मिड-टर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, 'ब्लू वेव' के बीच झूमा अमेरिकी शेयर बाजार
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका में संपन्न हुए बहुप्रतीक्षित मध्यावधि चुनावों (Mid-Term Elections) के नतीजों ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत किलों में जबरदस्त सेंधमारी करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) पर अपना नियंत्रण हासिल कर ऐतिहासिक 'ब्लू वेव' (Blue Wave) दर्ज की है। चुनाव परिणामों के शुरुआती घंटों में राजनीतिक अनिश्चितता और कड़े नियमनों की आशंका से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी घबराहट देखी गई थी, लेकिन जैसे ही नतीजों की तस्वीर साफ हुई, वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स इंडेक्स ने जोरदार यू-टर्न लेते हुए शानदार तेजी पकड़ ली। डाउ जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स में आई इस वापसी ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को नई ऊर्जा दी है।
मिड-टर्म में ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को कैसे लगा बड़ा झटका?
इस मध्यावधि चुनाव को आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के सबसे बड़े लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा था। नतीजों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समर्थित कट्टर दक्षिणपंथी उम्मीदवारों को प्रमुख 'स्विंग स्टेट्स' (Battleground States) में मतदाताओं ने नकार दिया।
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डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, ओहियो और कंसास जैसे पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन गढ़ माने जाने वाले राज्यों की सीनेट सीटों पर भी अप्रत्याशित जीत हासिल की।
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इसके अलावा टेक्सास और जॉर्जिया जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में गवर्नर पद पर भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने परचम लहराया।
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कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने का सीधा अर्थ यह है कि ट्रंप की आक्रामक आर्थिक नीतियों, एकतरफा टैरिफ फैसलों और मनमाने वित्तीय विस्तार पर अब विधायी लगाम (Legislative Check) लग जाएगी।
शुरुआती झटके के बाद अमेरिकी फ्यूचर्स इंडेक्स में क्यों आया उछाल?
चुनाव के शुरुआती रुझान सामने आने पर अमेरिकी बाजारों ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। तकनीकी शेयरों के गढ़ नैस्डैक के फ्यूचर्स (Nasdaq Futures) में 2.4% और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स (S&P 500 Futures) में 1.4% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। टेक निवेशकों को आशंका थी कि डेमोक्रेटिक कांग्रेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर और टेक दिग्गजों पर कड़े नियम और ऊर्जा खपत को लेकर नए प्रतिबंध लागू कर सकती है।
हालांकि, कुछ ही घंटों में बाजार ने इस झटके को पचा लिया और फ्यूचर्स इंडेक्स जोरदार तरीके से हरे निशान में लौट आए:
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एसएंडपी 500 फ्यूचर्स (S&P 500 Futures): शुरुआती गिरावट से पूरी तरह उबरते हुए सकारात्मक दायरे में पहुंचा।
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यूरोपीय बाजारों का रिएक्शन: अमेरिकी बाजार में सुधार का असर यूरोपीय एक्सचेंजों पर भी दिखा, जहां यूरो स्टॉक्स 50 में 0.8%, जर्मनी के डैक्स (DAX) में 0.6% और स्पेन के आईबीईएक्स 35 (IBEX 35) में 1.6% की जबर्दस्त तेजी आई।
वॉल स्ट्रीट को क्यों पसंद आ रहा है 'डिवाइडेड गवर्नमेंट' (सख्त संतुलन) का फॉर्मूला?
शेयर बाजार के विश्लेषक अक्सर कहते हैं कि वॉल स्ट्रीट को अनिश्चितता से नफरत है, लेकिन 'डिवाइडेड गवर्नमेंट' (बंटी हुई सरकार या मजबूत विपक्ष) उसे बहुत भाती है।
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चरम नीतियों पर ब्रेक: ड्यूश बैंक (Deutsche Bank) और फेडेरेटेड हर्मेस के बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की वापसी से किसी भी एक पार्टी के अतिवादी नीतिगत फैसलों (Extreme Policy Shifts) पर रोक लगेगी।
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राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Restraint): विश्लेषकों के अनुसार, डेमोक्रेटिक कांग्रेस अब ट्रंप प्रशासन के अनियंत्रित वित्तीय खर्चों और कर्ज बढ़ाने वाले एजेंडे को नियंत्रित करेगी, जिससे अमेरिकी राजकोषीय घाटे पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
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ऐतिहासिक रुझान: अमेरिकी शेयर बाजार का 80 से अधिक वर्षों का इतिहास बताता है कि मध्यावधि चुनावों के बाद के 12 महीनों में एसएंडपी 500 ने औसतन 14% से 16% का सकारात्मक रिटर्न दिया है। जैसे ही चुनाव खत्म होकर राजनीतिक स्पष्टता आती है, बाजार में राहत की रैली (Relief Rally) देखने को मिलती है।
डॉलर इंडेक्स गिरा, सोने और चांदी में नया विस्फोट
मिड-टर्म नतीजों का सबसे गहरा असर करेंसी और कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला:
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कमजोर हुआ अमेरिकी डॉलर: प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में 0.5% की तेज गिरावट दर्ज की गई और यूरो मजबूत होकर $1.1247 के स्तर पर पहुंच गया।
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सोना $4,000 के पार: डॉलर में कमजोरी और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना (Spot Gold) लगभग 2.9% की छलांग लगाकर $4,041 प्रति औंस के नए ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया।
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चांदी में 4% की तेजी: चांदी की कीमतों में भी 4% का जोरदार उछाल आया और यह $51.76 प्रति औंस के पार निकल गई।
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क्रिप्टोकरेंसी और कच्चा तेल: राजनीतिक उठापटक के बीच बिटकॉइन भी सुधरकर $78,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि ब्रेंट क्रूड $104 प्रति बैरल के आसपास बना रहा।
भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?
अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों के नतीजों का सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट (Sensex और Nifty) पर भी सकारात्मक पड़ने की उम्मीद है। जब भी अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नरमी आती है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड स्थिर होती है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों (विशेष रूप से भारत) में पूंजी का प्रवाह तेज कर देते हैं। इसके अलावा, अमेरिका में नीतिगत स्थिरता रहने से भारतीय आईटी कंपनियों, फार्मास्यूटिकल सेक्टर और निर्यातकों के लिए अनपेक्षित टैरिफ या व्यापारिक बाधाओं का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। यही वजह है कि घरेलू दलाल स्ट्रीट भी अमेरिकी फ्यूचर्स के इस उत्साह पर करीबी नजर बनाए हुए है।