उत्पादों को न्यूजीलैंड के 23 अरब डॉलर से बड़े इंजीनियरिंग बाजार में सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी।
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फार्मास्यूटिकल्स और जेनेरिक दवाएं: भारतीय जीवनरक्षक जेनेरिक दवाएं, मेडिकल डिवाइसेज और आयुष (AYUSH) उत्पाद अब बिना किसी आयात शुल्क के वहां बिक सकेंगे।
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कृषि और समुद्री उत्पाद (Marine & Agri): झींगा, प्रोसेस्ड सीफूड, बासमती चावल, मसाले, चाय और प्रोसेस्ड फूड्स पर लगने वाली 5% तक की ड्यूटी समाप्त हो जाएगी।
15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश और 'वर्किंग हॉलिडे वीजा'
यह समझौता केवल सामानों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने भारत में भारी विदेशी निवेश और युवाओं के लिए नए रास्ते भी खोल दिए हैं:
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$20 Billion Investment: एफटीए के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर (लगभग 1.68 लाख करोड़ रुपये) के रणनीतिक निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
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भारतीय युवाओं के लिए वीजा छूट: इस समझौते के तहत हर साल 1,000 योग्य भारतीय युवाओं को 'वर्किंग हॉलिडे वीजा' (Working Holiday Visa) दिया जाएगा, जिसके जरिए वे 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहकर काम और पढ़ाई कर सकेंगे।
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पारंपरिक चिकित्सा और सेवाएं: न्यूजीलैंड ने पहली बार 118 से अधिक सेवा क्षेत्रों (Services) में भारतीय प्रोफेशनल्स (आईटी, योग, वेलनेस और आयुर्वेद) के लिए वीजा और वर्क परमिट के नियमों को उदार बनाया है।
भारत ने अपने किसानों और डेयरी सेक्टर को रखा पूरी तरह सुरक्षित
मुफ्त व्यापार समझौते के तहत भारत ने भी न्यूजीलैंड के लगभग 95% द्विपक्षीय व्यापार मूल्य पर टैरिफ में क्रमिक कटौती की पेशकश की है। हालांकि, भारत सरकार ने अपने करोड़ों घरेलू किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया है:
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डेयरी सेक्टर बाहर: दूध, पनीर, मक्खन, दही और अन्य डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से टैरिफ छूट की सूची से बाहर (Exclusion List) रखा गया है, ताकि अमूल और भारतीय दुग्ध उत्पादकों के बाजार पर कोई असर न पड़े।
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संवेदनशील कृषि उत्पाद: दालें, सोयाबीन, प्याज, मक्का और चीनी जैसी फसलों को भी विदेशी आयात से सुरक्षित रखा गया है।
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केवल कीवी, सेब और मानुका शहद जैसे चुनिंदा प्रीमियम फलों के लिए नियंत्रित कोटा (Tariff-Rate Quotas) के तहत सीमित बाजार पहुंच दी गई है।
कब से लागू होगा यह ऐतिहासिक समझौता?
न्यूजीलैंड की संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद अब औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, दोनों देश अपनी आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कर रहे हैं।
वाणिज्य सचिव के मुताबिक, भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अक्टूबर 2026 के दूसरे पखवाड़े तक पूरी तरह से लागू (Operational) हो सकता है। यह समझौता ओशिनिया और प्रशांत द्वीप देशों के बड़े बाजार में भारत के आर्थिक प्रभाव को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।