हरिद्वार हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करती महिला का अश्लील, श्रीगंगा सभा भड़की; सनातन धर्म और मर्यादा पर आघात बताकर पुलिस से मांगी कड़ी कार्रवाई

हरिद्वार हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करती महिला का अश्लील, श्रीगंगा सभा भड़की; सनातन धर्म और मर्यादा पर आघात बताकर पुलिस से मांगी कड़ी कार्रवाई

विश्व प्रसिद्ध धर्मनगरी हरिद्वार के सबसे पावन तीर्थ स्थल हर की पैड़ी से एक बेहद हैरान करने वाला और निंदनीय मामला सामने आया है। यहां गंगा स्नान कर रही एक महिला श्रद्धालु के शालीन वीडियो के साथ आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल और डीपफेक तकनीक के जरिए छेड़छाड़ कर उसे सेमीन्यूड (आपत्तिजनक) बनाकर इंटरनेट पर वायरल कर दिया गया। जैसे ही यह आपत्तिजनक क्लिप विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैली, करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीर्थ क्षेत्र का प्रबंधन संभालने वाली प्रमुख संस्था 'श्रीगंगा सभा' ने तीखा विरोध दर्ज कराया है और इसे तीर्थ की पवित्रता और सनातन धर्म पर सीधा आघात करार देते हुए पुलिस प्रशासन से दोषियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, वीडियो की पीड़ित महिला ने भी सामने आकर इसे कूटरचित साजिश बताते हुए साइबर क्राइम सेल में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।

मालवीय घाट का था मूल वीडियो, शरारती तत्वों ने AI से बदले कपड़े

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक महिला गंगा नदी में स्नान करती और डुबकी लगाती नजर आ रही थी, लेकिन वीडियो में उसके कपड़े बेहद आपत्तिजनक और सेमीन्यूड दिखाए गए थे। फुटेज की पड़ताल में श्रीगंगा सभा ने पुष्टि की कि यह दृश्य हर की पैड़ी क्षेत्र स्थित मालवीय घाट का है।

शुरुआती जांच और फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स में इस पूरे कृत्य का खौफनाक सच उजागर हुआ। दरअसल, महिला श्रद्धालु घाट पर पूरी मर्यादा के साथ पीले रंग का सलवार-सूट पहनकर स्नान कर रही थी। किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसका स्नान करते हुए वीडियो मोबाइल से रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर डाला। इसके बाद शरारती और विकृत मानसिकता वाले तत्वों ने मूल वीडियो को डाउनलोड किया और जनरेटिव एआई व डीपफेक टूल्स का इस्तेमाल करके महिला के पूरे कपड़ों को डिजिटल रूप से हटाकर उसे अंडरगारमेंट्स व सेमीन्यूड कपड़ों में तब्दील कर दिया। दोनों वीडियो के फ्रेम-दर-फ्रेम मिलान में बैकग्राउंड में मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और पानी के बहाव की गति एक जैसी पाई गई, जिससे साफ हो गया कि वीडियो 100% एआई-मैनिपुलेटेड है।

पीड़िता ने बयां किया दर्द, साइबर ब्रांच में दर्ज कराई एफआईआर

वीडियो तेजी से फैलने और इंटरनेट पर तरह-तरह की अभद्र टिप्पणियां होने के बाद वीडियो में दिख रही महिला श्रद्धालु खुद सोशल मीडिया पर सामने आई। महिला ने अपनी पहचान सोनम यादव के रूप में बताते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया।

पीड़िता ने स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा आपत्तिजनक वीडियो उसका वास्तविक रूप नहीं है, बल्कि इसे एआई के जरिए दुर्भावनापूर्ण तरीके से एडिट किया गया है। उसने बताया कि वह पूरे कपड़ों में पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाने गई थी। पीड़िता ने जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से हाथ जोड़कर अपील की कि इस एडिटेड वीडियो को आगे शेयर न किया जाए और जिसने भी इसे पोस्ट किया है वह तुरंत डिलीट कर दे। पीड़िता ने यह भी जानकारी दी कि उसने अपनी मर्यादा और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले इस कृत्य के खिलाफ हरियाणा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है।

श्रीगंगा सभा अध्यक्ष का कड़ा बयान: 'तीर्थ को बदनाम करने और धर्म पर सीधा प्रहार'

मामले ने तूल पकड़ा तो श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कड़े शब्दों में निंदा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर की पैड़ी और मां गंगा करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र हैं। इस तरह तकनीक का दुरुपयोग कर गंगा घाट पर स्नान कर रही माताओं और बहनों के चित्रों को विकृत रूप में पेश करना अक्षम्य अपराध है।

नितिन गौतम ने आक्रोश जताते हुए कहा, "जिस प्रकार से एआई के माध्यम से माताओं-बहनों के साथ यह घिनौना कृत्य किया जा रहा है, वह हरिद्वार तीर्थ के निवासियों और पूरे हिंदू समाज के लिए भारी चिंता का विषय है। यह सिर्फ एक महिला के सम्मान से खिलवाड़ नहीं है, बल्कि कूटरचित साजिश रचकर पावन तीर्थ स्थलों को बदनाम करने और सनातन धर्म की मर्यादा पर सीधा प्रहार करने की कोशिश है। अनादिकाल से सनातन पर आघात होते रहे हैं और आधुनिक दौर में तकनीक के जरिए यह करना आसान हो गया है।" उन्होंने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की कि वीडियो बनाने, एडिट करने और इसे प्रसारित करने वाले तमाम हैंडलर्स के खिलाफ आईटी एक्ट और धार्मिक भावनाएं भड़काने की धाराओं में सख्त मुकदमा दर्ज किया जाए।

उत्तराखंड पुलिस और साइबर सेल एक्टिव, खंगाले जा रहे आईपी एड्रेस

घटना की गूंज शासन तक पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस और साइबर फॉरेंसिक टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। हर की पैड़ी पुलिस चौकी और हरिद्वार साइबर सेल ने सोशल मीडिया के विभिन्न हैंडल्स की पड़ताल शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की तकनीकी जांच कर रहे हैं कि सबसे पहले यह एडिटेड वीडियो किस आईपी एड्रेस और सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजकर संबंधित आपत्तिजनक यूआरएल (URLs) को तुरंत ब्लॉक करने और यूजर का डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि पर्दे के पीछे छिपे आरोपियों को दबोचा जा सके।

एआई और डीपफेक का बढ़ता दुरुपयोग: घाटों पर फोटोग्राफी नियमों पर बहस तेज

इस सनसनीखेज घटना ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की निजता (Privacy) और सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा घाटों पर रोजाना लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं, जहां कई व्लॉगर्स, यूट्यूबर और आम लोग बेरोकटोक वीडियोग्राफी और रील्स बनाते रहते हैं। तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय संगठनों ने मांग उठाई है कि महिला स्नान घाटों के आसपास किसी भी प्रकार की वीडियोग्राफी, मोबाइल शूटिंग और ड्रोन कैमरों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। साथ ही, किसी भी महिला की बिना सहमति अश्लील डीपफेक सामग्री तैयार करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में त्वरित कानूनी कार्रवाई का कड़ा कानून लागू होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई आस्था के केंद्र और महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ न कर सके।

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