ट्रंप की नाक के नीचे से हथियार निकाल रहा ईरान: यूरोप और चीन से मंगवाया 'मौत का सामान'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े प्रतिबंधों और पेंटागन की नौसैनिक नाकेबंदी के दावों के बीच एक चौंकाने वाला वैश्विक खुलासा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने सख्त अमेरिकी पहरे के बावजूद अंतरराष्ट्रीय हथियारों के बाजार में ऐसी गुप्त सुरंग बना रखी है, जिससे वह लगातार 'मौत का सामान' अपने देश पहुंचा रहा है। ट्रंप प्रशासन भले ही ईरान को पूरी दुनिया से अलग-थलग कर घुटनों पर लाने का दावा कर रहा हो, लेकिन तेहरान ने न केवल प्रतिबंधों को धता बताया, बल्कि यूरोप से लेकर एशिया तक फैले एक विशाल गुप्त नेटवर्क के जरिए मिसाइल, ड्रोन और घातक हथियारों के निर्माण के लिए जरूरी साजो-सामान हासिल कर लिया है।
5,000 से अधिक खुफिया एजेंसियां: तेहरान का 'पैरेलल ट्रेड' सिंडिकेट
रॉयटर्स की एक विस्तृत खोजी जांच में यह खुलासा हुआ है कि ईरान ने सैन्य हार्डवेयर और जरूरी पार्ट्स जुटाने के लिए 5,000 से ज्यादा नंबर वाली कोडित एजेंसियों और छद्म कंपनियों (Shell Companies) का जाल बिछा रखा है। इस समानांतर व्यापार प्रणाली को ईरान के अंदर 'ट्रस्टी' (मध्यस्थ) संभालते हैं। ये ट्रस्टी विदेशों में स्थित फर्जी कंपनियों के जरिए अवैध तेल की बिक्री से मिलने वाले पैसों का उपयोग करते हैं और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य उपकरण व पुर्जे खरीदते हैं। इस लेन-देन की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 97% से अधिक शिपमेंट बिना किसी आधिकारिक 'करेंसी ट्रांसफर' के सीधे विदेशी बैंकों में मौजूद नकदी के जरिए निपटाए गए, जिससे अमेरिकी बैंकिंग पाबंदियां पूरी तरह बेअसर साबित हुईं।
'MOD 346428' कोड का रहस्य: अकेले एक एजेंसी ने मंगाया 2.3 अरब डॉलर का माल
इस गुप्त खरीद प्रणाली का सबसे प्रमुख केंद्र ईरान का रक्षा मंत्रालय और उससे जुड़ी विशेष कोड वाली एजेंसियां हैं। आंकड़ों के अनुसार, केवल 'MOD 346428' के नाम से पहचानी जाने वाली एक एजेंसी ने जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच लगभग 2.3 अरब डॉलर (करीब 19,000 करोड़ रुपये) का सैन्य हार्डवेयर और दोहरा-उपयोग (Dual-Use) सामान आयात किया। आयात-निर्यात ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म 'इम्पोर्ट जीनियस' के डेटा से साफ हुआ है कि इस एजेंसी ने सीधे तौर पर उन औद्योगिक उपकरणों को हासिल किया, जो ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और घातक कामिकेज ड्रोनों की बॉडी तैयार करने और उन्हें सटीक मारक क्षमता देने के काम आते हैं।
यूरोप से लेकर एशिया तक 'मौत की सप्लाई चेन': जर्मनी, चीन और रूस के तार
ईरान तक यह घातक सामग्री जमीन, हवा और समंदर तीनों रास्तों से पहुंची। खुफिया रिपोर्टों में सबसे ज्यादा चिंता इस बात पर जताई गई है कि जिन आयातों के रिकॉर्ड मिले हैं, उनमें कई खेपों का मूल स्रोत यूरोप (विशेषकर जर्मनी), चीन, रूस और यहां तक कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दर्ज था।यह सामग्री कैस्पियन सागर के जरिए रूसी मालवाहक जहाजों से, मध्य एशिया के रास्तों से ट्रकों के जरिए, और चीन से एयर-कार्गो उड़ानों के जरिए तेहरान के सैन्य ठिकानों तक पहुंचाई गई। इसमें कंप्यूटर नियंत्रित सीएनसी लेथ मशीनें (CNC Lathes), इलेक्ट्रॉन-बीम फर्नेस, पार्टिकल एक्सेलरेटर और उच्च-स्तरीय विस्फोटक रसायन शामिल थे, जिन्हें कागजों पर असैन्य और औद्योगिक उद्देश्यों का दिखाकर आसानी से सीमा पार करा लिया गया।
ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक विफलता या पश्चिम का दोहरा रवैया?
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कई बार दावा किया था कि रूस या चीन से ईरान को कोई बड़ी सैन्य मदद नहीं मिल रही है और यदि ऐसा हुआ तो अमेरिका को तुरंत भनक लग जाएगी। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) और ट्रेजरी विभाग की तमाम पाबंदियों के बावजूद यूरोपीय तकनीक और चीनी पार्ट्स का तेहरान पहुंचना यह स्पष्ट करता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की निगरानी प्रणाली में भारी खामियां हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोहरे उपयोग वाले सामानों (Dual-Use Technologies) के वैश्विक निर्यात पर नकेल नहीं कसी जाती, तब तक ईरान अपने ड्रोन और मिसाइल कारखानों को चालू रखने के लिए इसी तरह अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट का फायदा उठाता रहेगा।