चंडीगढ़ दौरा खत्म, 3.25 फिटमेंट फैक्टर से न्यूनतम बेसिक पे ₹58,500 करने की मांग; अब बेंगलुरु में सीधी बात
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पुनरीक्षण को लेकर गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की हलचल देश भर में तेज हो गई है। आयोग के अध्यक्ष और पैनल सदस्यों का तीन दिवसीय चंडीगढ़ दौरा शनिवार को आधिकारिक रूप से संपन्न हो गया। इस दौरे के दौरान आयोग ने पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के विभिन्न कर्मचारी संगठनों, विभागीय प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े प्रमुख हितधारकों के साथ कई दौर की गहन बैठकें कीं। इन सभी बैठकों में सबसे अधिक चर्चा और जोर कर्मचारियों के फिटमेंट फैक्टर को 3.25 तक बढ़ाने की मांग पर रहा।
चंडीगढ़ प्रवास के दौरान पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) और नर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन (NWA) के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने अपनी प्राथमिकताओं का विस्तृत मांग-पत्र प्रस्तुत किया। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग द्वारा तय किया गया 2.57 का फिटमेंट फैक्टर आज के दौर में महंगाई, आवास, बच्चों की उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती लागत के सामने पूरी तरह अपर्याप्त साबित हो रहा है। ऐसे में वेतनमान के युक्तिकरण के लिए 3.25 का फिटमेंट फैक्टर लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹58,500 होने का गणित
यदि केंद्र सरकार और वेतन आयोग कर्मचारी यूनियनों की 3.25 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश को स्वीकार कर लेते हैं, तो केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 प्रति माह तय की गई थी। 3.25 के गुणांक के आधार पर यह न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे ₹58,500 हो जाएगी, जिससे एंट्री-लेवल कर्मियों के मूल वेतन में सीधे ₹40,500 की मासिक वृद्धि होगी। इसी प्रकार पे-मैट्रिक्स के सभी 18 स्तरों पर भारी वेतन संशोधन दर्ज होगा।
पे-मैट्रिक्स के उच्च स्तरों पर प्रभाव का विश्लेषण करें तो लेवल 2 पर वर्तमान ₹19,900 का बेसिक पे बढ़कर ₹64,675 हो जाएगा, जिसमें ₹44,775 की शुद्ध बढ़ोतरी होगी। लेवल 3 कर्मियों का वेतन ₹21,700 से उछलकर ₹70,525 पर पहुंच जाएगा। मध्य स्तर के कर्मचारियों की बात करें तो लेवल 6 के कर्मियों की मौजूदा बेसिक पे ₹35,400 से बढ़कर ₹1,15,050 हो जाएगी। प्रशासनिक और वरिष्ठ अधिकारियों के संदर्भ में लेवल 10 का मूल वेतन ₹56,100 से बढ़कर ₹1,82,325 और कैबिनेट सचिव स्तर के शीर्ष पद यानी लेवल 18 पर वर्तमान ₹2,50,000 की बेसिक सैलरी ₹8,12,500 तक पहुंच सकती है, जो ₹5,62,500 की अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाती है।
नर्सिंग संवर्ग के लिए लेवल 10 एंट्री-पे की मांग, मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के बराबर लाने का प्रस्ताव
चंडीगढ़ में आयोजित बैठक के दौरान नर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कार्मिकों के लिए विशेष वेतनमान की मांग प्रमुखता से उठाई। एसोसिएशन ने आयोग से आग्रह किया कि नर्सिंग अधिकारियों के लिए एंट्री-लेवल पे को अपग्रेड करके पे-मैट्रिक्स के लेवल 10 पर निर्धारित किया जाए। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया कि पिछले कुछ वर्षों में नर्सिंग संवर्ग की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) से संशोधित करके अनिवार्य रूप से बीएससी नर्सिंग (BSc Nursing) कर दिया गया है। जब भर्ती मानकों को उच्चीकृत किया गया है, तो शुरुआती वेतनमान भी उसके अनुरूप होना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के उन पूर्व दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया गया, जिनमें सिविल अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) के समकक्ष वेतन और भत्ते प्रदान करने की बात कही गई थी। नर्सेस एसोसिएशन ने आयोग को अवगत कराया कि चौबीसों घंटे चलने वाली इमरजेंसी ड्यूटी, संक्रमण का निरंतर जोखिम और अत्यधिक कार्यभार के कारण स्वास्थ्य कर्मियों को सामान्य प्रशासनिक कर्मचारियों से अलग श्रेणी में रखकर बेहतर वित्तीय सुरक्षा दी जानी चाहिए। एसोसिएशन ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट में उनकी मांगों को पूरा स्थान मिलेगा।
10 महीने में कई राज्यों का दौरा पूरा, अब 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में होगी निर्णायक वार्ता
8वें वेतन आयोग के पैनल का गठन हुए 10 महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस निर्धारित समयावधि में आयोग ने पूरे भारत के विभिन्न भौगोलिक और प्रशासनिक क्षेत्रों का दौरा कर व्यापक जनसुनवाई की है। इससे पहले आयोग की उच्चस्तरीय टीम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, रणनीतिक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरकारी कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों और पेंशनर्स संगठनों से विस्तृत सुझाव प्राप्त कर चुकी है। चंडीगढ़ के सफल दौरे के बाद अब आयोग की अगली बड़ी बैठक का केंद्र दक्षिण भारत का प्रमुख प्रशासनिक व तकनीकी शहर बेंगलुरु बनने जा रहा है।
आयोग 7 और 8 अक्टूबर को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करेगा। इस बैठक में दक्षिण भारतीय राज्यों के केंद्रीय विभागों, रक्षा अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिक प्रतिष्ठानों और रेलवे यूनियनों के प्रतिनिधि सीधे आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। वेतन निर्धारण के अलावा पुरानी पेंशन बहाली (OPS बनाम NPS/UPS), ग्रेच्युटी की सीमा में वृद्धि, परिवहन व चिकित्सा भत्तों के पुनरीक्षण जैसे अहम मुद्दों पर बेंगलुरु में सीधी बात होगी। बेंगलुरु बैठक से निकलने वाले निष्कर्ष आयोग की अंतरिम और अंतिम सिफारिशों को तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।