मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई टली, SC ने दिया 10 दिन का समय

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई टली, SC ने दिया 10 दिन का समय

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के निलंबन, चुनाव आयुक्तों को मिली वैधानिक छूट और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं के समूह पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई टाल दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे (Counter-Affidavit) का प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई की संभावित तारीख 17 नवंबर तय की है।

चुनाव आयोग के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं ने मांगा समय

मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और तृणमूल कांग्रेस सांसद डोला सेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पीठ के समक्ष पक्ष रखा। वकीलों ने अदालत को बताया कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने केवल एक दिन पहले ही अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है।

  • प्रत्युत्तर के लिए समय: वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि आयोग के 100 से अधिक पन्नों के हलफनामे में कई महत्वपूर्ण तथ्यात्मक दावे किए गए हैं, जिनका अध्ययन कर ठोस जवाब देने के लिए समय की आवश्यकता है।

  • फॉर्म-6 और एकतरफा फैसलों के आरोप: मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि आयोग के जवाब से ही साबित होता है कि फॉर्म-6 के नियमों में बिना सर्वसम्मति और पारदर्शिता के फेरबदल किए गए, जिससे लाखों मतदाताओं के नाम कटने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने आयोग की फाइलों और फैसलों की नोटिंग्स को सुरक्षित (Preserve) रखने की मांग की।

  • चुनाव आयोग का पलटवार: चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि आयोग के सभी निर्णय नियमों के तहत लिए गए हैं और याचिकाकर्ताओं की दलीलें केवल अदालत के बाहर राजनीतिक बयानबाजी गढ़ने के लिए हैं।

पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वह सभी कानूनी और प्रक्रियागत पहलुओं का विस्तार से परीक्षण करेगी और याचिकाकर्ताओं को 10 दिन के भीतर अपना हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान 'ऑडियो म्यूट' रहने पर डिजिटल गलियारों में हलचल

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और वर्चुअल कोर्ट (VC) प्लेटफॉर्म पर अदालती कार्यवाही देख रहे पत्रकारों और वकीलों के बीच उस वक्त भ्रम की स्थिति बन गई, जब काफी देर तक लाइव स्ट्रीमिंग का ऑडियो पूरी तरह बंद (Mute) रहा।

  • तकनीकी दिक्कत या निर्देश: शुरुआत में इसे तकनीकी खामी माना जा रहा था, लेकिन कुछ ही देर पहले सीजेआई सूर्यकांत द्वारा मेंशनिंग के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग को बंद रखने के मौखिक निर्देश दिए जाने के बाद इस घटनाक्रम को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई।

  • वर्चुअल लिंक बंद: सुनवाई के कुछ ही मिनटों के भीतर जब अदालत ने 10 दिन का समय देकर मामले को स्थगित करने का आदेश सुनाया, तो वर्चुअल कोर्ट का लिंक भी बंद कर दिया गया।

  • विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने लाइव स्ट्रीमिंग का ऑडियो बंद रखे जाने पर सवाल उठाते हुए इसे सार्वजनिक पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत बताया, जबकि कोर्ट रजिस्ट्री के सूत्रों ने इसे केवल मेंशनिंग और अर्जेंट मैटर ट्रांजिशन के बीच की सामान्य तकनीकी प्रक्रिया करार दिया।

क्या हैं मुख्य याचिकाएं और कानूनी आपत्तियां?

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन याचिकाओं में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे उठाए गए हैं:

  1. चुनाव आयुक्तों की कानूनी छूट (Immunity): नए मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त कानून, 2023 की धारा 16 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कामकाज के दौरान की गई कार्रवाइयों पर आजीवन कानूनी संरक्षण दिया गया है।

  2. सीईसी के निलंबन की मांग: कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक निर्णयों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके काम पर रोक लगाने की मांग की गई है।

  3. वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण: बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य चुनावी राज्यों में चलाए जा रहे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान (SIR) में विपक्षी दलों ने करोड़ों वास्तविक मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाने की आशंका जताई है।

10 दिन बाद जब याचिकाकर्ता अपना रिजॉइंडर दाखिल करेंगे, तो नवंबर के मध्य में होने वाली इस सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।