'चुनाव नहीं लड़ूंगा, पर पार्टी के लिए काम जारी रहेगा', पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी ने संन्यास की अटकलें खारिज कर दिया दो टूक जवाब

'चुनाव नहीं लड़ूंगा, पर पार्टी के लिए काम जारी रहेगा', पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी ने संन्यास की अटकलें खारिज कर दिया दो टूक जवाब

पंजाब की सियासत में पिछले चौबीस घंटों से चल रही राजनीतिक संन्यास की अटकलों पर पूर्व सांसद और दिग्गज दलित नेता मोहिंदर सिंह केपी ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही उन खबरों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि चार दशकों की लंबी सियासी पारी के बाद वह अब सार्वजनिक जीवन को अलविदा कह रहे हैं। जालंधर में संवाददाताओं और पार्टी समर्थकों से रूबरू होते हुए वरिष्ठ नेता ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह राजनीति छोड़ नहीं रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में चुनावी अखाड़े में प्रत्याशी के रूप में उतरने का उनका कोई इरादा नहीं है, लेकिन शिरोमणि अकाली दल के संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने और आम जनता के हकों की लड़ाई लड़ने के लिए वह पहले की तरह ही सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।

करतारपुर हलके में नए चेहरे की ताजपोशी और संन्यास की चर्चाओं की इनसाइड स्टोरी

इस पूरे विवाद और अटकलों की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट सामने आई, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह संदेश गया कि मोहिंदर केपी अब सक्रिय राजनीति से पूरी तरह किनारा कर रहे हैं। इसी दौरान करतारपुर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी संगठन द्वारा नए हलका इंचार्ज की नियुक्ति का फैसला भी सामने आया। इस पर अपनी स्थिति साफ करते हुए पूर्व सांसद ने बताया कि करतारपुर में संगठन की कमान नई पीढ़ी को सौंपने का निर्णय पार्टी हाईकमान ने उनसे विचार-विमर्श और उनकी सहमति के बाद ही लिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में समय के साथ युवा नेतृत्व को आगे लाना एक स्वाभाविक और आवश्यक प्रक्रिया है। इसका यह कतई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उन्होंने मैदान छोड़ दिया है। वह हलके के कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे और पार्टी के हर फैसले को धरातल पर सफल बनाने में अपनी पूरी ताकत लगाएंगे।

चार दशकों का सियासी सफर, पंजाब कैबिनेट से संसद तक की विरासत

मोहिंदर सिंह केपी का राजनीतिक सफर पंजाब की सियासत में बेहद ऐतिहासिक और प्रभावशाली रहा है। 7 नवंबर 1956 को जालंधर के प्रमुख राजनीतिक घराने में जन्मे केपी के पिता स्वर्गीय दर्शन सिंह केपी जालंधर से पांच बार विधायक और पंजाब सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे थे। वर्ष 1992 में आतंकवाद के काले दौर के दौरान उनके पिता की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद मोहिंदर केपी ने जनसेवा की कमान संभाली। वह जालंधर से तीन बार विधायक चुने गए और राज्य सरकार में खेल, युवा मामले, प्राथमिक शिक्षा और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2009 के आम चुनाव में उन्होंने जालंधर लोकसभा सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर संसद का रुख किया। इसके अलावा वह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के अध्यक्ष पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

दोआबा की दलित राजनीति में अहम धुरी और अकाली दल के साथ नया अध्याय

पंजाब के दोआबा क्षेत्र को दलित राजनीति का गढ़ माना जाता है, जहां रविदासिया और दलित समुदाय चुनावी नतीजों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मोहिंदर केपी का परिवार इस पूरे बेल्ट में दशकों से सामाजिक और सियासी रूप से बेहद रसूखदार रहा है। कांग्रेस में उपेक्षा और मतभेदों के चलते उन्होंने बाद में पार्टी से अपनी राहें अलग कर ली थीं और शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में अकाली दल ने उन पर भरोसा जताते हुए जालंधर सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। हालांकि चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन जालंधर, करतारपुर, आदमपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में उनका निजी जनसंपर्क और संगठनात्मक पकड़ आज भी काफी गहरी मानी जाती है।

चुनावी राजनीति से दूरी, लेकिन कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक बने रहेंगे

अपने हालिया फैसले के मायने समझाते हुए मोहिंदर केपी ने कहा कि सक्रिय राजनीति में रहने के लिए हमेशा चुनावी उम्मीदवार बने रहना जरूरी नहीं होता। 40 वर्षों के संसदीय और विधायी अनुभव के बाद अब उनका लक्ष्य संगठन को दिशा देना, कार्यकर्ताओं की समस्याओं का निवारण करना और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में पंजाब गंभीर प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे वक्त में विपक्ष के तौर पर शिरोमणि अकाली दल को एक सशक्त आवाज बनकर उभरना होगा। वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मिलकर पंजाब की किसानी, युवाओं के रोजगार और बुनियादी विकास के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेंगे और नए कार्यकर्ताओं को सियासी गुर सिखाकर संगठन को नई ऊर्जा देंगे।