शेयर बाजार में जोरदार वापसी: सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों का उछाल, निफ्टी 22,700 के पार

शेयर बाजार में जोरदार वापसी: सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों का उछाल, निफ्टी 22,700 के पार

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्रों से जारी बिकवाली के दबाव के बाद आज शानदार यू-टर्न देखने को मिला है। शुरुआती सत्र में कमजोरी और अनिश्चितता के बाद बाजार में निचले स्तरों से जबर्दस्त वैल्यू बाइंग लौटी, जिसने प्रमुख सूचकांकों को दिन के उच्चतम स्तरों के करीब पहुंचा दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अपने निचले स्तरों से 800 अंक से अधिक की जोरदार रिकवरी करने में सफल रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 200 से अधिक अंकों की तेजी दर्ज करते हुए अहम मनोवैज्ञानिक स्तर 22,700 के पार निकलकर कारोबार कर रहा है। इस तेज उछाल ने निवेशकों और ट्रेडर्स की धारणा को मजबूती दी है, जिससे पिछले कुछ दिनों से बना मंदी का माहौल सकारात्मक बदलाव में बदल गया है।

किन सेक्टर्स ने फूंकी बाजार में जान: बैंकिंग, आईटी और ऑटो में लिवाली

बाजार की इस तेज रिकवरी का नेतृत्व मुख्य रूप से लार्ज-कैप शेयरों और बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं तथा आईटी सेक्टर ने किया। निफ्टी बैंक इंडेक्स में निचले स्तरों से आई तेज रिकवरी ने समूचे बाजार का रुख बदला। इसके साथ ही, ऑटोमोबाइल, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भी चुनिंदा लिवाली देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हरे निशान में लौटते दिखे, जो इस बात का संकेत है कि घरेलू खुदरा और संस्थागत निवेशक हर बड़ी गिरावट का उपयोग गुणवत्तापूर्ण शेयरों को जमा करने के लिए कर रहे हैं। दिग्गज ब्लू-चिप कंपनियों में मजबूत वॉल्यूम के साथ हुई खरीदारी ने शॉर्ट-कवरिंग को बढ़ावा दिया, जिससे सूचकांकों में एकतरफा उछाल दर्ज हुआ।

बाजार में अचानक आई तेजी के मुख्य कारण और ट्रिगर्स

इस उछाल के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारक एक साथ सक्रिय हुए हैं। सबसे पहला कारण ओवरसोल्ड स्थिति से तकनीकी बाउंस-बैक माना जा रहा है। निफ्टी और सेंसेक्स लगातार गिरावट के बाद अहम सपोर्ट जोन के करीब पहुंच चुके थे, जहां रिस्क-टू-रिवॉर्ड रेशियो खरीदारों के पक्ष में आ गया। दूसरा कारण घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का लगातार मजबूत इनफ्लो है, जिसने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली को पूरी तरह संतुलित करने का काम किया है। इसके अलावा, हालिया नतीजों के दौर में कई सेक्टर लीडर्स के बेहतर मार्जिन और स्थिर गाइडेंस ने भी सेंटीमेंट को सुधारा है। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में आए आंशिक ठहराव ने भी भारतीय बाजार को राहत देने में अहम भूमिका निभाई है।

तकनीकी स्तर और आगे की रणनीति: क्या यह तेजी टिकेगी?

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,700–22,750 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर रहा था, जिसे पार करने के बाद अब 22,850 से 22,900 के स्तर पर नजरें टिकी हैं। अगर बाजार 22,700 के स्तर के ऊपर क्लोजिंग देने में कामयाब रहता है, तो शॉर्ट-टर्म मोमेंटम बुल्स के पक्ष में बना रहेगा। वहीं डाउनसाइड में 22,500–22,550 का दायरा अब एक मजबूत सपोर्ट बेस बनकर उभरा है। हालांकि, बाजार के जानकारों की सलाह है कि इस तरह की तेज उछाल के बाद आक्रामक लीवरेज्ड ट्रेडिंग से बचना चाहिए। निवेशकों को क्वालिटी लार्ज-कैप और मजबूत अर्निंग्स विजिबिलिटी वाली मिड-कैप कंपनियों में स्टॉप-लॉस के साथ चरणबद्ध तरीके से अपनी पोजीशन बनानी चाहिए।