EPS पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर: ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर 19 नवंबर को आ सकता है फैसला

EPS पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर: ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर 19 नवंबर को आ सकता है फैसला

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत संचालित कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के लाखों पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले 12 वर्षों (सितंबर 2014) से निर्धारित महज ₹1,000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन राशि में बढ़ोतरी को लेकर चल रही लंबी मांग पर अब फैसला होने की संभावना बन रही है।

ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की 240वीं अहम बैठक 19 नवंबर 2026 को गुजरात के गिर में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक के एजेंडे में ईपीएस के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन में संशोधन का मुद्दा प्रमुखता से शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक से पेंशनभोगी संगठनों और वरिष्ठ नागरिकों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

12 साल से ₹1,000 पर अटकी पेंशन: पेंशनर्स और ट्रेड यूनियनों की मुख्य मांगें

वर्तमान में ईपीएस के तहत पात्र पेंशनर्स को कम से कम ₹1,000 प्रति माह पेंशन मिलती है। सितंबर 2014 में केंद्र सरकार ने न्यूनतम पेंशन ₹1,000 तय की थी, लेकिन तब से लेकर अब तक मुद्रास्फीति और जीवन-यापन के खर्च में भारी इजाफा हो चुका है।

पेंशनभोगी संगठन (जैसे राष्ट्रीय संघर्ष समिति - NAC) और विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनें लंबे समय से सरकार और ईपीएफओ के समक्ष अपनी मांगें उठा रही हैं:

  1. न्यूनतम पेंशन ₹7,500 प्रति माह: यूनियनों का मुख्य तर्क है कि आज की महंगाई में बुजुर्गों के सामान्य राशन और दवाइयों का खर्च भी ₹1,000 में पूरा नहीं हो सकता, इसलिए इसे बढ़ाकर ₹7,500 किया जाए।

  2. महंगाई भत्ता (DA) का प्रावधान: पेंशन राशि को स्थिर रखने के बजाय सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर समय-समय पर महंगाई भत्ते से जोड़ा जाए।

  3. मुफ्त चिकित्सा सुविधा: बुजुर्ग पेंशनर्स और उनके जीवनसाथी के लिए आयुष्मान भारत या ईएसआईसी के तहत व्यापक चिकित्सा सुरक्षा दी जाए।

वेतन सीमा (Wage Ceiling) में हालिया बदलाव से जगी उम्मीद

हाल ही में केंद्र सरकार ने अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज की मासिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने का बड़ा कदम उठाया है। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

श्रम मंत्रालय ने पूर्व में यह संकेत दिया था कि वेतन सीमा और ईपीएस न्यूनतम पेंशन दोनों पहलुओं की वित्तीय व्यावहारिकता (Financial Viability) का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में 19 नवंबर की सीबीटी बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार के सामने वित्तीय चुनौती और संभावित विकल्प

पेंशन बढ़ाने के रास्ते में सबसे बड़ा पेंच वित्तीय बोझ का है। ईपीएफओ के पेंशन फंड में सरकार की ओर से भी अंशदान दिया जाता है। न्यूनतम पेंशन को सीधे ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने पर सरकारी खजाने और ईपीएस कॉर्पस पर अरबों रुपये का अतिरिक्त वार्षिक भार पड़ेगा।

वित्तीय जानकारों और सूत्रों का मानना है कि यदि बोर्ड सीधे ₹7,500 की मांग को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाता है, तो बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। इसमें न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹2,500 से ₹3,500 प्रति माह के बीच तय करने या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।

अंतिम निर्णय 19 नवंबर को होने वाली सीबीटी बैठक में विस्तृत वित्तीय रिपोर्ट और बोर्ड सदस्यों की सहमति के बाद ही सामने आएगा। देश के करीब 78 लाख से अधिक पेंशनधारक सांस रोके इस दिन का इंतजार कर रहे हैं।