सायोनी घोष वाले 20 बागी सांसदों के गुट में फूट! 17 सांसद थामेंगे BJP का हाथ, 3 मुस्लिम सांसदों ने क्यों बनाई दूरी?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले सांसदों के खेमे में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है। ममता बनर्जी से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का गठन करने वाले 20 बागी सांसदों के गुट में अब दो-फाड़ हो गई है। जादवपुर से सांसद सायोनी घोष समेत 17 बागी सांसद अब औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने जा रहे हैं। वहीं, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान समेत तीन अल्पसंख्यक सांसदों ने सीधे भाजपा में शामिल होने से इनकार कर दिया है और बाहर से समर्थन देने का फैसला किया है।
कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए साफ किया है कि यह कदम अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या ठीक बाद उठाया जाएगा।
17 सांसद एक साथ जाएंगे BJP में, दलबदल कानून से कैसे बचेंगे?
कूचबिहार से लोकसभा सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के अनुसार, 17 सांसदों ने एक साथ भाजपा में शामिल होने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है।
-
दलबदल रोधी कानून (Anti-Defection Law) का गणित: संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, किसी भी दल के विधायी समूह के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य यदि किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता रद्द नहीं होती।
-
आंकड़ों की बाजीगरी: NCPI के कुल 20 सांसदों में से 14 सांसदों का साथ होना कानूनी अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी था। चूंकि 20 में से 17 सांसद एक साथ भाजपा में जा रहे हैं, इसलिए यह आंकड़ा 85 प्रतिशत बैठता है, जिससे इन सभी की सांसदी पर कोई खतरा नहीं रहेगा।
3 सांसदों ने क्यों छोड़ा साथ? BJP में जाने से क्यों किया इनकार?
20 सांसदों के इस गुट में से जिन तीन सांसदों ने सीधे भाजपा का झंडा थामने से मना किया है, उनमें प्रमुख नाम हैं:
-
यूसुफ पठान (सांसद, बहरामपुर)
-
अबू ताहेर खान (सांसद, मुर्शिदाबाद)
-
खलीलुर रहमान (सांसद, जंगीपुर)
पीछे हटने के मुख्य कारण:
-
अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र और वोट बैंक का दबाव: ये तीनों सांसद मुर्शिदाबाद और आसपास के उन संसदीय क्षेत्रों से आते हैं जहां मुस्लिम आबादी का अनुपात 60 से 70 प्रतिशत के करीब है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं की राजनीतिक हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। सीधे तौर पर भाजपा का सदस्य बनने से स्थानीय स्तर पर मतदाताओं में भारी नाराजगी और राजनीतिक जमीन खिसकने का डर था।
-
बाहर से NDA को समर्थन: बसुनिया ने स्पष्ट किया कि ये तीनों नेता भाजपा के औपचारिक सदस्य नहीं बनेंगे, लेकिन वे केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बाहर से अपना समर्थन जारी रखेंगे। इसके एवज में उन्हें केंद्र में कुछ महत्वपूर्ण कमेटियों या विभागों में जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
सायोनी घोष और अन्य बागियों के सामने क्या थी मजबूरी?
ममता बनर्जी की पार्टी में कभी युवा विंग की प्रमुख और फायरब्रांड नेता रहीं सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार और अन्य सांसदों के सामने अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई थी।
हाल ही में भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने यह संकेत दिया था कि वह आगामी कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम चुनाव में NCPI जैसे किसी अलग गुट से गठबंधन करने के बजाय अकेले मैदान में उतरेगी। भाजपा के कई स्थानीय नेता पूर्व टीएमसी नेताओं के साथ गठबंधन का विरोध कर रहे थे। ऐसे में एक अलग क्षेत्रीय पार्टी (NCPI) बनाकर बीच में लटके रहने के बजाय इन सांसदों ने सीधे तौर पर भाजपा में शामिल होकर अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करना ज्यादा मुफीद समझा।
बसुनिया के घर पर हुआ था विरोध प्रदर्शन
यह बड़ा दावा करने से पहले सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया को कूचबिहार के सिताई स्थित अपने पैतृक आवास पर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। उनके पाला बदलने से नाराज लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था और उनके आवास के पास स्थित एक कार्यालय में तोड़फोड़ व आगजनी की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद ही बागी गुट ने अपनी रणनीति को तेजी से अंजाम तक पहुंचाने का फैसला किया।
दुर्गा पूजा के आसपास होने वाले इस सामूहिक दलबदल से पश्चिम बंगाल में लोकसभा सीटों के संतुलन और राज्य की मुख्य विपक्षी/सत्तारूढ़ राजनीति में एक नया भूचाल आना तय माना जा रहा है।