"मेसी खेल सकते हैं, तो विराट-रोहित क्यों नहीं?" हरभजन सिंह ने आलोचकों की लगाई क्लास! दिग्गजों की उम्र पर सवाल उठाने वालों को दिया मुंहतोड़ जवाब

भारतीय क्रिकेट में जब भी टीम के किसी खराब प्रदर्शन या बदलाव के दौर की बात आती है, तो आलोचकों और सोशल मीडिया ट्रोलर्स के निशाने पर सबसे पहले अनुभवी खिलाड़ी ही आते हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के दो सबसे बड़े स्तंभ—विराट कोहली और रोहित शर्मा की उम्र और उनके टी20 व अंतरराष्ट्रीय भविष्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई पूर्व क्रिकेटरों और विश्लेषकों का मानना है कि अब युवा खिलाड़ियों को मौका देने के लिए दिग्गजों को रास्ता छोड़ देना चाहिए। हालाँकि, भारत के पूर्व महान ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने इन आलोचकों को सिरे से खारिज करते हुए एक बेहद तीखा और तार्किक जवाब दिया है।

हरभजन सिंह ने आलोचकों की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए दुनिया के महानतम फुटबॉलर लियोनेल मेसी का उदाहरण पेश किया। भज्जी का स्पष्ट मानना है कि खेल के मैदान पर प्रदर्शन और फिटनेस ही एकमात्र मापदंड होना चाहिए, न कि किसी खिलाड़ी का जन्म का साल। यदि कोई खिलाड़ी 35 या 37 वर्ष की उम्र में भी 25 साल के युवा जितने फुर्तीला है और टीम को मैच जिता रहा है, तो उसकी उम्र पर सवाल उठाना न केवल गलत है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए हानिकारक भी है।

लियोनेल मेसी का मिसाल: जब 37 की उम्र में फुटबॉल का जादूगर मचा सकता है धमाल!

हरभजन सिंह ने आलोचकों को आईना दिखाते हुए कहा कि हमें वैश्विक खेलों से सीखने की जरूरत है। फुटबॉल जैसे खेल में, जहाँ 90 मिनट तक लगातार बेतहाशा दौड़ना पड़ता है और शारीरिक क्षमता (Physical Endurance) की सबसे कड़ी परीक्षा होती है, वहाँ 35 से अधिक उम्र का लियोनेल मेसी अपनी देश अर्जेंटीना को विश्व कप जिताता है और आज भी दुनिया का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी बना हुआ है। इसके अलावा क्रिस्टियानो रोनाल्डो और टेनिस के दिग्गज नोवाक जोकोविच जैसे एथलीट 38-39 साल की उम्र में भी अपने-अपने खेलों में शीर्ष पर बने हुए हैं।

हरभजन ने सवाल उठाया कि जब विश्व खेल जगत में ढलती उम्र के खिलाड़ियों को उनके अनुभव और फिटनेस के आधार पर सराहा जाता है, तो फिर भारत में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सर्वकालिक महान खिलाड़ियों के पीछे लोग क्यों पड़े रहते हैं? भज्जी के अनुसार, क्रिकेट में तो फुटबॉल या टेनिस जितना निरंतर शारीरिक संपर्क भी नहीं होता, फिर भी यहाँ 35 वर्ष के पार होते ही खिलाड़ियों को संन्यास की सलाह दी जाने लगती है, जो पूरी तरह से तर्कहीन है।

विराट कोहली की बेजोड़ फिटनेस और रोहित शर्मा की क्लास का कोई जवाब नहीं

विराट कोहली और रोहित शर्मा के योगदान की बात करते हुए हरभजन सिंह ने कहा कि ये दोनों खिलाड़ी केवल कागजों पर नामी नहीं हैं, बल्कि मैदान पर लगातार रन बना रहे हैं। विराट कोहली की फिटनेस के स्तर से तो पूरी दुनिया वाकिफ है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट संस्कृति में फिटनेस का जो नया दौर शुरू किया था, वे आज भी उस पर पूरी सख्ती से कायम हैं। यो-यो टेस्ट हो या मैदान पर डाइव लगाकर रन रोकना, कोहली आज की युवा पीढ़ी के खिलाड़ियों से भी ज्यादा चुस्त-दुरुस्त नजर आते हैं।

वहीं, रोहित शर्मा की बल्लेबाजी की बात करें तो उनकी 'टाइमिंग' और बड़े छक्के लगाने की सहज क्षमता उम्र के साथ और अधिक निखर कर सामने आई है। रोहित ने अपनी आक्रामक कप्तानी और निडर बल्लेबाजी से भारतीय टीम को आईसीसी टूर्नामेंट्स के फाइनल तक पहुँचाया है। हरभजन ने कहा कि जब रोहित का बल्ला चलता है, तो वे दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को अकेले ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं। ऐसे में केवल उनकी उम्र का हवाला देकर उन्हें टीम से बाहर करने की सोच रखना भारतीय क्रिकेट के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

'अनुभव बाजार में नहीं बिकता': युवाओं और दिग्गजों के संतुलन की जरूरत

अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि 2026 और उसके बाद के आईसीसी टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए युवाओं को अभी से तराशा जाना चाहिए। इस तर्क का जवाब देते हुए हरभजन सिंह ने कहा कि युवाओं को मौका जरूर मिलना चाहिए, लेकिन दिग्गजों की बलि देकर नहीं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव, खासकर विश्व कप या ऑस्ट्रेलिया जैसी मुश्किल सरजमीं पर खेलना, केवल युवा जोश के दम पर नहीं जीता जा सकता। वहाँ मैदान पर सही फैसले लेने के लिए सालों के अनुभव की जरूरत होती है।

भज्जी ने कहा, "अनुभव किसी दुकान पर नहीं बिकता कि आप जाकर खरीद लें। विराट और रोहित ने पिछले 15 सालों में हर तरह की परिस्थितियों का सामना किया है। जब टीम दबाव में होती है, तो ड्रेसिंग रूम में इन दोनों की मौजूदगी ही युवा खिलाड़ियों का हौसला दोगुना कर देती है। अगर आप एक झटके में सारे अनुभवी खिलाड़ियों को बाहर कर देंगे, तो टीम का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।"

भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए आलोचना नहीं, सम्मान की जरूरत

हरभजन सिंह के इस बयान ने सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। खेल विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग भज्जी की बात से पूरी तरह सहमत है। इतिहास गवाह है कि सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, एमएस धोनी और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों ने भी अपने करियर के उत्तरार्ध में भारतीय टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई थीं। सचिन तेंदुलकर ने 38 साल की उम्र में 2011 का विश्व कप जीता था और वे उस टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में से एक थे।

अंत में हरभजन सिंह ने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों से अपील की कि वे अपने नायकों का सम्मान करना सीखें। जब तक विराट कोहली और रोहित शर्मा में खेलने की भूख है, उनकी फिटनेस जवाब नहीं दे रही है और वे देश के लिए मैच जिताऊ पारियां खेल रहे हैं, तब तक उनके संन्यास पर चर्चा बंद होनी चाहिए। भारतीय टीम को आगामी बड़े टूर्नामेंट्स में इन दोनों खिलाड़ियों के अनुभव और नेतृत्व की सख्त जरूरत है।

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