74 km लंबे जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को मिली सुपर रफ्तार: योगी कैबिनेट ने पास किया बजट
उत्तर प्रदेश के सड़क बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक और बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुदूर इलाकों से निर्बाध गति से जोड़ने के लिए प्रस्तावित 74.3 किलोमीटर लंबे 'जेवर लिंक एक्सप्रेसवे' के निर्माण कार्य को अब पंख लगने वाले हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने जेवर लिंक एक्सप्रेसवे समेत प्रदेश के चार प्रमुख लिंक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के लिए 17,542 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जमीन अधिग्रहण और प्रोजेक्ट की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा किए जाने के बाद यूपीडा (UPEIDA) ने निर्माण एजेंसियों के चयन और जमीनी काम को तेज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड में कराया जाएगा, जिसे टेंडर फाइनल होने के बाद लगभग तीन वर्षों के भीतर पूरा करने का सख्त लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के निर्माण और अगले पांच वर्षों के रखरखाव का पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार अपने संसाधनों से वहन करेगी, जिसमें केंद्र सरकार की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं है। इस कॉरिडोर के धरातल पर उतरने के बाद प्रदेश का पश्चिमांचल, मध्यांचल और पूर्वांचल सीधे तौर पर एक आधुनिक हाई-स्पीड नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे यात्रा के समय में ऐतिहासिक गिरावट आएगी।
यहां से निकलेगा पूरा रूट: फिल्म सिटी से स्याना तक का खाका
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दो सबसे बड़े आर्थिक और औद्योगिक गलियारों—यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे—के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाएगा।
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शुरुआती प्वाइंट (यमुना एक्सप्रेसवे/फिल्म सिटी): यह लिंक एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-21 के पास, जहां अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी और जेवर एयरपोर्ट का उत्तरी छोर विकसित हो रहा है, वहां से शुरू होगा। यहां एक विशाल इंटरचेंज बनाया जाएगा जो एयरपोर्ट की ओर जाने वाली 130 मीटर चौड़ी पेरिफेरल रोड और यमुना एक्सप्रेसवे को एक साथ जोड़ेगा।
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मध्यवर्ती क्षेत्र (बुलंदशहर के 48 से अधिक गांव): यमुना सिटी की सीमा पार करने के बाद यह एक्सप्रेसवे बुलंदशहर जिले की 5 तहसीलों के ग्रामीण इलाकों से गुजरेगा। इनमें चोला, शिकारपुर, जहांगीराबाद और आसपास के कृषि-औद्योगिक बेल्ट शामिल हैं। कुल 56 गांवों के दायरे को कवर करते हुए यह मार्ग पूरी तरह से ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट पर तैयार होगा।
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टर्मिनल प्वाइंट (गंगा एक्सप्रेसवे/स्याना): बुलंदशहर के स्याना तहसील के पास जाकर यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक बन रहे महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे में समाहित हो जाएगा। इसके जुड़ते ही प्रयागराज, वाराणसी या लखनऊ की तरफ से आने वाले वाहन चालक बिना दिल्ली या परी चौक के ट्रैफिक जाम में फंसे सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से मुड़कर जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे पर पहुंच सकेंगे।
95% जमीन की खरीद पूरी: बाकी 33 एकड़ के लिए अधिग्रहण की तैयारी
परियोजना की गति को बनाए रखने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) और बुलंदशहर जिला प्रशासन पिछले कई महीनों से युद्धस्तर पर जमीन की खरीद कर रहे हैं। यीडा के अधिकार क्षेत्र में कुल 740 एकड़ जमीन खरीदी जानी थी, जिसमें से लगभग 95 प्रतिशत जमीन की रजिस्ट्री किसानों से आपसी सहमति के आधार पर पूरी कर ली गई है।
वर्तमान में केवल 33 एकड़ जमीन का पेच फंसा हुआ है, जो मुख्य रूप से रबूपुरा और कपना गांव के आसपास का इलाका है। इस जमीन पर कुछ किसानों के पक्के मकान और बुनियादी ढांचे आ रहे हैं, जिन्हें शिफ्ट करने को लेकर बातचीत चल रही है। यमुना प्राधिकरण ने पीडब्ल्यूडी (PWD) से इन मकानों का विधिवत मूल्यांकन कराया है। चूंकि यहां इंटरचेंज का बड़ा लूप बनना है, इसलिए प्रशासन ने तय किया है कि यदि सहमति से जमीन नहीं मिलती है, तो जनहित को ध्यान में रखते हुए अनिवार्य भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहित की जाएगी ताकि निर्माण कार्य में एक दिन की भी देरी न हो।
दिल्ली-एनसीआर और वेस्ट यूपी के सफर में कितना समय बचेगा?
वर्तमान में बुलंदशहर, स्याना या मेरठ के ग्रामीण इलाकों से जेवर और ग्रेटर नोएडा की दूरी तय करने में भारी ट्रैफिक, सिंगल लेन सड़कों और स्थानीय चौराहों की वजह से 2 से 2.5 घंटे का समय लग जाता है। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह 74 किलोमीटर का सफर 100 से 120 किमी/घंटा की रफ्तार से महज 35 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
इसके अलावा आगरा, मथुरा, हाथरस और अलीगढ़ की ओर से जेवर एयरपोर्ट आने वाले यात्रियों को अब परी चौक (ग्रेटर नोएडा) जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी। लिंक एक्सप्रेसवे से सीधे एयरपोर्ट के मुख्य टर्मिनल तक पहुंचा जा सकेगा। साथ ही गाजियाबाद, हापुड़ और मुरादाबाद की तरफ से आने वाला ट्रैफिक भी गंगा एक्सप्रेसवे और इस लिंक वे के जरिए सीधे यमुना सिटी के औद्योगिक सेक्टरों तक बिना किसी सिग्नल के पहुंच सकेगा।
यमुना सिटी के 20+ सेक्टरों और लॉजिस्टिक्स हब को संजीवनी
सड़क केवल सफर आसान नहीं करती, बल्कि अपने साथ उद्योगों और रोजगार का नया तंत्र लेकर आती है। यह लिंक एक्सप्रेसवे यमुना सिटी के सेक्टर-1, 2, 3, 5, 8, 9, 10, 18 और 31B समेत 20 से अधिक सेक्टरों को सीधी कनेक्टिविटी देगा, जहां इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, टॉय पार्क, अपैरल पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहे हैं।
जेवर एयरपोर्ट के पास बन रहे मल्टीमॉडल कार्गो हब के लिए यह एक्सप्रेसवे एक जीवन रेखा की तरह काम करेगा, जिससे पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान और व्यापारी अपने कृषि व औद्योगिक उत्पाद सीधे एयर कार्गो तक कुछ ही घंटों में पहुंचा सकेंगे। यूपी कैबिनेट से बजट मिलने के बाद अब जमीनी स्तर पर अर्थमूवर और मशीनों के उतरने का इंतजार है, जिसके बाद पश्चिमी यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।