होर्मुज के बाद अब 'बाब अल-मंदेब' बंद करने की धमकी: क्या आसमान छूएंगे पेट्रोल और गैस के दाम? जानें हूती विद्रोहियों का नया ऐलान
नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने से पहले से ही वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कर रही दुनिया के सामने अब एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों (अंसार अल्लाह) ने सऊदी अरब के खिलाफ 'अरब सागर और लाल सागर की नाकेबंदी' करने की चेतावनी जारी कर दी है।
हूतियों का दावा है कि सऊदी अरब के नेतृत्व में सना (Sanaa) एयरपोर्ट पर किए गए हालिया हवाई हमलों के जवाब में यह कदम उठाया जा रहा है। यदि यह नाकेबंदी प्रभावी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और एलएनजी (LNG) गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आ सकता है।
होर्मुज के बाद क्यों सबसे अहम है 'बाब अल-मंदेब' (Bab el-Mandeb)?
लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण समुद्री 'चोकपॉइंट' (Chokepoint) माना जाता है:
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10% ग्लोबल फ्यूल सप्लाई का रास्ता: सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल शिपमेंट का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है।
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सऊदी अरामको का मुख्य रूट: होर्मुज के विकल्प के तौर पर सऊदी अरब अपनी राष्ट्रीय तेल कंपनी 'अरामको' के 70% तेल का निर्यात 746 मील लंबी 'पेट्रोलीन' (East-West Pipeline) के जरिए लाल सागर तक पहुंचाकर यहीं से टैंकरों में लोड करता है।
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दोहरे संकट में घिरी दुनिया: होर्मुज की ओर से 20% और बाब अल-मंदेब की ओर से 10% आपूर्ति प्रभावित होने से दुनिया भर में कुल 30 प्रतिशत फ्यूल सप्लाई ठप होने का सीधा जोखिम बन गया है।
सऊदी जहाजों को निशाना बनाने का ऐलान
हूती मीडिया दफ्तर के उप प्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सऊदी अरब के "दुश्मन जहाजों" के लिए बाब अल-मंदेब के रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
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तनाव का कारण: हूतियों ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब पिछले 10 वर्षों से यमन की जनता पर अनुचित नाकेबंदी थोप रहा है, जिसका जवाब अब 'आंख के बदले आंख' की नीति से दिया जाएगा।
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जहाजों पर हमलों की आशंका: बाब अल-मंदेब का दक्षिणी प्रवेश मार्ग बेहद संकरा है। हूती विद्रोही इससे पहले भी लाल सागर में 100 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले कर चुके हैं।
पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर में मालवाहक जहाजों और टैंकरों की आवाजाही ठप होती है, तो जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। इससे:
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मालभाड़ा (Freight Cost) और बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी होगी।
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भारत सहित यूरोपीय और एशियाई देशों में कच्चे तेल, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस (LPG/LNG) की उपलब्धता प्रभावित होगी और कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं।