चक्रवात 'अर्नब' को लेकर यूपी के शहरों में 4 दिन का महा-अलर्ट: आंधी-बारिश और वज्रपात का साया

चक्रवात 'अर्नब' को लेकर यूपी के शहरों में 4 दिन का महा-अलर्ट: आंधी-बारिश और वज्रपात का साया

बंगाल की खाड़ी से उठे शक्तिशाली चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के तटवर्ती इलाकों से टकराने के बाद अब इसका सीधा और व्यापक असर उत्तर प्रदेश के मैदानी और तराई इलाकों में दिखने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार और राहत आयुक्त कार्यालय ने प्रदेश के कई शहरों में लगातार चार दिनों (28 से 31 अक्टूबर) तक के लिए आंधी, गरज-चमक, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली (वज्रपात) का कड़ा अलर्ट जारी कर दिया है। चक्रवात के प्रभाव से वातावरण में नमी और बादलों का घनत्व अचानक बढ़ने से न केवल दिन और रात के पारे में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट आने का अनुमान है, बल्कि 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी और झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में अमूमन मौसम शुष्क और गुलाबी ठंड की ओर अग्रसर रहता है, लेकिन चक्रवात अर्नब के अवशिष्ट प्रभाव (Remnants) और ऊपरी वायुमंडल में बन रहे डिप्रेशन के कारण मौसमी परिस्थितियां एकदम प्रतिकूल हो गई हैं। राज्य के पूर्वी अंचलों (पूर्वांचल) से लेकर अवध, रुहेलखंड और तराई के जनपदों तक मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। शासन ने इसे किसी सामान्य मानसूनी बारिश की तरह न लेते हुए आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से देखा है, क्योंकि तेज हवाओं के साथ होने वाली बेमौसम बारिश शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जान-माल के नुकसान का बड़ा कारण बन सकती है। इसी को देखते हुए मुख्य सचिव और राहत आयुक्त स्तर से सभी जिलाधिकारियों (DM), नगर आयुक्तों और पुलिस कप्तानों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने का फरमान जारी कर दिया गया है।

जर्जर भवनों पर प्रशासन का कड़ा रुख: खाली कराने और नोटिस देने के सख्त निर्देश

इस चार दिवसीय मौसमी चेतावनी के बीच राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता शहरों में मौजूद दशकों पुराने जर्जर, खस्ताहाल और असुरक्षित मकानों को लेकर है। अक्सर देखा गया है कि लगातार बारिश होने पर सीलन और तेज हवाओं के थपेड़ों से कमजोर दीवारें और पुरानी छतें अचानक भरभराकर गिर जाती हैं, जिससे मलबे में दबकर मासूम नागरिकों की जान चली जाती है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी जर्जर भवनों का तत्काल भौतिक सत्यापन (फिजिकल सर्वे) कराएं और जरूरी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।

प्रशासनिक गाइडलाइंस के अनुसार, यदि किसी इमारत की हालत अत्यंत नाजुक और रहने लायक नहीं है, तो उसमें निवास कर रहे लोगों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित स्थानों या रैन बसेरों में विस्थापित (Evacuate) किया जाए। जर्जर मकानों के स्वामियों और किरायेदारों को स्पष्ट चेतावनी और विधिक नोटिस थमाए जा रहे हैं कि वे खतरनाक स्थिति में वहां न रुकें। इसके अलावा, व्यस्त सड़कों और घनी बस्तियों के किनारे स्थित कमजोर दीवारों, बाउंड्री वॉल्स और पुरानी छतों के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाने को कहा गया है ताकि आंधी-बारिश के दौरान कोई भी राहगीर या वाहन चालक उनके नीचे शरण न ले। पुलिस और नगर निगम की प्रवर्तन टीमों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि किसी भी जर्जर निर्माण के ढहने से जनहानि की नौबत न आए।

कौन-कौन से शहर और जिले रडार पर? येलो और ऑरेंज अलर्ट का पूरा ब्योरा

मौसम विभाग के विश्लेषण के मुताबिक, चक्रवात अर्नब का असर उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से पूरब से पश्चिम और तराई के इलाकों की ओर बढ़ेगा। इसके लिए मौसम विज्ञानियों ने जिलों की संवेदनशीलता के आधार पर अलर्ट जारी किया है:

  1. शुरुआती प्रभाव (येलो अलर्ट वाले जनपद): पहले चरण में चक्रवाती हवाओं का प्रवेश बिहार और झारखंड से सटे पूर्वांचल के सीमावर्ती जिलों से हो रहा है। इसके तहत सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर, मऊ और बलिया में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट है। गंगा के तटीय इलाकों में तेज हवाओं को देखते हुए नौका संचालन पर विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

  2. मध्यम और भारी प्रभाव (ऑरेंज अलर्ट वाले जनपद): जैसे-जैसे सिस्टम आगे बढ़ रहा है, 29 और 30 अक्टूबर को अवध और मध्य यूपी के शहर इसके दायरे में आ रहे हैं। लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज और अमेठी में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने और 45 से 50 किमी/घंटा की गति से आंधी चलने की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

  3. तराई और रुहेलखंड का बेल्ट: 30 और 31 अक्टूबर को चक्रवाती नमी तराई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को प्रभावित करेगी। बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, गोंडा, बलरामपुर के साथ-साथ बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम सबसे अधिक आंका गया है।

राहत आयुक्त कार्यालय की नई एडवाइजरी: नगर निगम, बिजली विभाग और आपदा प्रबंधन एक्टिव

तूफान के संभावित खतरों को बेअसर करने के लिए लखनऊ स्थित राहत आयुक्त मुख्यालय ने अंतर-विभागीय समन्वय के साथ एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। शहरी विकास विभाग और नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे मुख्य मार्गों, अंडरपासों और निचले रिहायशी इलाकों में जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए पंपिंग सेट्स और सक्शन मशीनों को पहले से तैयार रखें। नालों की सिल्ट सफाई और जलभराव वाले चौराहों पर ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाने के निर्देश हैं ताकि भारी बारिश के दौरान शहर की रफ्तार न थमे।

पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) को विशेष रूप से हिदायत दी गई है कि आंधी-तूफान के समय बिजली के जर्जर तारों, ट्रांसफार्मरों और खंभों पर पैनी नजर रखी जाए। यदि तेज हवाओं से पेड़ की टहनियां तारों पर गिरती हैं, तो तत्काल संबंधित फीडर की बिजली काटकर जानलेवा दुर्घटनाओं को रोका जाए। आंधी थमते ही फॉल्ट को ठीक करने के लिए बिजली विभाग की अतिरिक्त इमरजेंसी गैंग्स को फील्ड में तैनात किया गया है। इसके साथ ही एसडीआरएफ (SDRF) और पीएसी (PAC) की फ्लड यूनिट्स को बोट्स और लाइफ-जैकेट्स के साथ स्टैंडबाय पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्य बिना देरी के शुरू किया जा सके।

पारे में 8 डिग्री तक गिरावट और खेती पर प्रभाव: आम जनता व किसानों के लिए क्या है सलाह?

मौसम में आने वाला यह अचानक बदलाव केवल बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में सर्दी के आगमन की रफ्तार को भी कई गुना तेज कर देगा। दिन के अधिकतम तापमान में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस की तेज गिरावट दर्ज होने से दोपहर के समय भी हल्की ठंडक और ठिठुरन का अहसास होने लगेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बारिश के बाद जब आसमान साफ होगा, तो पछुआ हवाओं के जोर पकड़ने से रात का न्यूनतम तापमान तेजी से लुढ़केगा, जिससे नवंबर के पहले हफ्ते में ही कोहरे और कड़ाके की सर्दी की दस्तक हो जाएगी।

कृषि विशेषज्ञों ने इस बेमौसम आंधी और बारिश को लेकर किसानों के लिए भी विशेष एडवाइजरी जारी की है। इस समय प्रदेश के खेतों में धान की पकी फसल खड़ी है और कई इलाकों में कटाई का काम चल रहा है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि अगले चार दिनों तक धान की कटाई पूरी तरह स्थगित रखें और कटी हुई फसलों को खुले खलिहानों या मंडियों में छोड़ने के बजाय सुरक्षित शेड या तिरपाल से अच्छी तरह ढककर रखें। साथ ही, जिन किसानों ने आलू, सरसों और दलहन की अगेती बुवाई की है, वे खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध करें ताकि बीज गलने से बच सके।

आम जनता से भी अपील की गई है कि खराब मौसम, तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने के दौरान वे खुले मैदानों, बड़े पेड़ों, जर्जर दीवारों और होर्डिंग्स के नीचे कतई खड़े न हों। किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कंट्रोल रूम या टोल-फ्री नंबर 1070 पर तुरंत सूचना देकर सहायता प्राप्त की जा सकती है।