Stock Market Today: शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 73,300 के नीचे फिसला और निफ्टी भी हुआ लाल

Stock Market Today: शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 73,300 के नीचे फिसला और निफ्टी भी हुआ लाल

भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक लाल निशान के गहरे दायरे में चले गए। सप्ताह के पहले हिस्से में दिखी हल्की रिकवरी पूरी तरह गायब हो गई और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अपने अहम मनोवैज्ञानिक स्तर 73,300 के नीचे लुढ़क गया। वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी भारी दबाव में फिसलते हुए लाल निशान पर कारोबार करता नजर आया। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना गहरा था कि बैंकिंग, आईटी, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल जैसे दिग्गज हैवीवेट शेयरों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो पर जोरदार चोट पड़ी है और दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए।

बाजार में अचानक आई इस तेज गिरावट के मुख्य कारण

शेयर बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, आज बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि घरेलू और वैश्विक मोर्चों पर एक साथ बने कई नकारात्मक दबाव जिम्मेदार हैं।

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली: विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों से लगातार पूंजी निकाल रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं और अन्य उभरते बाजारों के अपेक्षाकृत सस्ते वैल्यूएशन के चलते एफआईआई लगातार नेट सेलर की भूमिका में बने हुए हैं, जिससे बाजार की लिक्विडिटी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

  • कमजोर वैश्विक संकेत और अमेरिकी बाजारों का रुख: एशियाई बाजारों में मिला-जुला और कमजोर कारोबार रहा, जबकि वॉल स्ट्रीट से मिले कमजोर संकेतों ने घरेलू निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर किया। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च बने रहने की आशंका ने इक्विटी बाजारों पर ब्रेक लगा दिया है।

  • कंपनियों के तिमाही नतीजों से निराशा: चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट अर्निंग्स कई प्रमुख कंपनियों के अनुमान से कमजोर रहे हैं। बैंकिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों की सुस्त मार्जिन ग्रोथ ने बाजार में मुनाफावसूली को हवा दे दी है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनाव के चलते आयात आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है।

  • रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की मजबूती के सामने भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

किन सेक्टर्स पर टूटा सबसे ज्यादा कहर और कौन से शेयर लुढ़के

बाजार की इस गिरावट में सेक्टोरल फ्रंट पर सबसे बड़ा झटका बैंकिंग और आईटी शेयरों को लगा है। निफ्टी बैंक, जो बाजार की धड़कन माना जाता है, उसमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसे बड़े लेंडर्स में मुनाफावसूली देखी गई। इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों से दबाव झेल रहे आईटी इंडेक्स में टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो में भी गिरावट दर्ज की गई। सीमेंट, पावर और एफएमसीजी से जुड़े शेयरों में भी बिकवाली हावी रही। हालांकि फार्मा और चुनिंदा डिफेंस शेयरों ने निचले स्तरों पर हल्का सपोर्ट दिखाने की कोशिश की, लेकिन बड़े सेक्टर्स की भारी गिरावट के आगे वे बाजार को संभालने में नाकाम साबित हुए। एडवांस-टू-डिक्लाइन रेशियो पूरी तरह बिकवालों के पक्ष में झुका रहा, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या चढ़ने वाले शेयरों की तुलना में काफी अधिक रही।

निवेशकों को मौजूदा बाजार में क्या रणनीति अपनानी चाहिए

बाजार के मौजूदा मिजाज को देखते हुए मार्केट एक्सपर्ट्स और तकनीकी विश्लेषक खुदरा निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक होकर खरीदारी करने से बचने की सलाह दे रहे हैं।

  • जल्दबाजी में बॉटम फिशिंग से बचें: जब तक निफ्टी और सेंसेक्स अपने प्रमुख सपोर्ट लेवल्स पर स्थिरता नहीं दिखाते, तब तक गिरते हुए शेयरों को तुरंत लपकने की जल्दबाजी न करें।

  • SIP और किस्तों में खरीदारी का नियम: जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से वेल्थ क्रिएशन करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट अच्छी क्वालिटी वाले लार्जकैप और फंडामेंटली मजबूत कंपनियों में सिस्टमैटिक तरीके से थोड़ा-थोड़ा निवेश करने का मौका हो सकती है।

  • स्टॉपलॉस का सख्त पालन: इंट्राडे और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बिना सख्त स्टॉपलॉस के कोई भी पोजीशन कैरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि बाजार में वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) के बढ़ने से अचानक बड़े मूव्स देखने को मिल सकते हैं।

  • कैश रिजर्व बनाए रखें: पोर्टफोलियो में कुछ हिस्सा लिक्विड फंड या कैश के रूप में रखें ताकि जब बाजार अपना कंसॉलिडेशन पूरा करके रिवर्सल का स्पष्ट संकेत दे, तब आकर्षक वैल्यूएशन पर निवेश किया जा सके।