'हिंदुओं से नफरत तो चुनाव आते ही ढोंग क्यों?': राहुल गांधी के बयानों का वीडियो शेयर कर BJP का तीखा हमला
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा वैचारिक और राजनीतिक प्रहार करते हुए एक वीडियो संकलन जारी किया है। इस वीडियो में राहुल गांधी के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट और उनके पूर्व में दिए गए भाषणों के विवादित हिस्सों को एक साथ रखकर उन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया गया है। बैकग्राउंड में मशहूर गीत 'क्या हुआ तेरा वादा' के साथ पोस्ट किए गए इस वीडियो के जरिए भाजपा ने सवाल दागा कि अगर कांग्रेस नेतृत्व को सनातन और हिंदुत्व से इतनी नफरत है, तो फिर हर चुनाव के मुहाने पर आते ही हिंदू बनने और मंदिरों के चक्कर काटने का दिखावा क्यों किया जाता है? वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में जुबानी जंग छिड़ गई है।
वीडियो में क्या-क्या हैं राहुल गांधी के पुराने बयान?
भाजपा द्वारा साझा किए गए वीडियो क्लिप्स में राहुल गांधी द्वारा अलग-अलग मंचों और संसद में दिए गए भाषणों के हिस्से शामिल किए गए हैं:
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'हिंदुत्ववादियों को बाहर फेंकना होगा': एक भाषण में राहुल गांधी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि "हमें इन हिंदुत्ववादियों को एक बार फिर से सत्ता से बाहर फेंकना होगा।"
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'खुद को हिंदू कहने वाले हिंसा करते हैं': संसद में दिए गए उनके उस बयान को भी शामिल किया गया है जिसमें वे कहते दिखे कि "जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे 24 घंटे हिंसा, हिंसा, हिंसा... नफरत, नफरत, नफरत और असत्य, असत्य, असत्य में लगे रहते हैं।"
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मंदिरों में जाने और महिलाओं के उत्पीड़न पर टिप्पणी: वीडियो के एक अन्य हिस्से में राहुल गांधी यह कहते नजर आ रहे हैं कि "लोग मंदिरों में जाकर माथा टेकते हैं, देवी की पूजा करते हैं, लेकिन यही लोग बसों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अत्याचार करते हैं।"
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भगवान राम को 'पौराणिक' बताने वाला बयान: क्लिप में राहुल का वह अंश भी जोड़ा गया है जिसमें वे भगवान राम और पौराणिक चरित्रों के कालखंड को लेकर टिप्पणी करते दिख रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि इन बयानों से साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सनातन परंपरा और हिंदू समाज के प्रति किस तरह का दृष्टिकोण रखता है, और चुनाव आते ही उनका यह रुख केवल वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बदल जाता है।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम पर भाजपा का पलटवार: 'जब अपनी बारी थी तब क्या किया?'
यह हमला ऐसे समय में तेज हुआ है जब कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर 'जन महाभियोग' व रैलियों की रूपरेखा तैयार की है।
भाजपा ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं को इतिहास का हवाला देते हुए आईना दिखाया। भाजपा ने याद दिलाया कि कांग्रेस के दशकों लंबे शासनकाल में मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पूरी तरह से सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मनमाने फैसलों और सिफारिशों पर होती थी, जिसमें विपक्ष के नेता या किसी निष्पक्ष समिति की कोई औपचारिक भूमिका नहीं होती थी। भाजपा नेताओं ने कहा कि आज जब संसद द्वारा पारित कानून और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां हो रही हैं, तब चुनावी हार से हताश कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को तार-तार करने पर उतारू है।
संस्थाओं पर हमले और चुनावी हताशा का नैरेटिव
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी जब भी किसी राज्य या चुनाव में पराजय का सामना करते हैं, तो वे अपनी संगठनात्मक विफलताओं का आत्ममंथन करने के बजाय सीधे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), चुनाव आयोग और अब संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को निशाना बनाने लगते हैं। भाजपा ने दो-टूक कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाले वही लोग हैं जो अपनी सुविधानुसार कभी सेना के शौर्य पर सवाल उठाते हैं, कभी न्यायपालिका को कटघरे में खड़ा करते हैं और अब चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्था के खिलाफ जनमत भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
कांग्रेस का रुख: 'संवैधानिक मर्यादा और वोट के अधिकार की लड़ाई'
दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी खेमे का कहना है कि यह पूरा विवाद भाजपा द्वारा जनता के असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की सुनियोजित साजिश है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि राहुल गांधी ने हमेशा 'हिंदुत्व की विभाजनकारी राजनीति' और 'सच्चे हिंदू धर्म' के बीच के फर्क को स्पष्ट किया है, जिसे भाजपा तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। कांग्रेस ने दोहराया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) में कथित विसंगतियों और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को लेकर उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के संविधान और नागरिक के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए है। बहरहाल, भाजपा के इस वीडियो हमले और सीईसी चयन पर उठे सवालों ने आगामी राजनीतिक मुकाबलों से पहले माहौल को और गरमा दिया है।