पंजाब में नशे के सिंडिकेट और गैंगस्टरवाद की टूटी कमर: वित्त मंत्री का बड़ा दावा, 89 हजार से अधिक तस्कर सलाखों के पीछे
पंजाब की धरती को नशे के दीमक और गैंगस्टर कल्चर के खौफ से मुक्त कराने के लिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने साझा तौर पर अब तक की सबसे निर्णायक जंग छेड़ दी है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताजा आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए साफ किया कि राज्य में संगठित अपराध और मादक पदार्थों के काले कारोबार की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते समय में विशेष सर्च अभियानों, गुप्त सूचनाओं और तकनीकी निगरानी के दम पर 89 हजार से अधिक ड्रग तस्करों और पेडलर्स को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इसके साथ ही तस्करों के ठिकानों पर छापेमारी कर 23 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब ड्रग मनी सीधे तौर पर नकद जब्त की गई है। इस कार्रवाई ने न केवल जमीनी स्तर पर नशे की सप्लाई चेन को छिन्न-भिन्न कर दिया है, बल्कि सीमा पार से संचालित होने वाले बड़े सिंडिकेट्स के वित्तीय तंत्र पर भी सीधा वार किया है।
सीमा पार से ड्रोन वाली साजिश और पंजाब पुलिस का अभेद्य चक्रव्यूह
पंजाब में नशे का प्रवेश महज एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से रचा जाने वाला एक सुनियोजित रणनीतिक षड्यंत्र रहा है। पाकिस्तान से सटी 553 किलोमीटर लंबी कं barb-wire सीमा पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और आतंकी गठजोड़ द्वारा लगातार हेरोइन और अवैध हथियारों की खेप ड्रोन के माध्यम से गिराई जा रही है। वित्त मंत्री ने बताया कि अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और गुरदासपुर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में पंजाब पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बीच अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला है। आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक, रडार आधारित ट्रैकिंग और विलेज डिफेंस कमेटियों के सक्रिय सहयोग से सैकड़ों आधुनिक ड्रोनों को मार गिराया गया है। खेत-खलिहानों में रात के अंधेरे में फेंकी जाने वाली हेरोइन की खेप उठाने पहुंचे स्थानीय संपर्कों को रंगेहाथों दबोचा जा रहा है, जिससे सरहद पार बैठे आकाओं की लाखों-करोड़ों की योजनाएं जमींदोज हो रही हैं।
गैंगस्टरवाद पर निर्णायक चोट: एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स की चौतरफा घेराबंदी
नशे के व्यापार और राज्य में पनपे गैंगस्टरवाद का चोली-दामन का साथ रहा है, जिसे ध्वस्त करने के लिए गठित स्पेशल 'एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स' (AGTF) ने पूरे पंजाब समेत पड़ोसी राज्यों में भी ऑपरेशनल दबदबा बनाया है। रंगदारी, फिरौती, टारगेट किलिंग और हथियारों की तस्करी में लिप्त ए-कैटेगरी और बी-कैटेगरी के दर्जनों कुख्यात गैंगस्टरों को निष्प्रभावी किया गया है या उन्हें कानून के शिकंजे में लाया गया है। कई मामलों में विदेशों या देश की अन्य केंद्रीय जेलों में बैठकर अपने गुर्गों के जरिए वसूली सिंडिकेट चलाने वाले गैंगस्टरों के नेटवर्क को डिजिटल सर्विलांस के जरिए ट्रैक करके जेलों के भीतर से नेस्तनाबूद किया गया है। जेलों में लगातार औचक निरीक्षण, जैमर की तैनाती और आधुनिक मेटल डिटेक्टरों के उपयोग ने जेल से चलने वाले अपराध तंत्र पर प्रभावी अंकुश लगाया है। राज्य के युवाओं को बंदूक संस्कृति और ग्लैमरस अपराध की झूठी दुनिया से दूर खींचने के लिए पुलिस ने कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाया है।
ड्रग मनी और अवैध संपत्तियों की जब्ती: तस्करों की आर्थिक रीढ़ पर बुलडोजर प्रहार
नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की धारा 68-एफ के कठोर प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए पंजाब पुलिस ने पहली बार तस्करों की चल-अचल संपत्तियों पर सीधा वार किया है। केवल 23 करोड़ रुपये की नकदी ही नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों की अवैध कमाई से बनाए गए आलीशान बंगले, लग्जरी वाहन और व्यावसायिक भूखंडों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत सील और कुर्क किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि जब तक तस्करों के आर्थिक तंत्र को नष्ट नहीं किया जाता, तब तक इस अपराध का पुनर्जीवन संभव रहता है। इसलिए वित्तीय जांच विंग ने जेल में बंद तस्करों के बैंक खातों, हवाला संपर्कों और बेनामी संपत्तियों की गहन ऑडिटिंग शुरू की है, जिसके चलते अपराधियों के परिवारों और साथियों में साफ संदेश गया है कि नशे की काली कमाई से बनाई गई एक भी ईंट सलामत नहीं बचेगी।
केवल गिरफ्तारी नहीं, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा पर भी संतुलित ध्यान
सरकार की रणनीति केवल अपराधियों को जेल में ठूंसने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित युवाओं को सुरक्षित बाहर निकालने पर भी समान जोर दे रही है। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार नशे के आदी युवाओं को 'अपराधी' नहीं बल्कि 'मरीज और पीड़ित' मानती है। राज्यभर में चल रहे ओओएटी (OOAT - आउटपेशेंट ओपियोइड असिस्टेड ट्रीटमेंट) क्लीनिकों और नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाया गया है। यहां दवाओं की नियमित उपलब्धता के साथ-साथ काउंसिलिंग और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सेवाएं दी जा रही हैं। ठीक होकर लौटने वाले नौजवानों को तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और खेलकूद से जोड़ा जा रहा है ताकि वे दोबारा किसी गलत संगत या अपराध के दलदल में न फंसें। गांवों में खेल मैदानों का पुनर्निर्माण और ग्रामीण खेल मेलों का आयोजन युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
जन-भागीदारी और जमीनी हकीकत: पंजाब की संप्रभु पहचान बचाने का संकल्प
इस पूरी जंग में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पंजाब की आम जनता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और युवाओं ने तस्करों के खिलाफ मोर्चा संभाला। 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान के तहत मोहल्ला स्तर और पंचायत स्तर पर स्थानीय कमेटियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में गुप्त पहरेदारी शुरू की है और नशा बेचने वालों की सूचनाएं तुरंत पुलिस के समर्पित हेल्पलाइन नंबरों पर साझा की जा रही हैं। सरकार का दावा है कि 89 हजार से अधिक गिरफ्तारियों का यह विशाल आंकड़ा जनता के अटूट भरोसे और पुलिस के कर्तव्यनिष्ठ प्रयासों का सीधा परिणाम है। पंजाब को एक बार फिर से 'रंगला पंजाब' बनाने और राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के इस व्यापक महाभियान ने साबित कर दिया है कि अपराध और नशे के सौदागरों के लिए राज्य में अब कोई सुरक्षित पनाहगाह शेष नहीं बची है।