वैभव सूर्यवंशी को आउट करने का एकमात्र तरीका हरभजन सिंह ने बताया, गेंदबाजों को दी दो टूक चेतावनी- 'उसे रक्षात्मक होकर नहीं, सीधा आक्रमण करके ही रोका जा सकता है'
भारतीय घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय अंडर-19 मंच पर जब से बिहार के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी का जलवा बिखेरा है, तभी से क्रिकेट जगत के दिग्गज उनकी तकनीक और निर्भीक रवैये के मुरीद हो गए हैं। बेहद कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने और वैश्विक मंच पर तेज गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाले इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने हर किसी को हैरान किया है। अब भारत के पूर्व महान ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी शैली का बेहद सटीक और रणनीतिक विश्लेषण किया है। भज्जी ने विपक्षी गेंदबाजों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई गेंदबाज वैभव के सामने रक्षात्मक होकर रन रोकने की कोशिश करेगा, तो वह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। हरभजन के मुताबिक, इस युवा विस्फोटक बल्लेबाज को आउट करने का एकमात्र रास्ता उस पर सीधे आक्रमण करना और उसे बैकफुट पर धकेलना है।
रक्षात्मक सोच छोड़ गेंदबाजों को करना होगा सीधा प्रहार
हरभजन सिंह ने अपने विशेष क्रिकेट विश्लेषण में इस बात पर जोर दिया कि वैभव सूर्यवंशी जैसे आधुनिक बल्लेबाजों के खिलाफ पारंपरिक रक्षात्मक रणनीतियां पूरी तरह विफल साबित होती हैं। जब एक बल्लेबाज पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हावी होने और बाउंड्री तलाशने की नीयत से उतरता है, तो उसके सामने अगर आप डीप फील्डर लगाकर सिर्फ सिंगल रोकने की कोशिश करेंगे, तो वह अपने आक्रामक स्ट्रोक्स से पूरी फील्डिंग को तहस-नहस कर देगा।
भज्जी का मानना है कि ऐसे बल्लेबाजों के खिलाफ कप्तानों को आक्रामक फील्ड सेटिंग रखनी चाहिए, जिसमें स्लिप, गली और शॉर्ट लेग जैसे कैचिंग पोजीशन्स सक्रिय हों। गेंदबाजों को गेंद की गति, उछाल और दिशा में लगातार विविधता लानी होगी ताकि बल्लेबाज को रूम न मिले। हरभजन ने कहा कि जब आप किसी आक्रामक बल्लेबाज पर लगातार दबाव बनाते हैं और उसे उसके कम्फर्ट जोन से बाहर खींचते हैं, तभी वह कोई जोखिम भरा शॉट खेलने पर मजबूर होता है। आग का मुकाबला केवल आग से ही किया जा सकता है, और वैभव को रोकने के लिए गेंदबाजों को अपनी सर्वश्रेष्ठ आक्रामकता दिखानी होगी।
कम उम्र में बेखौफ बल्लेबाजी: क्या है वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत?
वैभव सूर्यवंशी का भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर उभरना किसी परीकथा से कम नहीं रहा है। बिहार के समस्तीपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले वैभव ने महज 12-13 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में खेलकर इतिहास रच दिया था। इसके बाद भारत की अंडर-19 टीम की ओर से खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ उन्होंने जिस तरह मात्र 58 गेंदों में तूफानी शतक जड़ा, उसने दुनिया भर के क्रिकेट जानकारों को दंग कर दिया।
वैभव की सबसे बड़ी खूबी उनका तेजतर्रार बैकलिफ्ट, आंखों और हाथों का असाधारण समन्वय (hand-eye coordination) और गेंद को शुरुआती सेकंड में ही भांप लेने की क्षमता है। वे तेज गेंदबाजों के खिलाफ फ्रंटफुट पर आकर लॉफ्टेड ड्राइव खेलने से नहीं कतराते और न ही 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाली शॉर्ट गेंदों पर पुल शॉट लगाने में हिचकिचाते हैं। उनकी इस निडरता ने उन्हें आधुनिक दौर के टी20 और व्हाइट-बॉल क्रिकेट का सबसे आकर्षक युवा चेहरा बना दिया है।
आक्रामकता का मुकाबला आक्रामकता से: भज्जी का रणनीतिक गुरुमंत्र
हरभजन सिंह ने अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपने दौर में एडम गिलक्रिस्ट, वीरेंद्र सहवाग, क्रिस गेल और मैथ्यू हेडन जैसे दुनिया के सबसे विध्वंसक सलामी बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी की है। भज्जी ने समझाया कि जब भी वे ऐसे बल्लेबाजों के सामने आते थे, तो कभी भी गेंद को सुरक्षित जगह फेंकने की नहीं सोचते थे, बल्कि हमेशा विकेट चटकाने वाली गेंद डालने का प्रयास करते थे।
हरभजन ने युवा गेंदबाजों को सलाह देते हुए कहा कि वैभव सूर्यवंशी के खिलाफ सटीक यॉर्कर, शरीर की लाइन में तीखी बाउंसर और ऑफ स्टंप के ठीक बाहर चौथे स्टंप की लाइन पर गेंद फेंकना सबसे कारगर साबित हो सकता है। स्पिनरों के लिए भज्जी का मंत्र यह है कि वे गेंद की गति में बदलाव करें और बल्लेबाज को हवा में चकमा दें, न कि केवल फ्लैट गेंद फेंककर रन बचाने की कोशिश करें। यदि स्पिनर फ्लाइट देकर गेंद को ड्रिफ्ट कराएंगे, तो वैभव जैसे स्ट्रोकमेकर के बड़े शॉट में मिस-टाइम होने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।
भारतीय क्रिकेट की नई पौध और टी20 युग की बेबाक मानसिकता
वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट की उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो असफलता के डर से पूरी तरह मुक्त है। आईपीएल के माहौल और अत्याधुनिक कोचिंग सुविधाओं के बीच बड़े हो रहे ये युवा खिलाड़ी किसी भी गेंदबाज के नाम या साख से प्रभावित नहीं होते। चाहे सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर का तेज गेंदबाज हो या कोई अनुभवी स्पिनर, इनका माइंडसेट केवल गेंद की मेरिट देखकर उस पर प्रहार करने का होता है।
हेड कोच गौतम गंभीर के दौर में भारतीय टीम की जो आक्रामक सोच विकसित हो रही है, वैभव जैसे युवा खिलाड़ी उसी खाके में बिल्कुल सटीक बैठते हैं। यह नई पौध खेल को आगे ले जाने और पहली ही गेंद से विपक्षी टीम को बैकफुट पर धकेलने के सिद्धांत पर काम करती है। यही कारण है कि आईपीएल ऑक्शन और घरेलू सत्रों में ऐसे बल्लेबाजों की मांग आसमान छू रही है, जो अकेले दम पर पावरप्ले के भीतर पूरे मैच का रुख तय कर सकें।
भविष्य का सुपरस्टार बनने की राह और आगे की चुनौतियां
यद्यपि वैभव सूर्यवंशी के पास असाधारण प्रतिभा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय और शीर्ष स्तर के क्रिकेट में निरंतरता बनाए रखना एक लंबी और कठिन यात्रा होती है। हरभजन सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे वैभव अधिक मैच खेलेंगे, दुनिया भर की एनालिटिक्स टीमें उनके खेल और कमजोरियों का वीडियो फुटेज देखकर नई रणनीतियां तैयार करेंगी।
ऐसे में वैभव के लिए सबसे जरूरी यह होगा कि वे अपनी आक्रामकता के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार खेल को आगे बढ़ाने का धैर्य भी विकसित करें। लंबी पारियां खेलने की भूख और मुश्किल परिस्थितियों में क्रीज पर टिके रहने का हुनर ही उन्हें एक होनहार प्रतिभा से बदलकर एक महान अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाएगा। हरभजन सिंह का यह बयान न केवल गेंदबाजों के लिए एक सबक है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि वैभव सूर्यवंशी ने अपने खेल से बड़े-बड़े दिग्गजों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।