मॉडल श्रद्धा दुबे और साथियों की संपत्तियां खंगाल रही पुलिस: बैंक खातों की पड़ताल तेज
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित शिवा शर्मा मौत मामले में हजरतगंज पुलिस ने गिरफ्तार मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश उर्फ तनवीर के खिलाफ जांच का दायरा काफी व्यापक कर दिया है। बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर हुई कैफे संचालक शिवा शर्मा की मौत के मामले में पुलिस अब आरोपियों के वित्तीय नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। पुलिस टीम न केवल श्रद्धा और उसके करीबियों के बैंक खातों की सघन जांच कर रही है, बल्कि विभिन्न शहरों में फैली उनकी चल-अचल संपत्तियों को भी चिह्नित करने की प्रक्रिया में लगी हुई है। जेल भेजे जाने के बाद से ही पुलिस का मुख्य ध्यान उन वित्तीय कड़ियों को जोड़ने पर है, जिनका संबंध इस पूरे घटनाक्रम और ब्लैकमेलिंग के आरोपों से हो सकता है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों के वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड सामने आने से मामले के कई छिपे हुए पहलू उजागर हो सकते हैं। शिवा के परिजनों ने शुरुआत से ही आरोप लगाया था कि मॉडल और उसके साथियों द्वारा मानसिक व आर्थिक दबाव बनाया जा रहा था। इसी आधार पर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पिछले कुछ महीनों में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और ड्राइवर के खातों में किस तरह के और कितने बड़े लेनदेन हुए हैं। बैंकों से मिलने वाले विस्तृत स्टेटमेंट और संपत्ति के रिकॉर्ड्स को केस डायरी का अहम हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे अदालत में अभियोजन पक्ष का दावा और अधिक पुख्ता हो सके।
बैंकों को भेजी गई डिटेल: फ्रीज खातों के अलावा अन्य लेन-देन की पड़ताल
हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए कई प्रमुख बैंकों को पत्र भेजकर श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर के नाम से संचालित सभी खातों की विस्तृत जानकारी तलब की है। पुलिस ने बैंकों से खातों का पूरा स्टेटमेंट, उनसे जुड़े यूपीआई और नेट बैंकिंग ट्रांजैक्शन, क्रेडिट कार्ड के खर्च और लॉकर की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। इससे पहले जब आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहे थे, तब पुलिस ने श्रद्धा के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खाते को फ्रीज कराया था, जिसमें लगभग छह लाख रुपये जमा थे। इसके अलावा सहारनपुर पुलिस के स्तर से भी एक अन्य खाता फ्रीज किए जाने की बात सामने आई थी। अब जांच एजेंसी यह जानने में जुटी है कि इन खातों में पैसे कहां से और किन माध्यमों से ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस का विशेष ध्यान इस बात पर है कि क्या शिवा शर्मा के बैंक खातों या उनके कारोबारी फर्मों से भी कोई रकम इन खातों में स्थानांतरित की गई थी। इसके साथ ही, अन्य व्यक्तियों द्वारा किसी दबाव या प्रभाव के तहत किए गए किसी भी असामान्य लेनदेन की बारीक जांच की जा रही है। यदि बैंक खातों में मोटी रकम या संदिग्ध लेन-देन का ब्योरा सामने आता है, तो पुलिस इसे वित्तीय शोषण और जबरन वसूली के दावों से जोड़कर अदालत में पेश करेगी।
रायबरेली और अन्य शहरों में संपत्तियों की तलाश: मददगारों पर भी कसेगा शिकंजा
बैंक खातों की छानबीन के समानांतर पुलिस श्रद्धा दुबे और उसके सहयोगियों की संपत्तियों को भी चिह्नित करने में लगी है। सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा के पैतृक जिले रायबरेली के अलावा लखनऊ और अन्य संभावित शहरों में मौजूद भूखंडों, फ्लैटों, मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाई जा रही है। राजस्व विभाग और स्थानीय निबंधन कार्यालयों से संपर्क कर यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों या उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कौन-कौन सी संपत्तियां दर्ज हैं और वे कब खरीदी गई थीं। इसके साथ ही पुलिस उन लोगों की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है जिन्होंने घटना के बाद आरोपियों को फरार रहने में शरण, वाहन या आर्थिक मदद मुहैया कराई थी। फरारी के दौरान नेपाल, आगरा और नागपुर के ठिकानों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क और मददगारों में शामिल आमिर समेत अन्य संभावित सहयोगियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गंभीर अपराध में आरोपियों को संरक्षण देना या साक्ष्य मिटाने में मदद करना भी कानूनी रूप से बड़ा जुर्म है, इसलिए मददगारों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
इसी हफ्ते होगा क्राइम सीन रीक्रिएशन: हत्या और आत्महत्या के फर्क को समझेगी फोरेंसिक टीम
मामले की कानूनी दिशा तय करने के लिए पुलिस इसी हफ्ते घटनास्थल यानी अवध ग्रीन अपार्टमेंट में क्राइम सीन रीक्रिएशन कराने की पूरी तैयारी कर चुकी है। इसके लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) के सहयोग से मेडिकोलीगल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम गठित की जा रही है। क्राइम सीन रीक्रिएशन की प्रक्रिया इस बात को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि घटना के वक्त बालकनी या छत पर क्या परिस्थितियां थीं और शिवा शर्मा किस तरह नीचे गिरे।फोरेंसिक विशेषज्ञ गिरने के कोण, शरीर पर आई चोटों के पैटर्न, रेलिंग की ऊंचाई और नीचे गिरने के स्थान के बीच की दूरी का भौतिक व वैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे। पुलिस इस प्रक्रिया से यह पुष्ट करना चाहती है कि शिवा की मौत किसी के द्वारा धक्का दिए जाने से हुई थी या फिर यह आत्महत्या का मामला था। इस दौरान वायरल हुए ऑडियो और वीडियो क्लिप्स की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट को भी इस भौतिक परीक्षण के साथ मिलाया जाएगा, ताकि घटना की रात के हर एक सेकंड का सटीक टाइमलाइन चार्ट तैयार किया जा सके।
जेल में वकीलों से मुलाकात और आगे की कानूनी लड़ाई
उधर जिला कारागार में बंद आरोपियों से कानूनी सलाह के लिए उनके अधिवक्ता मिलने पहुंचे। जेल के मुलाकाती कक्ष में नियमों के अनुसार श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर तनवीर को आमने-सामने लाया गया, जहां वकीलों ने केस से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर उनसे चर्चा की। बचाव पक्ष अब जमानत अर्जी दाखिल करने और पुलिस के आरोपों का जवाब तैयार करने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष और पुलिस की टीम वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक स्टेटमेंट और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर एक मजबूत चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल से इस केस में नए मोड़ आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में पुलिस रिमांड और क्राइम सीन रीक्रिएशन के नतीजे इस बहुचर्चित मामले में न्याय की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।