Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान को लगा एक और बड़ा झटका, UAE के बाद अब इस मुस्लिम देश ने भी निकाले करोड़ों डॉलर; डिफॉल्ट का खतरा

Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान को लगा एक और बड़ा झटका, UAE के बाद अब इस मुस्लिम देश ने भी निकाले करोड़ों डॉलर; डिफॉल्ट का खतरा

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया (खाड़ी क्षेत्र) में भड़के भीषण युद्ध की सीधी मार अब पाकिस्तान की पहले से ही वेंटिलेटर पर चल रही अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगी है। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण पाकिस्तान से विदेशी पूंजी तेजी से बाहर (Outflow) जा रही है, जिससे देश के सामने एक बार फिर से आर्थिक डिफॉल्ट (Default) का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

बहरीन ने पाकिस्तानी बॉन्ड्स से निकाले 3 करोड़ डॉलर

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, एक और खाड़ी देश बहरीन ने पाकिस्तानी घरेलू बॉन्ड्स से अपने 3 करोड़ डॉलर (करीब 30 मिलियन USD) का निवेश वापस खींच लिया है।

  • ट्रेजरी बिल से निकासी: बहरीन के निवेशकों ने 2.1 करोड़ डॉलर ट्रेजरी बिल से निकाले हैं।

  • इन्वेस्टमेंट बॉन्ड्स से निकासी: इसके अलावा, 90 लाख डॉलर पाकिस्तान इन्वेस्टमेंट बॉन्ड्स (PIBs) से वापस ले लिए गए हैं।

क्यों डर रहे हैं बहरीन के निवेशक? बहरीन में अमेरिका की बहुत बड़ी सैन्य मौजूदगी (US Military Base) है और वर्तमान युद्ध में यह ईरानी मिसाइल व ड्रोन हमलों के मुख्य निशानों में से एक बना हुआ है। इसी कारण वहां के निवेशकों ने अपने फंड को सुरक्षित करने के लिए पाकिस्तान से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।

यूएई (UAE) ने भी खींचे थे हाथ, सऊदी अरब बना संकटमोचक

खाड़ी संकट की शुरुआत होते ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका देते हुए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के खाते में जमा अपने 3.5 अरब डॉलर तुरंत वापस निकाल लिए थे। इस अचानक हुई निकासी से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने की कगार पर पहुंच गया था। हालांकि, सऊदी अरब ने तुरंत इस भारी रकम की भरपाई करते हुए पाकिस्तान को चालू खाते के संकट (Current Account Crisis) और तत्काल डिफॉल्ट होने से बचा लिया।

विदेशी निवेश पूरी तरह ठप, लक्जमबर्ग से आया मामूली फंड

चालू वित्त वर्ष (2026-27) के शुरुआती 10 दिनों की रिपोर्ट पाकिस्तान के लिए बेहद निराशाजनक है:

  • रिटर्न ज्यादा, फिर भी भरोसा नहीं: पाकिस्तान के ट्रेजरी बिल विकासशील देशों में सबसे अधिक 11.5% तक का बंपर रिटर्न दे रहे हैं, लेकिन भारी जोखिम के चलते वैश्विक निवेशक यहां पैसा लगाने से डर रहे हैं।

  • केवल 40 लाख डॉलर का निवेश: चालू वित्त वर्ष के पहले 10 दिनों में पूरे विश्व से केवल लक्जमबर्ग के जरिए महज 40 लाख डॉलर का ही मामूली विदेशी निवेश पाकिस्तान आया है। जबकि पिछले पूरे वित्त वर्ष (FY26) में पाकिस्तानी बॉन्ड्स से आधा अरब डॉलर (500 मिलियन USD) से अधिक की भारी निकासी दर्ज की गई थी।

रेमिटेंस पर संकट और 4% से नीचे रहेगी विकास दर

पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों और मुद्रा रणनीतिकारों ने देश को आगाह किया है कि वर्तमान परिस्थितियां बेहद चिंताजनक हैं:

  1. रेमिटेंस को झटका: अभी तक खाड़ी देशों में काम करने वाले पाकिस्तानी प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittance) पर युद्ध का सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन यदि युद्ध लंबा खिंचा तो यह जरिया भी बंद हो जाएगा।

  2. निर्यात पूरी तरह ठप: पाकिस्तानी निर्यातकों के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत होने के बाद से सप्लाई चेन टूट चुकी है। इसके अलावा देश के दो प्रांतों में आंतरिक सुरक्षा की गंभीर समस्याएं हैं, जिससे निर्यात (Export) पूरी तरह ठप हो गया है।

  3. रोजगार का संकट: आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियों में पाकिस्तान की जीडीपी (GDP) विकास दर 4% से काफी नीचे बनी रहेगी, जिससे देश के बेरोजगार युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा होने की कोई संभावना नहीं बची है।

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