मिठाई नहीं मोमबत्ती है...₹50 में सजेगी मकान, वाराणसी के बाजार में फैंसी दीयों की डीमांड

मिठाई नहीं मोमबत्ती है...₹50 में सजेगी मकान, वाराणसी के बाजार में फैंसी दीयों की डीमांड

दिवाली और देव दीपावली का पावन अवसर नजदीक आते ही धर्म नगरी वाराणसी के पारंपरिक बाजारों में एक अलग ही रंगत देखने को मिल रही है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के लंका, गोदौलिया, चौक और मैदागिन जैसे प्रमुख बाजारों में इन दिनों त्योहारी खरीदारी के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस बार बाजारों में जो चीज हर किसी का ध्यान सबसे ज्यादा अपनी ओर खींच रही है, वह है बेहद अनोखी और आकर्षक डिजाइनर मिठाइयों के आकार में बनी मोमबत्तियां और फैंसी मिट्टी के दीये। पहली नजर में देखने पर कोई भी धोखा खा सकता है कि ये काजू कतली, मोतीचूर के लड्डू, इमरती और कलाकंद जैसी स्वादिष्ट मिठाइयां रखी हुई हैं, लेकिन असल में ये कलात्मक ढंग से ढली मोमबत्तियां हैं जो रोशनी से आपके घर के हर कोने को रोशन करने के लिए तैयार हैं। महज ₹50 की किफायती शुरुआती कीमत में मिल रही इन मोमबत्तियों और फैंसी दीयों ने पूरे बनारस के बाजार में धूम मचा रखी है और ग्राहकों के बीच इनकी जबर्दस्त मांग देखी जा रही है।

काशी के बाजारों में 'स्वीट कैंडल' का क्रेज और ग्राहकों की पहली पसंद

वाराणसी के स्थानीय हस्तशिल्पकारों और मोमबत्ती निर्माताओं ने इस त्योहार पर कुछ नया और रचनात्मक पेश करने के उद्देश्य से मिठाई के आकार वाली ये खास 'स्वीट कैंडल्स' बाजार में उतारी हैं। गोदौलिया बाजार के प्रमुख व्यापारियों का कहना है कि लोग इस बार पारंपरिक मोमबत्तियों और साधारण दीयों से इतर कुछ ऐसा ढूंढ रहे थे जो उनके घर की सजावट को अनोखा और शाही लुक दे सके। इन मोमबत्तियों की बनावट इतनी बारीक और खूबसूरत है कि थाली या बाउल में सजाकर रखने पर ये असली मिठाइयों जैसी प्रतीत होती हैं। इनकी खासियत केवल इनका रूप ही नहीं है, बल्कि जलने पर इनसे उठने वाली हल्की और मनमोहक सुगंध पूरे घर के वातावरण को सकारात्मकता और ताजगी से भर देती है। बनारसी परिवारों के साथ-साथ काशी भ्रमण पर आए विदेशी पर्यटक भी इन क्राफ्टेड मोमबत्तियों की खरीदारी में काफी रुचि दिखा रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों का उत्साह कई गुना बढ़ गया है।

मात्र ₹50 में सजेगा आशियाना, किफायती दामों में वैरायटी की भरमार

महंगाई के इस दौर में जहां हर सामान के दाम बढ़े हुए हैं, वहीं वाराणसी के बाजारों में महज ₹50 से शुरू होने वाले ये फैंसी दीये और कैंडल सेट्स आम बजट वाले परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर आए हैं। ₹50 से लेकर ₹200 तक की रेंज में मोतियों से सजे दीये, मिट्टी के हैंड-पेंटेड फ्लोटिंग दीये, टेराकोटा की जालीदार लालटेन और खुशबूदार वैक्स कैंडल्स के एक से बढ़कर एक सेट उपलब्ध हैं। मैदागिन और चौक मंडी के दुकानदारों का मानना है कि इस बार लोग बड़ी मात्रा में गिफ्टिंग के लिए भी इन मिठाई वाली मोमबत्तियों को पसंद कर रहे हैं। सस्ते और टिकाऊ होने के कारण मध्यम वर्ग से लेकर हर वर्ग का ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से चार से पांच सेट आसानी से खरीद रहा है। कम बजट में घर को भव्य और फैंसी लुक देने का यह तरीका इस समय सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड कर रहा है।

फैंसी दीयों और मिट्टी की कलाकृतियों की भारी मांग से दस्तकारों में खुशी

डिजाइनर मोमबत्तियों के साथ-साथ पारंपरिक मिट्टी के फैंसी दीयों का जलवा भी काशी की गलियों में पूरी तरह बरकरार है। वाराणसी और आसपास के ग्रामीण इलाकों जैसे रामनगर और चुनार से आए प्रजापति कुम्हार भाइयों ने इस बार वाटर सेंसर वाले दीये, थ्री-डी पैटर्न वाले दीये और पंचमुखी दीयों का विशाल स्टॉक तैयार किया है। वाराणसी के बाजारों में चीनी प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक लाइटों के बजाय मिट्टी और मोम से बनी देसी वस्तुओं की बिक्री में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थानीय व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस साल 'वोकल फॉर लोकल' का सीधा लाभ काशी के छोटे शिल्पकारों को मिल रहा है। बनारस के गंगा घाटों पर देव दीपावली के दौरान जलने वाले लाखों दीयों के ऑर्डर के बीच बाजारों की यह रौनक यह साबित करती है कि काशीवासी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और आधुनिक सजावट के सुंदर संतुलन को बखूबी अपना रहे हैं।

बनारसी बाजार का नया ट्रेंड और दिवाली-देव दीपावली का आर्थिक गणित

त्योहारी सीजन में वाराणसी का व्यापारिक टर्नओवर इस बार नए रिकॉर्ड बनाने की राह पर है। मिठाई रूपी मोमबत्तियों और डिजाइनर दीयों की इस नई वेव ने केवल खुदरा विक्रेताओं को ही नहीं, बल्कि थोक बाजार को भी संजीवनी दी है। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों जैसे चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर से भी व्यापारी सामान की खरीदारी करने वाराणसी की मंडियों में पहुंच रहे हैं। बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए वाराणसी पुलिस प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि खरीदारी के लिए आए श्रद्धालुओं और नागरिकों को कोई असुविधा न हो। कुल मिलाकर, ₹50 के छोटे से बजट से शुरू होने वाला यह अनोखा क्राफ्ट इस बार काशी के हर घर को एक नई चमक, खुशबू और खुशियों के साथ रोशन करने जा रहा है।