हूती विद्रोहियों ने फिर तेज किए हमले: सऊदी अरब को बनाया निशाना, दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन

हूती विद्रोहियों ने फिर तेज किए हमले: सऊदी अरब को बनाया निशाना, दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और अस्थिरता के बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए अपने हमलों का दायरा बढ़ा दिया है। लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को लगातार निशाना बना रहे हूतियों ने अब सीमा पार सऊदी अरब के रणनीतिक और सीमावर्ती ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और विस्फोटक ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं। हालांकि सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन इस ताजा हमले ने रियाद और सना के बीच चल रही नाजुक संघर्ष विराम वार्ताओं और क्षेत्रीय शांति प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीमावर्ती इलाकों और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

सैन्य सूत्रों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने यमन के अपने नियंत्रण वाले उत्तरी इलाकों से सऊदी अरब के दक्षिणी प्रांतों—विशेष रूप से जजान, असीर और नजरान की दिशा में कई मिसाइलें और ड्रोन दागे।

सऊदी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी शुरुआती ब्योरे के मुताबिक, सऊदी रॉयल एयर डिफेंस ने अपने पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को सक्रिय करते हुए सऊदी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मिसाइलों को नष्ट कर दिया। हमले के कारण सीमावर्ती इलाकों में कुछ समय के लिए सायरन बजने लगे और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मलबे के गिरने से सीमाई क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है।

हूती विद्रोहियों का रुख: 'गाजा और लेबनान के समर्थन में जारी रहेंगे हमले'

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने सऊदी अरब के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया है। हूतियों का कहना है कि जब तक इजरायल गाजा और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह बंद नहीं करता और यमन पर पश्चिमी देशों के हवाई हमले नहीं रुकते, तब तक उनके ये अभियान जारी रहेंगे।

हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब को आगाह किया है कि वह अमेरिका और इजरायल के साथ किसी भी प्रकार के सुरक्षा गठबंधन या हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति न दे, अन्यथा सऊदी के तेल बुनियादी ढांचे और आर्थिक केंद्रों को भी सीधे निशाने पर लिया जा सकता है।

सऊदी अरब की शांति वार्ताओं को लगा बड़ा झटका

यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब सऊदी अरब यमन में लंबे समय से चले आ रहे गृहयुद्ध से पूरी तरह बाहर निकलने और हूतियों के साथ एक स्थायी शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने की कोशिशों में जुटा था।

सऊदी अरब अपने महत्वाकांक्षी आर्थिक विजन (Vision 2030) और मेगा प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित रखने के लिए सीमा पर स्थिरता चाहता है। लेकिन हूतियों के इस आक्रामक रुख ने रियाद के सामने सुरक्षा की नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान के साथ बेहतर होते संबंधों के बावजूद हूती विद्रोही अपनी क्षेत्रीय स्वायत्तता दिखाने और दबाव बनाने के लिए सऊदी ठिकानों को फिर से निशाना बना रहे हैं।

लाल सागर से लेकर खाड़ी क्षेत्र तक मंडराया संकट

हूती हमलों की इस नई लहर ने पूरे पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर जोखिम और बढ़ा दिया है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में पहले से ही वैश्विक मालवाहक जहाजों की आवाजाही प्रभावित है, जिसके चलते जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

अब सऊदी अरब की मुख्य भूमि पर दोबारा मिसाइल हमलों की शुरुआत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन बाधित होने की आशंकाएं गहरा गई हैं। संयुक्त राष्ट्र और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कड़ी निंदा करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है।

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