'मुन्ना भाई MBBS' के गाने से रातों-रात सनसनी बनीं मुमैथ खान अब कहां हैं और किस हाल में जी रही हैं जिंदगी?

'मुन्ना भाई MBBS' के गाने से रातों-रात सनसनी बनीं मुमैथ खान अब कहां हैं और किस हाल में जी रही हैं जिंदगी?

साल 2003 में जब निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म 'मुन्ना भाई MBBS' सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो उसने न केवल संजय दत्त और अरshad वारसी के करियर को एक नया जीवन दिया, बल्कि एक गाने ने पूरे देश के युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया था। अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों के सामने जब ग्लैमरस अंदाज में एक लड़की ने 'देख ले, देख ले आंखें मिला के देख ले' पर डांस करना शुरू किया, तो वह चेहरा रातों-रात हर किसी की जुबान पर चढ़ गया। वह खूबसूरत और बेहद ऊर्जावान डांसर कोई और नहीं बल्कि मुमैथ खान थीं। महज 13-14 साल की उम्र से कोरियोग्राफी और बैकग्राउंड डांसिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मुमैथ खान को इस एक गाने ने भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी और महंगी आइटम गर्ल के रूप में स्थापित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में 'लकी: नो टाइम फॉर लव', 'हलचल' और साउथ सिनेमा में महेश बाबू की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पोकिरी' में अपने धमाकेदार डांस से दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया था। उस दौर में तेलुगु, तमिल और हिंदी फिल्मों में उनका होना फिल्म के सुपरहिट होने की गारंटी माना जाता था।

एक झटके में बदल गई जिंदगी: सिर में गंभीर चोट और 15 दिनों तक कोमा में संघर्ष

जब मुमैथ खान का करियर अपने चरम पर था और उनके पास फिल्मों की कतार लगी हुई थी, तभी नियति ने उनके साथ एक ऐसा क्रूर मजाक किया जिसने उनकी पूरी दुनिया को पलक झपकते ही उजाड़ दिया। एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के दौरान मुमैथ के सिर में बेहद गंभीर और जानलेवा चोट लग गई। सिर की हड्डी में फ्रैक्चर और अंदरूनी ब्रेन हेमरेज के चलते उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें तुरंत अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर शिफ्ट करना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार दिमाग में खून का थक्का जमने और अत्यधिक दबाव के कारण वह गहरे कोमा में चली गईं। करीब 15 दिनों तक वह जिंदगी और मौत के बीच झूलती रहीं और डॉक्टरों ने उनके परिवार को किसी भी अनहोनी के लिए तैयार रहने तक को कह दिया था। इस बेहद जटिल स्थिति से निकालने के लिए न्यूरोसर्जनों को उनकी एक बड़ी ब्रेन सर्जरी करनी पड़ी, जिसमें उनके सिर के भीतर आंतरिक सपोर्ट के लिए टाइटेनियम की तारें और प्लेट्स लगाई गईं। चमत्कारिक रूप से मुमैथ ने 15 दिन बाद अपनी आंखें तो खोल लीं, लेकिन यह उनकी जिंदगी की सबसे लंबी और दर्दनाक जंग की केवल शुरुआत भर थी।

7 साल तक बिस्तर पर काटी जिंदगी, याददाश्त कमजोर हुई और दवाओं से बदला शरीर

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मुमैथ खान के सामने जो जिंदगी खड़ी थी, वह किसी भयानक दुस्वप्न से कम नहीं थी। दिमाग पर हुए गहरे आघात और जटिल सर्जरी के कारण उनके शरीर का नर्वस सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो चुका था। उन्हें बार-बार मिर्गी जैसे गंभीर दौरे (सीजर्स) पड़ते थे, तेज रोशनी और हल्की सी आवाज भी उनके सिर में असहनीय दर्द पैदा कर देती थी। इस हालत में डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह से बेड रेस्ट पर रहने की हिदायत दी। मुमैथ को अपनी जिंदगी के लगभग 7 लंबे साल सिर्फ चारदीवारी और बिस्तर पर लेटकर गुजारने पड़े। भारी-भरकम न्यूरोलॉजिकल दवाओं, स्टेरॉयड और शारीरिक निष्क्रियता के चलते उनके शरीर में भारी बदलाव आ गया। कभी अपनी छरहरी काया और लचीलेपन के लिए पहचानी जाने वाली मुमैथ का वजन अनियंत्रित होकर बहुत ज्यादा बढ़ गया। इसके साथ ही दवाओं के साइड इफेक्ट्स ने उनकी याददाश्त को भी कमजोर कर दिया था, जिसके चलते वे कई बार अपने पुराने दिनों, गानों और करीबियों के नाम तक भूल जाती थीं।

आर्थिक तंगी और फिल्म इंडस्ट्री के बेरुखेपन ने तोड़ा दिल, पर नहीं मानी हार

बिस्तर पर पड़े रहने के उन सात वर्षों के दौरान मुमैथ खान को केवल शारीरिक दर्द ही नहीं, बल्कि भयंकर मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। जब तक वह फिल्मों में थिरक रही थीं और उनके नाम से टिकटें बिक रही थीं, तब तक इंडस्ट्री के दर्जनों निर्माता-निर्देशक उनके इर्द-गिर्द मंडराते थे। लेकिन जैसे ही वह बीमार पड़ीं, पूरी ग्लैमर इंडस्ट्री ने उनसे मुंह मोड़ लिया। जिन लोगों को वह अपना सबसे करीबी दोस्त मानती थीं, उन्होंने उनका हालचाल तक लेना बंद कर दिया। लंबे इलाज, डॉक्टरों की महंगी फीस और रोजमर्रा की दवाओं के खर्च ने उनकी वर्षों की जमा पूंजी को पूरी तरह खत्म कर दिया और एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। मुमैथ ने एक भावुक इंटरव्यू में खुद बयां किया था कि उस दौर में वे गहरे डिप्रेशन में चली गई थीं और कई बार उनके मन में जीने की उम्मीद खत्म हो गई थी। लेकिन उनकी मां और परिवार के अटूट प्यार ने उन्हें टूटने नहीं दिया और उन्होंने मौत के मुंह से वापस लौटने का फैसला किया।

योग, थेरेपी और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर मौत के मुंह से ऐसे लौटीं बाहर

सात साल के लंबे और कष्टकारी वनवास के बाद मुमैथ खान ने धीरे-धीरे अपनी खोई हुई जिंदगी को वापस समेटना शुरू किया। उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के दम पर पहले बिस्तर से उठकर खड़ा होना सीखा। फिजियोथेरेपी, नियमित योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा की मदद से उन्होंने धीरे-धीरे अपने नर्वस सिस्टम को मजबूत किया और दौरों की तीव्रता को कम करने में सफलता पाई। जैसे-जैसे उनकी शारीरिक क्षमता लौटी, उन्होंने जिम में घंटों पसीना बहाकर दवाओं के कारण बढ़े हुए वजन को घटाना शुरू किया। यह सफर बेहद धीमा और तकलीफदेह था क्योंकि जरा सा अधिक तनाव होते ही सिर में तेज दर्द लौट आता था। लेकिन मुमैथ ने हिम्मत नहीं हारी और यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के भीतर जीने का जज्बा हो, तो वह सबसे अंधेरे रास्तों से भी रोशनी की तरफ निकल सकता है।

अब कहां हैं और क्या कर रही हैं मुमैथ खान? नई जिंदगी में फिटनेस और उम्मीद की किरण

सालों तक गुमनामी और बीमारी से जंग जीतने के बाद मुमैथ खान अब अपनी जिंदगी के एक नए और शांत पड़ाव पर हैं। वह अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और मुंबई व हैदराबाद में रहकर अपनी जिंदगी को अपने नियमों पर जी रही हैं। उन्होंने रियलिटी शो 'बिग बॉस तेलुगु' के पहले सीजन में बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लेकर छोटे पर्दे पर अपनी दमदार वापसी भी दर्ज कराई थी, जहां दर्शकों ने उनके साहस और बेबाकी को खूब सराहा। इसके अलावा वह कुछ रीजनल रियलिटी शोज में जज और मेंटर के तौर पर भी नजर आ चुकी हैं। आज मुमैथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय हैं, जहां वह अपने वर्कआउट वीडियोज, डांस रिहर्सल और सकारात्मक विचार अपने फैंस के साथ साझा करती हैं। वह अब उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो गंभीर बीमारियों या मानसिक अवसाद से जूझ रहे हैं। मुमैथ अक्सर कहती हैं कि ईश्वर ने उन्हें एक नया जीवन दिया है और अब वह हर एक दिन को एक अनमोल तोहफा मानकर पूरी शिद्दत और खुशी के साथ जीती हैं।