'मुझ पर इंटरनेट पर भद्दे हमले किए गए, ऐसा मत करो...': भारतीयों की ट्रोलिंग से भड़के ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो, बोले- मोदी और ट्रंप खुद सुलझा लेंगे मामला

'मुझ पर इंटरनेट पर भद्दे हमले किए गए, ऐसा मत करो...': भारतीयों की ट्रोलिंग से भड़के ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो, बोले- मोदी और ट्रंप खुद सुलझा लेंगे मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार पीटर नवारो (Peter Navarro) ने भारत की व्यापार नीतियों और रूस से तेल खरीद पर अपने बयानों के बाद सोशल मीडिया पर हुई जबरदस्त प्रतिक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जताई है। नवारो ने दावा किया है कि भारत और भारतीय मूल के इंटरनेट यूज़र्स ने सोशल मीडिया पर उन पर सामूहिक रूप से डिजिटल हमला (Firebombed) किया। वॉशिंगटन में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए ट्रंप के शीर्ष रणनीतिकार ने कहा कि अमेरिका में इस तरह से मुद्दों को हल नहीं किया जाता है और भारतीयों को किसी के खिलाफ इस तरह का आक्रामक रवैया नहीं अपनाना चाहिए।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब पीटर नवारो ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर भारत की विदेश और व्यापार नीतियों को लेकर सिलसिलेवार तीखे हमले किए थे। नवारो ने भारत द्वारा रूस से रियायती दरों पर खरीदे जा रहे कच्चे तेल की आलोचना करते हुए भारत को 'क्रेमलिन का धोबीघर' (Laundromat for Kremlin) करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत सस्ते रूसी तेल को रिफाइन करके वैश्विक बाजारों में बेच रहा है और इस व्यापार से मिलने वाला राजस्व रूस के सैन्य अभियान को हवा दे रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिकी निर्यात पर भारत द्वारा लगाए जाने वाले आयात शुल्कों को 'महाराजा टैरिफ' बताते हुए भारतीय व्यापार व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

हालांकि, विवाद तब और गहरा गया जब नवारो ने इस आर्थिक मुद्दे में जातिगत कोण जोड़ते हुए 'ब्राह्मणों' (Brahmins) पर आम भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफा कमाने का बेहद विवादास्पद आरोप जड़ दिया। उनके इस बयान के बाद भारत में भारी जनाक्रोश फैल गया था और विदेश मंत्रालय ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद भारतीय नेटिजन्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर नवारो को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया। उनके ट्वीट्स पर कम्युनिटी नोट्स (Community Notes) के जरिए फैक्ट-चेक लगाए गए और मीम्स व व्यंग्यात्मक पोस्ट्स के जरिए उनके दावों को खारिज कर दिया गया।

अपने ऊपर हुए इस सोशल मीडिया बैकलाश को याद करते हुए नवारो ने कहा, "करीब 6 से 8 महीने पहले मैंने फाइनेंशियल टाइम्स में एक लेख लिखा था, जिसमें तथ्यों के आधार पर यह बताया गया था कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से तेल व्यापार में शामिल नहीं था, लेकिन बाद में वह बड़े पैमाने पर इसमें शामिल हो गया। यद्यपि वह मुद्दा अब सुलझ चुका है, लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि उस वक्त इंटरनेट पर भारतीय महाद्वीप के लोगों ने मुझ पर शाब्दिक रूप से बमबारी (Firebombed) कर दी थी। मैं आप लोगों से बस यही कहना चाहूंगा—ऐसा मत करो। अमेरिका में समस्याओं को हल करने का यह तरीका नहीं है।"

'मोदी और ट्रंप के बीच बेहतरीन रिश्ते': नवारो ने भारत-अमेरिका तनाव पर दी ढील

अपनी नाराजगी व्यक्त करने के बाद पीटर नवारो ने भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों और शीर्ष नेतृत्व पर अपनी राय में नरमी दिखाई। जब उनसे भारत-अमेरिका के बीच जारी टैरिफ और व्यापारिक तनाव पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुखों के बीच संबंध बेहद मजबूत हैं और वे आपस में बातचीत करके हर मसले को सुलझाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

नवारो ने दोनों नेताओं के बीच केमिस्ट्री पर जोर देते हुए कहा, "जहां तक आपके सवाल का संबंध है, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत ही बेहतरीन और व्यावहारिक कामकाजी संबंध (Working Relationship) हैं। वे आपस में मिलकर इस समस्या का समाधान निकाल लेंगे, और यह मेरे या किसी अन्य अधिकारी के लिए उनके बीच आने का विषय नहीं है।" नवारो के इस बयान को कूटनीतिक हलकों में आक्रामक बयानबाजी से पीछे हटने और दोनों देशों के बीच जारी बातचीत के रास्ते को खुला रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सीनेट में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का द्वितीयक टैरिफ (Secondary Tariffs) लगाने से जुड़ा एक द्विपक्षीय विधेयक पारित हुआ है, जिससे भारत और चीन जैसे देशों पर दबाव बढ़ा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा पूर्व में भारत से आने वाले आयात पर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाने के फैसले के बाद दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापारिक वार्ताएं काफी संवेदनशील दौर से गुजर रही हैं।

दूसरी तरफ, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नवारो के पहले के सभी आरोपों को 'गलत, भ्रामक और जमीनी हकीकत से परे' बताकर पूरी तरह खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय का स्पष्ट रुख रहा है कि भारत द्वारा रूस से की जा रही तेल खरीद पूरी तरह से कानूनी, संप्रभु और देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करने के लिए है, जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों और प्रतिबंधों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन नहीं करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर भारतीय यूज़र्स द्वारा तथ्यपरक जवाब दिए जाने और कम्युनिटी नोट्स के माध्यम से भ्रामक दावों को उजागर किए जाने से अमेरिकी अधिकारियों को अहसास हुआ है कि भारत के खिलाफ कोई भी एकतरफा बयानबाज़ी अब आसानी से बिना जवाब दिए नहीं गुजर सकती। हालांकि, पीटर नवारो का ताजा रुख यह साफ दर्शाता है कि वाशिंगटन के अधिकारी भी यह भली-भांति समझते हैं कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप का सीधा संवाद ही भारत-अमेरिका के इस आर्थिक और रणनीतिक गतिरोध को समाप्त करने की असली कुंजी है।

Latest Posts