झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज पर भड़के सपा सांसद अवधेश प्रसाद: बोले- तानाशाही के रास्ते पर चल रही सरकार, चुकानी पड़ेगी भारी कीमत
झारखंड की राजधानी रांची में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के बाद सियासी पारा तेजी से चढ़ गया है। इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और अयोध्या (फैजाबाद) से सांसद अवधेश प्रसाद ने अपनी ही गठबंधन सहयोगी सरकार (झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन) के रुख पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मीडिया से बातचीत करते हुए अवधेश प्रसाद ने पुलिसिया कार्रवाई को तानाशाही करार दिया और चेतावनी दी कि लोकतंत्र में इस तरह के रवैये की कोई जगह नहीं है तथा सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में हुई कथित धांधली व अनियमितताओं के खिलाफ हजारों छात्र विधानसभा घेराव करने पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। इस कार्रवाई के बाद से ही पूरे राज्य में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
'लोकतंत्र में तानाशाही की जगह नहीं': जानें अवधेश प्रसाद के हमले की बड़ी बातें
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने संसद भवन परिसर के बाहर पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक और न्याय के लिए आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार का अड़ियल और दमनकारी रवैया पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। अवधेश प्रसाद के शब्दों में, "झारखंड में छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज तानाशाही की पराकाष्ठा है। सरकार अड़ियल रास्ते पर चल रही है। लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने वाली सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।"
सपा सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों का हित किसी भी राजनीतिक दल या सरकार से ऊपर होना चाहिए। सरकार को हठधर्मिता छोड़कर तुरंत आंदोलित युवाओं से सीधी वार्ता करनी चाहिए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाकर उनकी मांगों का त्वरित समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद से लेकर सड़क तक युवाओं, किसानों और बेकसूरों की आवाज उठाना विपक्ष का नैतिक दायित्व है।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी का क्या है रुख?
झारखंड की इस घटना पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बयान दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि बेरोजगारी और युवाओं की समस्याओं के लिए मूल रूप से नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि संवाद ही किसी भी समस्या के समाधान का एकमात्र रास्ता है। सरकार और मुख्यमंत्री को छात्रों के साथ लगातार बातचीत का सिलसिला बनाए रखना चाहिए ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी रांची में छात्रों पर हुए बल प्रयोग की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हिंसा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने झारखंड सरकार से छात्रों की समस्याओं को सुनकर पारदर्शी तरीके से हल निकालने का आग्रह किया।
इंडी (INDI) गठबंधन के घटक दलों के नेताओं द्वारा झारखंड की राज्य सरकार की कार्रवाई पर उठाए गए इन तीखे सवालों से स्पष्ट है कि छात्र आंदोलन का मुद्दा अब केवल राज्य स्तर तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।