ब्राजील चुनाव में नाटकीय मोड़: लूला से हार के बाद अमेरिका भागे बोल्सोनारो, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ी धज्जियां
लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आते ही एक बार फिर अभूतपूर्व राजनीतिक और कानूनी बवंडर खड़ा हो गया है। मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा के हाथों कड़े चुनावी मुकाबले (रनऑफ) में पराजय झेलने के बाद दक्षिणपंथी उम्मीदवार और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो ने औपचारिक रूप से अपनी हार स्वीकार करने के बजाय गुपचुप तरीके से देश छोड़ दिया है। वे अपने परिवार के साथ अमेरिका के फ्लोरिडा (मियामी) पहुंच चुके हैं।
ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को लेकर 24 घंटे के भीतर पासपोर्ट सरेंडर करने के सख्त आदेश दिए जाने के बावजूद, इस तरह उनका देश छोड़कर भाग जाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है। ब्राजील की चुनावी राजनीति में यह घटनाक्रम ठीक चार साल पहले की उस ऐतिहासिक घटना की हूबहू पुनरावृत्ति जैसा नजर आ रहा है, जब फ्लावियो के पिता और पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो ने भी 2022 में लूला से चुनाव हारने के बाद सत्ता हस्तांतरण से ठीक पहले अमेरिका का रुख किया था।
'यह शर्मनाक और कायरतापूर्ण है': राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा का तीखा हमला
राजधानी ब्रासीलिया में अपने ऐतिहासिक चौथे राष्ट्रपति कार्यकाल की जीत का जश्न मना रहे राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने जब फ्लावियो बोल्सोनारो के अचानक अमेरिका भागने की खबर सुनी, तो उन्होंने तीखी और सीधी प्रतिक्रिया व्यक्त की। लूला ने इस कदम को ब्राजील के लोकतंत्र और न्यायिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा करार देते हुए इसे 'शर्मनाक' (Shameful) बताया।
लूला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को जनता के फैसले और देश की अदालतों का सामना करने का साहस होना चाहिए था। यदि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया था, तो उन्हें ब्राजील में रुककर अपनी बेगुनाही साबित करनी चाहिए थी, न कि अदालत के आदेशों की अवहेलना करते हुए पिछले दरवाजे से विदेश भाग जाना चाहिए था। लूला ने यह भी आरोप लगाया कि बोल्सोनारो परिवार हमेशा से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और सजा से बचने के लिए विदेशी ताकतों की शरण में जाने की फितरत रखता है।
सुप्रीम कोर्ट का 24 घंटे का अल्टीमेटम और पासपोर्ट कैंसिलेशन का पेंच
फ्लावियो बोल्सोनारो के देश छोड़ने का पूरा घटनाक्रम ब्राजील की न्यायपालिका के साथ उनके सीधे टकराव से जुड़ा हुआ है। चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद ब्राजील के फेडरल सुप्रीम कोर्ट के चर्चित जस्टिस अलेक्जेंड्रे डी मोरेस ने एक आपातकालीन आदेश जारी किया था। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग और बेटिंग कंपनियों से जुड़े सैकड़ों मिलियन पाउंड के संदिग्ध लेन-देन की जांच (जिसमें वकील विलर टोमाज़ की भूमिका संदिग्ध है) के सिलसिले में फ्लावियो को अपने सभी पासपोर्ट—जिसमें उनका राजनयिक पासपोर्ट भी शामिल है—24 घंटे के भीतर जमा करने का निर्देश दिया था।
अदालत को यह पुख्ता खुफिया आशंका थी कि बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधन मौजूद होने के कारण वे जांच से बचने के लिए ब्राजील से फरार हो सकते हैं। जस्टिस मोरेस की डेडलाइन पूरी होने के बाद जब उन्होंने पासपोर्ट जमा नहीं किए, तो संघीय पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने मंगलवार को उनके पासपोर्ट औपचारिक रूप से रद्द कर दिए। लेकिन इसके बावजूद वे परिवार समेत विमान में सवार होकर अमेरिका पहुंचने में कामयाब रहे। ब्राजील के भीतर अब यह गंभीर जांच का विषय बन गया है कि ट्रैवल बैन और कानूनी बंदिशों के बावजूद वे देश की सीमाओं को लांघने में कैसे सफल हुए।
पिता जेयर बोल्सोनारो की सजा और 'तख्तापलट' की साया में बीता चुनाव
इस पूरे चुनाव की पृष्ठभूमि ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के पिछले विवादों से गहराई से प्रभावित रही है। जेयर बोल्सोनारो को 2022 में चुनावी हार के बाद सैन्य तख्तापलट की साजिश रचने और सरकारी इमारतों पर हुए हिंसक हमलों को बढ़ावा देने के जुर्म में अदालत द्वारा 27 साल की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है और वे वर्तमान में नजरबंद हैं। जेयर बोल्सोनारो के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगने के बाद उनके सबसे बड़े बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो दक्षिणपंथी लिबरल पार्टी (PL) के मुख्य चेहरे के रूप में उभरे थे।
पहले चरण के मतदान में अप्रत्याशित प्रदर्शन करने के बाद फ्लावियो दूसरे दौर में लूला से पार नहीं पा सके। लूला डा सिल्वा ने 6.4 करोड़ से अधिक मत हासिल करते हुए फ्लावियो (करीब 6 करोड़ वोट) को लगभग 44 लाख मतों के अंतर से शिकस्त दी। हार सामने दिखते ही फ्लावियो ने चुनाव नतीजों पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदान के समय को दो घंटे बढ़ाए जाने के फैसले को आधार बनाकर नतीजों को रद्द कराने की कानूनी धमकी दी। हालांकि, उनकी अपनी ही पार्टी 'लिबरल पार्टी' ने लूला की जीत को औपचारिक मान्यता देकर खुद को उनके इस रुख से अलग कर लिया, जिससे वे राजनीतिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए।
वाशिंगटन और ब्रासीलिया के बीच कूटनीतिक तनाव की नई चिंगारी
फ्लावियो बोल्सोनारो के अमेरिका पहुंचने और वहां का वीजा मिलने की खबरों ने वाशिंगटन और ब्रासीलिया के द्विपक्षीय संबंधों में भी नई खटास पैदा कर दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से संकेत मिले हैं कि उन्हें और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ब्राजील के चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए बिना किसी सबूत के इसे 'धांधली वाला चुनाव' करार दे दिया।
लूला प्रशासन ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा है कि किसी भगोड़े और अदालत द्वारा वांटेड नेता को राजनीतिक पनाह देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रत्यर्पण संधियों के खिलाफ है। आने वाले दिनों में ब्राजील की शीर्ष अदालत और विदेश मंत्रालय अमेरिका से फ्लावियो के प्रत्यर्पण (Extradition) की औपचारिक मांग कर सकते हैं। 81 वर्ष की दहलीज पर खड़े लूला डा सिल्वा जहां 5 जनवरी 2027 को अपने चौथे कार्यकाल की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं बोल्सोनारो परिवार का यह नया पलायन ब्राजील में लोकतंत्र, ध्रुवीकरण और न्यायपालिका के वर्चस्व की लड़ाई को एक नए अंतरराष्ट्रीय मोड़ पर ले आया है।