पाकिस्तान हुआ बेदम, लॉकडाउन के हालात: पेट्रोल ₹384 तो डीजल ₹415 के पार; तेल बचाने के लिए 4 दिन के वर्क-वीक की तैयारी

पाकिस्तान हुआ बेदम, लॉकडाउन के हालात: पेट्रोल ₹384 तो डीजल ₹415 के पार; तेल बचाने के लिए 4 दिन के वर्क-वीक की तैयारी

आर्थिक दिवालियापन के मुहाने पर खड़े पाकिस्तान की मुश्किलें एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। पश्चिम एशिया (खाड़ी क्षेत्र) में भड़के सैन्य तनाव, लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर संकट और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइनों पर हमलों के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आए भूचाल ने इस्लामाबाद की कमर तोड़ दी है। देश में विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत के बीच ईंधन का ऐसा जबर्दस्त अकाल पड़ा है कि सरकार को तेल की खपत पर लगाम लगाने के लिए अब कोविड और युद्ध काल की तर्ज पर 'स्मार्ट लॉकडाउन' लगाने पर विचार करने को मजबूर होना पड़ा है।

पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में मंगलवार रात नए सिरे से हुई भारी बढ़ोतरी के बाद पूरे मुल्क में हाहाकार मचा हुआ है। अवाम सड़कों पर उतरने की तैयारी में है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के हाथ-पांव फूल चुके हैं।

पेट्रोल ₹384 और डीजल ₹415 के पार, पंपों पर मची भगदड़

पेट्रोलियम डिवीजन द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के बाद पाकिस्तान में ईंधन के दाम ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं:

  • पेट्रोल की कीमत: ₹4.10 प्रति लीटर की ताजा बढ़ोतरी के बाद अब पेट्रोल ₹384.34 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

  • हाई-स्पीड डीजल (HSD): ₹6.41 की वृद्धि के साथ डीजल की दरें ₹415.83 प्रति लीटर के भयावह स्तर को पार कर चुकी हैं।

ईंधन की इस बेलगाम आग का असर सीधे तौर पर माल ढुलाई, खेती और आम जनता की रोजमर्रा की रसोई पर पड़ा है। लाहौर, कराची, पेशावर और रावलपिंडी के कई पेट्रोल पंपों पर सप्लाई रुकने की अफवाहों के चलते लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कई जगहों पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए हैं।

'स्मार्ट लॉकडाउन' का ब्लूप्रिंट: 4 दिन का हफ्ता और बाजारों पर पाबंदी

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा बुलाई गई उच्चस्तरीय आपात बैठक में ईंधन की खपत को फौरन कम करने के लिए कई कड़े प्रस्तावों पर मंथन किया गया है:

  1. 4 दिनों का वर्किंग वीक (Four-Day Work Week): सरकारी और निजी दफ्तरों में सप्ताह में सिर्फ 4 दिन काम कराने का प्रस्ताव है। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को पूर्ण अवकाश घोषित करने पर विचार चल रहा है ताकि सड़कों पर गाड़ियों का आवागमन 30-40% तक घटाया जा सके।

  2. वर्क फ्रॉम होम (WFH) और रोटेशनल ड्यूटी: कर्मचारियों के लिए रोटेशनल हाजिरी और ज्यादातर स्टाफ को घर से काम करने का निर्देश दिया जा सकता है।

  3. 50% सरकारी गाड़ियां होंगी ग्राउंड: मंत्रियों, सचिवों और प्रशासनिक अधिकारियों की 50 फीसदी सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने और उनके पेट्रोल कोटे में भारी कटौती की योजना है।

  4. बाजारों के समय में कटौती: बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हफ्ते में तीन दिन बंद रखने या रात 8 बजे से पहले ही पूरी तरह बंद करने का नियम लागू किया जा सकता है।

हालांकि विपक्ष और जनता के आक्रोश के डर से सरकार के कुछ मंत्री (जैसे मुसादिक मलिक और तारिक फजल चौधरी) कैमरे के सामने 'स्मार्ट लॉकडाउन' शब्द से इनकार कर इसे केवल 'राहत और बचत मंथन' बता रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार हालात हाथ से निकलते ही ये पाबंदियां लागू की जाएंगी।

बिजली संकट और एलएनजी का झटका: ब्लैकआउट का डर

ईंधन की कमी का सीधा असर पाकिस्तान के पावर सेक्टर पर पड़ा है। ऊर्जा मंत्री अवैस लेघारी के अनुसार, री-गैसीफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) की वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने से स्पॉट मार्केट में कार्गो के दाम 23.25 डॉलर प्रति MMBtu तक उछल गए हैं।

पाकिस्तान सरकार के पास महंगे दामों पर गैस खरीदने के लिए डॉलर मौजूद नहीं हैं। यदि घरेलू गैस और कोयले से बिजली उत्पादन को खींचा नहीं गया, तो मुल्क भर में रोजाना 12 से 16 घंटे की भीषण लोड शेडिंग (बिजली कटौती) का खतरा पैदा हो जाएगा।

सड़कों पर उतरने की चेतावनी, घिरी शहबाज सरकार

एक तरफ आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान बेदम हो चुका है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक तापमान उबल रहा है।

  • जमात-ए-इस्लामी का अल्टीमेटम: प्रमुख राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी ने शहबाज सरकार को चेतावनी दी है कि यदि पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे देशव्यापी चक्काजाम और विशाल धरने शुरू करेंगे।

  • सब्सिडी का झुनझुना: सरकार ने मोटरसाइकिल सवारों को हफ्ते में 5 लीटर और 800cc तक की छोटी कारों को 10 दिन में 10 लीटर रियायती तेल देने की 'टारगेटेड सब्सिडी' की घोषणा की है, लेकिन खुद मंत्रियों का मानना है कि यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है और इससे जनता का गुस्सा शांत नहीं होने वाला।

आईएमएफ (IMF) की कड़ी शर्तों के कारण सरकार सब्सिडी का बड़ा बोझ भी अपने खजाने पर नहीं ले सकती। ऐसे में मजबूर शहबाज शरीफ के पास आर्थिक गतिविधियों को धीमा करके 'लॉकडाउन' जैसी बंदिशें थोपने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है।

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