UPI AutoPay Trap: '₹79 कब कट गए, पता ही नहीं चला', फ्री ट्रायल के नाम पर आपकी जेब कैसे काट रहे हैं ऐप्स? जानें इस बड़े खेल का सच

UPI AutoPay Trap: '₹79 कब कट गए, पता ही नहीं चला', फ्री ट्रायल के नाम पर आपकी जेब कैसे काट रहे हैं ऐप्स? जानें इस बड़े खेल का सच

डिजिटल पेमेंट और यूपीआई (UPI) ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, इसके पीछे छिपे खतरे भी उतने ही तेजी से बढ़ रहे हैं। आज कल 'फ्री ट्रायल' के नाम पर एक ऐसा खामोश खेल चल रहा है, जिसमें यूजर्स की जेब से हर महीने चुपचाप छोटी-छोटी रकम निकाली जा रही है। हाल ही में मुंबई के एक मामले ने इस पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है, जिससे हर यूपीआई यूजर को सतर्क होने की जरूरत है।

मुंबई के शख्स ने खोला 'फ्री ट्रायल' का राज

नायका (Nykaa) में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (ब्रांड मैनेजमेंट) और आईआईएम मुंबई के पूर्व छात्र लोकेश आहूजा ने लिंक्डइन पर एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया। उन्होंने अपनी मां को डिजिटल लेनदेन के लिए यूपीआई ऐप का इस्तेमाल करना सिखाया था। एक दिन जब वह अपनी मां का फोन चेक कर रहे थे, तो उन्होंने पाया कि फोन में आधा दर्जन से ज्यादा 'ऑटोपे मैंडेट' (AutoPay Mandates) एक्टिव थे। जब उन्होंने अपनी मां से पूछा कि क्या उन्होंने कोई सर्विस सब्सक्राइब की है, तो उनका जवाब था- "कुछ नहीं।"

'पहला महीना फ्री' का खतरनाक जाल

जांच करने पर लोकेश को पता चला कि ये सभी ऑटोपे मैंडेट अलग-अलग ऐप्स के 'फ्री ट्रायल' (Free Trial Offers) का नतीजा थे। कंपनियां शुरुआत में 30 दिनों के लिए ₹0 का ऑफर देती हैं, लेकिन इसी दौरान वे छिपकर हर महीने ऑटोमैटिक पैसे काटने की अनुमति (AutoPay Permission) भी ले लेती हैं। जैसे ही फ्री ट्रायल खत्म होता है, बिना किसी अलर्ट के आपके बैंक अकाउंट से पैसे कटने शुरू हो जाते हैं।

छोटी रकम, बड़ा धोखा: क्यों नहीं जाता हमारा ध्यान?

लोकेश आहूजा ने इस सिस्टम की सबसे बड़ी चालाकी की ओर इशारा किया। उनका कहना है कि ऐप्स जानबूझकर ₹79 जैसी छोटी रकम काटते हैं। दिनभर में होने वाले दर्जनों छोटे-मोटे यूपीआई ट्रांजैक्शन के बीच यह रकम आसानी से छिप जाती है। बैंक स्टेटमेंट में भी यह आम खर्च जैसा दिखता है, इसलिए यूजर्स का इस पर ध्यान ही नहीं जाता और महीनों तक उनकी जेब कटती रहती है।

असल प्रोडक्ट सर्विस नहीं, बल्कि 'ऑटोपे मैंडेट' है

आहूजा ने आगाह करते हुए बताया कि इन फ्री ट्रायल का असली मकसद आपको सर्विस देना नहीं, बल्कि आपसे 'ऑटोपे मैंडेट' बनवाना होता है। उन्होंने बेहद सटीक बात कही कि एक समय था जब माता-पिता बच्चों के सड़क पार करने को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन आज के डिजिटल युग में बच्चे अपने माता-पिता के 'इंटरनेट पार करने' (ऑनलाइन सुरक्षा) को लेकर परेशान रहते हैं। इसलिए, अपने और अपने परिवार के यूपीआई ऐप्स में जाकर तुरंत 'AutoPay' या 'Mandate' सेक्शन चेक करें और अनावश्यक सब्सक्रिप्शन को रद्द करें।

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