'E20 पेट्रोल से मेरा कोई वास्ता नहीं': नितिन गडकरी ने बॉम्बे HC में ठोका ₹11 करोड़ का मानहानि केस, गूगल-मेटा और इस मंत्रालय को बनाया आरोपी
देश भर में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) को लेकर जारी विवाद और सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे फर्जी अभियानों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सख्त रुख अपनाया है। गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में गूगल, मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) और एक्स (X) जैसी दिग्गज सोशल मीडिया कंपनियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग के खिलाफ ₹11 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने इस सिविल सूट को स्वीकार कर लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की मुख्य सुनवाई जस्टिस आरिफ डॉक्टर की अदालत में होगी।
'E20 नीति से मेरा या मेरे मंत्रालय का कोई संबंध नहीं'
अपनी याचिका में नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर E20 ईंधन नीति को लेकर उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाना पूरी तरह से तथ्यहीन और भ्रामक है।
गडकरी की मुख्य दलील:
"इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) पूरी तरह से 'पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय' (MoPNG) की नीति है। सड़क परिवहन मंत्रालय का इसके वित्तीय, प्रशासनिक या रेगुलेटरी पहलुओं से कोई लेना-देना नहीं है। E20 नीति का रोडमैप 2003 में ही तैयार होना शुरू हो गया था, जिसे चरणबद्ध तरीके से 2025-26 तक लागू किया जा रहा है।"
बेटे पर लगे वित्तीय फायदों के आरोपों को बताया 'दस्तावेजी झूठ'
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई रील्स और पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि E20 नीति से गडकरी के बेटे निखिल गडकरी की कंपनी CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंच रहा है।
गडकरी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे 'दस्तावेजी झूठ' और अपनी राजनीतिक छवि को धूमिल करने का सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने याचिका में एआई (AI) जेनरेटेड इमेज, वॉइस-क्लोनिंग और डीपफेक फेस-स्वैप वाले 26 विशिष्ट मीडिया लिंक्स का ब्योरा दिया है। गडकरी ने साफ किया कि वे स्वस्थ और वास्तविक राजनीतिक आलोचना का स्वागत करते हैं, लेकिन डीपफेक और अभद्र भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
किन-किन के खिलाफ दर्ज हुआ है मुकदमा?
गडकरी द्वारा दायर सिविल मानहानि याचिका में निम्नलिखित को पक्षकार (Defendants) बनाया गया है:
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टेक दिग्गज: मेटा (फेसबुक व इंस्टाग्राम), एक्स (ट्विटर), गूगल व यूट्यूब।
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सरकारी विभाग: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एवं दूरसंचार विभाग।
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जॉन डो (John Doe): ऐसे अज्ञात इंटरनेट यूजर्स जो संगठित रूप से यह भ्रामक कंटेंट फैला रहे हैं।
क्या है E20 पेट्रोल विवाद और क्यों भड़के हैं वाहन मालिक?
| पहलू | विवरण |
| क्या है E20? | 80% सामान्य पेट्रोल और 20% इथेनॉल का मिश्रण। |
| सरकार का लक्ष्य | कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू बायोफ्यूल को बढ़ावा देना। |
| उपयोगकर्ताओं की चिंताएं | 2023 से पहले बनी पुरानी गाड़ियों के इंजन कंपोनेंट्स में जंग लगना और माइलेज का कम होना। |
वाहन चालकों का आरोप है कि बिना पुरानी गाड़ियों की अनुकूलता (Engine Compatibility) का ध्यान रखे E20 ईंधन बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है। सोशल मीडिया पर इसी असंतोष का फायदा उठाकर गडकरी को इसका मुख्य सूत्रधार बताकर निशाना बनाया जा रहा था।